
रोहतक से दिल्ली के बीच तैयार ग्रीन कॉरिडोर के जरिए लाइव हार्ट को महत्वपूर्ण समय के भीतर मंजिल पर पहुंचाया गया
नई दिल्ली, सेहत संवाददाता
पीजीआईएमएस रोहतक से फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला, नई दिल्ली के बीच तैयार ग्रीन कॉरिडोर के जरिए एक डोनर हार्ट को मंजिल तक सफलतापूर्वक पहुंचाया गया। इस ग्रीन कॉरिडोर पर 98 किलोमीटर की दूरी दोपहर 2.50 बजे से अपराह्न 4.25 बजे के दौरान महज़ 85 मिनट में पूरी की गई। नाजुक समय के भीतर किए गए इस हार्ट ट्रांसप्लांट से एक जरूरतमंद मरीज को जीवनदान मिला।
26-वर्षीय मरीज एडवांस डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी से ग्रस्त था जो कि ऐसी गंभीर स्थिति होती है जिसमें हृदय की मांसपेशी का आकार बढ़ने और कमजोर पड़ जाने की वजह से हृदय सुचारू रूप से ब्लड पंप नहीं कर पाता। इसमें इलाज के विकल्प सीमित होते हैं और मरीज को बचाने के लिए हार्ट ट्रांसप्लांट बेहद जरूरी हो जाता है। इस बीच, 37-वर्षीय एक व्यक्ति सड़क दुर्घटना का शिकार होने के बाद बेहोशी की अवस्था में मिला और उन्हें इलाज के लिए पीजीआईएमएस रोहतक लाया गया, जहां सीटी स्कैन से उनके मस्तिष्क में रक्तस्राव का पता चला। उपचार के दौरान हर संभव मेडिकल सहायता के बावजूद, मरीज को बचाया नहीं जा सका और उन्हें ब्रेन डैड घोषित किया गया। मृतक के परिजनों ने दुःख की इस घड़ी में भी उदारता का परिचय देते हुए, उनके अंगदान करने का फैसला लिया, जिसके परिणामस्वरूप कई जीवन-रक्षक ट्रांसप्लांट संभव हो सके।
जानकारी देते हुए, चेयरमैन एडल्ट सीटीवीएस, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स ओखला डॉ जेड एस मेहरवाल ने कहा, “मेडिकल टीमों और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाली एजेंसियों ने परस्पर सहयोग भावना से काम करते हुए डोनर हार्ट को सुरक्षित तरीके से जरूरतमंद मरीज तक पहुंचाने में अहम् भूमिका निभायी।”
डायरेक्ट एडवांस डायलेटेड कार्डियोलॉजी डॉ विशाल रस्तोगी, ने कहा कार्डियोमायोपैथी से ग्रस्त मरीजों के उपचार के लिए हार्ट ट्रांसप्लांटेशन ही सबसे कारगर उपाय होता है। हम डोनर परिवार के आभारी हैं जिन्होंने इस निस्स्वार्थ परोपकारी फैसले से इस जीवनरक्षक प्रयास को साकार करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है।”
फेसिलिटी डायरेक्टर डॉ विक्रम अग्रवाल ने कहा, “हम दिल्ली पुलिस, रोहतक पुलिस समेत अन्य सभी संबंधित पक्षों के आभारी हैं जिन्होंने रोहतक से दिल्ली के बीच ग्रीन कॉरिडोर तैयार करने में मदद पहुंचायी जिससे डोनर हार्ट को महत्वपूर्ण समयावधि में ही तेजी से और सुरक्षित रूप से अपनी मंजिल पर पहुंचाया जा सका। हम अंगदान करने वाले परिवार के प्रति भी अपना हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं जिनके असाधारण परोपकार की बदौलत मरीज को नई जिंदगी का उपहार मिला है।”
सहमति के बाद शुरू हुई अंगदान की प्रक्रिया
परिजनों द्वारा अंगदान के फैसले के बाद, अंगों को मृतक के शरीर से सुरक्षित तरीके से निकालने की प्रक्रिया दोपहर 2.20 बजे शुरू हुई और इसके तुरंत बाद हृदय को प्रत्यारोपित करने के लिए दिल्ली एवं रोहतक पुलिस की मदद से तैयार ग्रीन कॉरिडोर के जरिए रोहतक से दिल्ली भेजा गया। पीजीआईएमएस रोहतक से इस डोनर हार्ट को लेकर एंबुलेंस दोपहर 2.50 बजे रवाना हुई और कुल 98 किलोमीटर का फासला तय कर अपराह्न 4.15 बजे फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला पहुंची। सही समय पर डोनर हार्ट उपलब्ध हो जाने के बाद, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला की एक्सपर्ट कार्डियाक टीम ने सफलतापू्र्वक हार्ट ट्रांसप्लांट किया। मरीज को फिलहाल आईसीयू में गहन निगरानी में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है।
एम्स पहुंचे मृतक के पैंक्रियाज
इस प्रकार ट्रांसप्लांट के लिए निकाले गए (हार्वेस्टेड ऑर्गेन्स) किए गए अंगों को निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार आबंटित किया जाता है – इस मामले में, हृदय को फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला, दिल्ली में ट्रांसप्लांट किया गया, जबकि मृतक के फेफड़ों को आर्टेमिस हॉस्पीटल, गुरुग्राम तथा लिवर एवं पैंक्रियाज़ को एम्स, नई दिल्ली भेजा गया। मृतक की किडनी एवं कॉर्निया को पीजीआईएमएस रोहतक में ही रखा गया।