
- अंतरिक्ष में भारत के लंबे मिशन जैसे भारतीय अंतरिक्ष मिशन दल के सदस्यों को होने वाले स्वास्थ्य समस्याओं पर किया जाएगा शोध
नई दिल्ली,
इंडियन स्पेस रिसर्च ऑगेनाइजेशन और एम्स के बीच एक महत्वपूर्ण साझेदारी की गई है। देश के दोनों सर्वोच्च संस्थानों के बीच सहमति पत्र पर हस्ताक्षर के बाद अब अंतरिक्ष मिशन पर गए दल के सदस्यों की स्वास्थ्य समस्याओं पर गहनता से अध्ययन किया जा सकेगा। अंतरक्षित के अप्रत्याक्षित वातावरण और माइक्रो ग्रैविटी क्रू मेंबर्स के स्वास्थ्य पर कई तरह से प्रभाव डालते हैं, इस साझेदारी से भविष्य में स्पेस मेडिसिन के नये आयामों को भी दिशा मिलेगी। इस साझेदारी में फिलहाल भारतीय अंतरिक्ष मिशन स्टेशन और क्रू मेंबर्स के चंद्रमा की यात्रा को ध्यान में रखा जाएगा।
दोनों संस्थानों के संयुक्त सचिवों की उपस्थिति में समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। इसमें ह्यूमन स्पेसलाइट सेंटर के निदेशक श्री सतीश कुमार और एम्स के निदेशक एम श्रीनिवास की उपस्थिति में समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर इसरो के चेयरमैन और सचिव डॉ वी नारायण भी उपस्थित थे। साझेदारी के तहत अंतरिक्ष में मानव व्यवहार स्वास्थ्य, इम्यूनोलॉजी, अमाश्य या माइक्रोबायोमी, बायोमेडिकल, न्यूरोसाइंसेस और न्यूरोफिजियोलॉजी सहित न्यूट्रिशन, मेटाबॉलिक स्वास्थ्य, मस्कुलोस्केलटल एट्राफी, एजिंग, माइक्रोग्रैविटी, संक्रामक बीमारिया सहित अंतरिक्ष के वातावरण में विभिन्न स्वास्थ्य मुद्दों पर सघन अध्ययन किया जाएगा।
इस शोध के माध्यम से इसरो और एम्स अंतरिक्ष चिकित्सा को आगे बढ़ाने, अंत: विषय अनुसंधान को प्रोत्साहित करने और भारत के मानवीय अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम पहलों को समर्थन करने के लिए दीर्घकालिक संस्थागत सहयोग बनाने के अपने संकल्प की पुष्टि करते हैं।