क्या है स्वाइन फ्लू, कैसे बचे संक्रमण से
Editor : Mini
 18 Jan 2019 |  106

एचवनएनवन वायरस मुख्य रूप से सुअरों से मानव शरीर में हवा के जरिए श्वांस के माध्यम से शरीर में पहुंचता है। उसके बाद एक मनुष्य से दूसरे मनुष्य में वायरस आसानी से फैल जाता है। संक्रमित व्यक्ति की छींक में एक लाख से अधिक ट्रॉपलेट होते हैं, जो तीन से छह फीट की दूरी तक खड़े व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर सकता है। यही कारण है कि वायरस से संक्रमण से बचने के लिए सार्वजनिक जगहों पर मुंह पर कपड़ा रखकर छींकने की सलाह दी जाती है। वर्ष 2009 में संक्रमण विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पेंडेमिक बीमारी की श्रेणी में रखा था।

कितने तरह का संक्रमण
साधारण फ्लू- मौसम बदलने के साथ होने वाले इंफ्लूएंजा को साधारण फ्लू कहा जाता है। रोगप्रतिरोधक क्षमता कम होने वाले लोगों में इसके वायरस आसानी से प्रभाव डालते हैं। हल्का बुखार, बदन टुटना, गले में खराश और मांसपेशियों में दर्द के साथ इसे लक्षण सामने आते हैं। हालांकि यह फ्लू तीन से चार दिन में बिना दवा के ठीक हो जाता है।
गंभीर फ्लू- इसकी शुरूआत भी साधारण फ्लू के साथ होती है, लेकिन एक समय बाद संक्रमण फेफड़े और किडनी को प्रभावित करना शुरू कर देता है। इसे गंभीर अवस्था का फ्लू कहे हैं। इसमें मरीज को छाती में दर्द, सांस लेने में दिक्कत और रक्तचाप कम होने लगता है। गर्भवती महिलाएं, बच्चे और बुजुर्गो पर इसका सबसे अधिक असर देखने को मिलता है।

कैसे होती है वायरस की जांच
राष्ट्रीय संचारी रोग विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई एक विशेष जांच किट से ही स्वाइन फ्लू के वायरस की पुष्टि होती है। इसके लिए मरीज के गले के स्वाब व नाक के द्रव्य को लिया जाता है। इससे स्वाब में एचवनएनवन की पुष्टि के बाद ही मरीज को वायरस से बचाव की दवा दी जाती है।

कैसे होता है इलाज
स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए हालांकि अब बाजार में वैक्सीन उपलब्ध है। संक्रमण का प्रभाव बढ़ने से पहले ही इसे लिया जा सकता है। हालांकि बीमारी में इलाज के लिए टैमी फ्लू दवा दी जाती है। लेकिन वायरस की पुष्टि के बाद दवा दिया जाना बेहतर बताया गया है, क्योंकि बिना पुष्टि के दवा देने पर संक्रमण हो जाने पर फिर वह दवा मरीज पर असरदार नही रह जाती है।

क्या बरतें सावधानी
-स्वच्छता का ध्यान रखें
-छींकने और खांसने के बाद हाथ धोएं
-संक्रमित मरीज का अलग इलाज हो
-इसके लिए आइसोलेटे वार्ड जरूरी है।
-मरीज के साथ ही परिजन और डॉक्टर भी सर्जिकल मास्क पहनें
-संक्रमण खत्म होने तक मरीज की इस्तेमाल की गई चीजें भी अलग रखें




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