40 प्रतिशत माएं नवजात को नहीं पिलाती पहला दूध
| 11/25/2023 9:50:06 PM

Editor :- Mini

नई दिल्ली, स्तनपान को लेकर सरकार के कई जागरूकता कार्यक्रमो के बावजूद 40 प्रतिशत माएं नवजात को अपना पहला गाढ़ा दूध नही पिलाती है। लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में इस बावत एक ट्रेनर का ग्रुप तैयार किया जिससे गर्भवती महिलाएं में खून की कमी या एनीमियामाँ के पहले गाढ़े दूध का महत्व, किशोरावस्था स्वास्घ्य आदि विषयों के बारे में आशा और आंगनबाडी कार्यकर्ताओं को जागरूक किया गया। जिसके बेहतर परिणाम देखे गए। नारची (नेशनल एसोसिएशन फ़ॉर रिप्रोडक्टिव एंड चाइल्ड हेल्थ) दिल्ली चैप्टर के 29वी वर्कशॉप का आयोजन किया गया। जिसमें महिला एवं शिशु स्वास्थ्य पर विस्तृत चर्चा की गई।



नारची  की आर्गेनाईजेशन सेक्रेटरी और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के गायनी एन्ड ऑब्स विभाग की प्रमुख डॉ मंजू पूरी ने बताया कि हमने केस स्टडी में देखा कि 40 प्रतिशत महिलाएं नवजात को अपना पहला दूध नही पिला पाती है। उन्होंने बताया कि नवजात के जन्म के बाद सबसे पहला काम उसे माँ का दूध पिलाना चाहिये, सिजेरियन केस में भी माँ बच्चे को दूध पिला सकती है, इसके लिए ओटी में भी बच्चे को मां के पास ले जाया जा सकता है। मंजू ने बताया कि गर्भवती महिलाओं में खून की कमी भी एक बड़ा विषय है, गर्भधारण करने के बाद यह और भी गंभीर हो जाता है। 42 प्रतिशत गर्भवती1 महिलाओं में खून की कमी देखी गयी, इसके साथ ही विटामिन बी12 की कमी भी गर्भवती महिलाओं में एक बड़ा मुद्दा, जो हमारी सरकार की योजनाओं1 के अंतर्गत नहीं आती है, हमारे अस्पताल और पूरी दिल्ली में 60 से 62 प्रतिशत महिलाओं में बी12 की कमी है। जैसे जैसे प्रेग्नेंसी बढ़ती है, बच्चे की बी12 की जरूरत बढ़ती जाती है। इसकी एक वजह यह भी है कि बी12 एनिमल फूड या नॉन वेजिटेरियन चीजो में ज़्यादा पाया जाता है, लोग वेजिटेरियन ज्यादा है, और बी12 के बाकी विकल्प काफी महंगे होते हैं। कई बार महिलाएं गर्भावस्था में कैल्शियम और आयरन की गोली एक साथ ले लेती है, जिनसे इनकी ऑब्जरशन नहीं होती, जबकि कैल्शियम को खाना खाने के साथ खाना होता है और आयरन को खाना खाने के दो घंटे के बाद लेनी होती है। केंद्रीय1 स्वास्घ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की डिप्टी कमिश्नर डॉ जोया अली रिजवी ने बताया कि किशोरावस्था स्वास्घ्य, मेंस्ट्रुअल हाइजीन, क्रिटिकल केयर आदि ऐसे कई विषय है जिनके बारे में अभी जागरूकता की कमी है। नारची ने दो साल के कंपेन में ट्रेनर की ट्रेनिंग कार्यक्रम किया, जिसमे जमीन से जुड़ी आशा औऱ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया। लेडी हॉर्डिंग मेडिकल कॉलेज और कलावती बाल सरन चिकित्सालय में हर महीने 1000 महिलाएं प्रसव के लिए आती है। अस्पताल में इन महिलाओं को खून की कमी, पहला गाढ़ा पीला मां का दूध और मेंटरुअल हाईजीन के बारे में बताया गया, जिससे थोड़ा सुधार हुआ। लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के एमडी डॉ सुभाष गिरी ने बताया कि महिला एवं शिशु स्वास्घ्य को ध्यान में रखते हुए वर्कशाप का आयोजन किया गया, जिससे डॉक्टर और भविष्य के डॉक्टर को बेहतर जानकारी मिल सके, और सुरक्षित महिला और शिशु स्वास्घ्य पर अधिक ध्यान दिया जा सके। वर्कशॉप में दिल्ली स्वास्घ्य सेवाओं की निदेशक डॉ वंदना बग्गा, नारची की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ अचला बत्रा सहित कई वरिष्ठ चिकित्सा उपस्थित थीं।



 



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