डिस्लेक्सिया के 20 प्रतिशत बच्चों को नहीं मिलता एडमिशन
| 3/5/2019 9:42:42 AM

Editor :- Mini

नई दिल्ली,
निजी स्कूल में दस प्रतिशत बच्चे डिस्लेक्सिया से पीड़ित है। जिनकी पहचान नहीं हो पाती है। पढ़ने में कमजोर मानकर ऐसे बच्चो को अध्यापकों के भी ताने सुनने पड़ते हैं। तमाम कोशिशों के बाद इन बच्चों को सामान्य बच्चों से अलग रखा जाता है और उन्हें स्कूल में प्रवेश नहीं मिल पाता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने डिस्लेक्सिया बीमारी पर एक कार्यक्रम में छात्रा द्वारा पूछे गए सवाल का मजाक बनाया, जबकि असल जिंदगी में यह बच्चे अवहेलना झेलते हैं। तारे जमीं पर, फिल्म में पहली बार आमिर खान ने इस बच्चों की जिंदगी पर प्रकाश डालने की कोशिश की थी।
पीयरसन क्लीनिकल एसेसमेंट की चेयरपर्सन डॉ. जयश्री दासगुप्ता ने बताया डिस्लेक्सिया बहुत गंभीर बीमारी नहीं है। केवल इस तरह के बच्चों के अध्यापक व परिजनों का विशेष सहयोग मिलना चाहिए। ज्यादा समय क्योंकि बच्चा स्कूल में बीताता है इसलिए प्रशिक्षण के माध्यम से अध्यापकों को सबसे पहले उनकी तकलीफ को समझना चाहिए। डॉ. जयश्री ने बताया कि इन बच्चों को एक विशेष तरह के अटेंशन की जरूरत होती है, जो कि हर शिक्षक या खुद मां बाप नहीं दे पाते। इन बच्चों के लिए डीएसटीजे स्क्रीनिंग पैटर्न तैयार किया गया है, जो नॉन वर्बल (बिना बोले) होगा, इसमें बच्चों को कुछ तस्वीरें दिखाकर उनकी पहचान कराई जाती है। दूसरे चरण के डीएसटीजे टू में अध्यापकों को यह बताया जाता है कि अगर कोई बीमारी के नजदीक है तो उसकी पहचान कैसे की जाएगी। स्कलों में अध्यापकों को डिस्लेक्सिया प्रशिक्षण के बाद अध्यापकों को साधारण जांच किट दी जाती है जिसे मेंटल इंटेलिजेंस स्क्रीनिंग की जा सके।


20 फीसदी को नहीं मिलता प्रवेश
एक्शन डिस्लेक्सिया दिल्ली की चेयनपर्सन अंजली बवाना ने बताया कि हर साल राजधानी के 20 फीसदी बच्चों को सिर्फ इसलिए प्रवेश नहीं मिल पाता क्योकि उनकी बौद्धिक क्षमता कमजोर होती है। सीबीएसई की गाइडलाइन के बाद भी डिस्लेक्सिया के बच्चों को साधारण बच्चों के साथ शिक्षा नहीं दी जाती है। हालांकि बोर्ड ने बच्चों को परीक्षा में पन्द्रह मिनट का अतिरिक्त समय और विषयों के चयन की छूट दी है।

कैसे हो पहचान
-गणित विषय में विशेष रूप से गलती करते रहना
-अंग्रेजी के शब्दों को न पहचान पाना या गलत लिखना
-होमवर्क करने में देरी लगाना, बार-बार रबड़ का प्रयोग
-वर्णमाला के एक ही शब्द की विशेष पहचान, अन्य की नहीं
-लिखते समय कागज पर पेंसिल का अधिक जोर लगाना आदि



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