प्रोटोन थेरेपी से होगा अपोलो में कैंसर का इलाज
| 4/26/2019 10:13:48 AM

Editor :- Mini

नई दिल्ली,
कैंसर के मरीजों के लिए एक अच्छी खबर है। अपोलो अस्पताल में एशिया का पहला प्रोटोन कैंसर सेंटर शुरू किया गया है, जिससे कैंसर का शिकार मरीजों को अधिक बेहतर इलाज मिल सकेगा। प्रोटोन थेरेपी में पेसिंल बीम स्कैनिंग की मदद से कैंसर युक्त सेल्स की जगह तक सटीक पहुंचा जा सकता है, इससे मरीज की स्वस्थ सेल्स को नुकसान नहीं पहुंचता है। मशीन की कीमत 1300 करोड़ रुपए है।
अपोलो प्रोटोन कैंसर सेंटर की मदद कैंसर के शिकार मरीजों को देश में ही विश्व स्तर की चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेगी। एपीसीसी की जानकारी देते हुए अपोलो अस्पताल के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन डॉ. प्रताप सी रेड्डी ने बताया कि मुझे इस बात की जानकारी देते हुए बेहद गर्व महसूस हो रहा है कि कैंसर के इलाज के लिए प्रोटोन थेरेपी की विश्व स्तरीय सुविधाओं युक्त सेंटर अब भारत में भी शुरू हो गया है। डॉ. रेड्डी ने बताया कि 150 बेड के एपीसीसी सेंटर में तीन प्रोटोन थेरेपी रूप के अलावा, कैंसर के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाले बेहतर गुणवत्ता की रेडिएशन, इम्यूनोथेरेपी, मेडिकल ऑनकोलॉजी और कीमोथेरेपी आदि की सुविधाएं हैं। प्रोटोन थेरेपी बच्चों के कैंसर और बे्रन ट्यूमर के लिए अधिक कारगर होगी, क्योंकि कैंसर युक्त सेल्स पर इसका प्रभाव इलाज की अन्य तकनीक से अधिक सटीक पड़ता है और यह ट्यूमर की आसपास की सेल्स को भी क्षति नहीं पहुंचाता, सही मायने में इसे इलाज के एक विशेष उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। कैंसर सेंटर में केवल इलाज ही नहीं जांच की भी सभी आधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जाएगा, इसमें एपीसीसी में डिजिटल मॉड्यूलर युक्त एमआरआई थियेटर, कैंसर युक्त सेल्स की डीएनए और जेनोमिक प्रोफाइलिंग के साथ ही डिजिटल पैथोलॉजी सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

कैसे असरदार है प्रोटोन थेरेपी
प्रोटोन थेरेपी ऐसे कई तरह के कैंसर के इलाज में कारगर है जहां कीमो और रेडिएशन का प्रभाव नहीं पहुंच पाता है, बच्चों के कैंसर, दिमाग के ट्यूमम, आंख नाक और कान के ट्यूमर के अलावा प्रोटोन थेरेपी को अमाश्य, पेलविक और दोबारा हुए कैंसर के इलाज में इसका सफल प्रयोग देखा गया है।
प्रोटोन थेरेपी में हाईबीम प्रोटोन किरणों बेहद की संकरे या पेंसिल नुमा आकार के जरिए ट्यूमर तक पहुंचाया जाता है, इसलिए इससे प्रीसाइज या सटीक इलाज होता है, बेहद संकरे लेकिन प्रभावित जगह तक पहुंचने की वजह से इलाज के दौरान ट्यूमर के आसपास की स्वस्थ सेल्स को इससे क्षति नहीं पहुंचती है और कैंसर युक्त सेल्स खत्म भी हो जाती हैं।
अपोलो प्रोटोन कैंसर सेंटर के मेडिकल निदेशक डॉ. राकेश जलाली ने बताया कि इसे खास तौर पर कैंसर युक्त सेल्स से लड़ने के लिए तैयार उपकरण कहा जाता है, जो गंभीर तरह के कैंसर युक्त ट्यूमर पर सफलता पूर्वक असर करता है। आने वाले पांच से दस साल में हम अधिकांश ट्यूमर को प्रोटोन थेरेपी की मदद से ठीक कर सकेगें, अभी केवल पांच से दस प्रतिशत कैंसर को इस थेरेपी से ठीक किया जाता है, जबकि आने वाले कुछ साल में 25 प्रतिशत कैंसर इस विधि से सही किए जा सकेगें, जो कैंसर के इलाज में एक सफलता होगी।









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