कहीं आप भी तो एक्टिव ब्लैडर के शिकार तो नहीं
Editor : monika
 19 Jul 2016 |  478

नई दिल्ली: अगर आपको दिन में 8 से 10 बार या हर दो घंटे से यूरिन करने जाना पड़ रहा है तो इसका कारण ओवर एक्टिव ब्लैडर हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादातर लोग इस मामले को हल्के में लेते हैं। हालांकि इससे आगे चलकर परेशानी हो सकती है। इसी पर अवेयरनेस के लिए 20 से 26 जून तक इंटरनैशनल कंटीनेंस वीक मनाया जा रहा है।

फोर्टिस एस्कॉटर्स हार्ट इंस्टिट्यूट के यूरोलॉजिस्ट डॉ. राजेश अहलावत का कहना है कि कई स्टडीज से साफ हो गया है कि ज्यादातर लोग शर्मिंदगी की वजह से डॉक्टर के पास जाने से हिचकिचाते हैं। ओवर एक्टिव ब्लैडर (ओएबी) ऐसी प्रॉब्लम है जिसमें ब्लैडर बहुत अधिक काम करने पर नॉर्मल से ज्यादा सिकुड़ जाता है। कई बार ब्लैडर का सिकुड़ना गलत समय पर होता है। ब्लैडर के मसल्स पर भी इसका असर होता है। इससे ब्लैडर जितना भरा होता है, उससे ज्यादा भरे होने का गलत मेसेज ब्रेन को देने लगता है। ऐसे में पूरी तरह से भरा न होने पर भी ब्लैडर सिकुड़ने लगता है। इस वजह से यूरिन जाना जरूरी लगने लगता है।

गंगाराम अस्पताल के यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर सुधीर चड्ढा ने बताया कि ओएबी में यूरिन करने की तुरंत जरूरत महसूस होना, बार-बार टॉयलेट होने और यूरिन का अचानक रिसाव होने जैसे लक्षण होते हैं। डॉक्टर ने कहा कि इससे पीड़ित व्यक्ति की लाइफ की क्वॉलिटी पर भी असर होता है और नेगेटिव फीलिंग आने लगती है। कई बार कॉन्फिडेंस भी घटने लगता है। लाइफस्टाइल में चेंज और इलाज से इस प्रॉब्लम को दूर किया जा सकता है। डॉक्टर ने कहा कि इसका इलाज पेल्विक फ्लोर मसल थेरपी से भी होता है। इस थेरपी में ब्लैडर पर कंट्रोल बढ़ाने के लिए एक्सरसाइज कराई जाती हैं।


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