मौसम विभाग ने जारी किया येलो अलर्ट, आरएमएल में तैयार हुआ हीट स्ट्रोक यूनिट

Atal Bihari Vajpayee Institute of Medical Sciences and Ram Manohar Lohia Hospital have set up a special heat stroke unit for patients affected by stroke or heat stroke.
Atal Bihari Vajpayee Institute of Medical Sciences and Ram Manohar Lohia Hospital have set up a special heat stroke unit for patients affected by stroke or heat stroke.
  • वर्ष 2024 में आरएमएल अस्पताल की हीट स्ट्रोक यूनिट में 75 केस आए थे, 2025 में अधिक केस नहीं आए।

नई दिल्ली, सेहत संवाददाता

राजधानी दिल्ली सहित उत्तर भारत में भीषण गर्मी कहरा बरपा रही है। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनो के लिए येलो अलर्ट जारी किया है, जिसका आश्य है कि तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है, इसके साथ ही हीट वेव भी तेजी से चलेगीं, जिसे लू कहा जाता है। तापमान और सेहत का सीधा संबंध होता है, सही कारण है कि बढ़ते तापमान में भी स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी हो जाता है। तेज धूप में काम करने वाले या फिर सीधे गर्मी के संपर्क में देर तक रहने वाले लोगों को इस समय हीट स्ट्रोक की संभावना बढ़ जाती है। अटल बिहारी बाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस और राम मनोहर लोहिया अस्पताल में इससे बचाव के लिए खास इंतजाम किए हैं, गर्मी में बाहर निकलने और सावधानी बरतने की सलाह के साथ ही आरएमएल अस्पताल ने स्ट्रोक या लू के शिकार मरीजों के लिए विशेष हीट स्ट्रोक यूनिट तैयार की है। आइए जानते हैं इस यूनिट की क्या खासियत है, हीट स्ट्रोक के मरीजों में क्या लक्षण होते हैं और अस्पताल तक पहुंचने से पहले किस तरह की प्राथमिक सहायता मरीजों को दी जा सकती है।

आरएमएल अस्पताल में हीट स्ट्रोक यूनिट के इंचार्ज डॉ अजय चौहान ने बताया कि बढ़ते तापमान के साथ हीट स्ट्रोक की संभावना बढ़ जाती है जो मूल रूप से दो किस्म का होता है पहला क्लासिकल और दूसरा एग्जरसर्नल, दूसरे तरीके हीट स्ट्रोक में ऐसे मरीज हमारे पास आते हैं, जो तेज धूप में कई देर तक परिश्रम कर रहे होते हैं, इसमें सब्जी बेचने वाले, ठेला लगाने वाले ये ज्यादातर निम्न वर्ग से आते हैं, ऐसे मरीजों को अकसर ऐसी अवस्था में लाया जाता है जब वह बेहोशी की अवस्था में होते हैं उनका शरीर बहुत गर्म होता या फिर वह बहुत ज्यादा या नियंत्रण से बाहर होकर बोलने लगते हैं ऐसे मरीजों को हीट एक्सपोजर की हिस्ट्री होती है, ऐसे मरीजों के बेसिक स्वास्थ्य पैरामीटर जांच कर उनका इलाज किया जाता है। इसके बाद उन्हें 150 लीटर पानी और 70 किलो बर्फ के टब में मरीज की गर्दन को छोड़ कर उन्हें डिप किया जाता है, सिर को ठंडा करने के लिए स्पॉज से धीरे धीरे पानी डाला जाता है। इस दौरान निरंतर मरीज के शरीर का तापमान नापा जाता है, दो तरीके के थर्मामीटर से शरीर का तापमान जांचा जाता है, एक तो मल द्वार के जरिए और दूसरा टब का तापमान मापने के लिए थर्मामीटर लगाया जाता है। इस दौरान निरंतर तापामन को मॉनिटर करते रहते हैं, जबतक कि शरीर का तापमान 100 डिग्री तक नहीं आ जाता। दस से पन्द्रह मिनट में मरीज के शरीर का तापमान सामान्य हो जाता है। सामान्य तापमान होने के बाद मरीज को बेड पर शिफ्ट कर दिया जाता है। टब से निकालने के बाद थर्मिक ऑफ्टर ड्राप की स्थिति होती है, इस दौरान तापमान गिरता है, इस समय में भी मरीज का विशेष ध्यान रखा जाता है।

प्राथमिक इलाज है जरूरी

हीट स्ट्रोक की संभावना का पता लगते ही प्राथमिक या पेरिफेयरल इलाज भी जरूरी होता है, इस दौरान मरीज का शरीर बहुत गर्म हो जाता है, इसलिए जरूरी यह है कि आसपास के जो भी लोग सबसे पहले उसे पंखा हांके, कांख पर बर्फ रखी जा सकती है, यदि संभव हो लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि तुरंत मरीज के सिर पर ठंडा पानी न डाले, इससे नुकसान हो सकता है। अस्पताल की यूनिट में भी मरीज के शरीर को पहले सामान्य तापमान में लाया जाता है, इसके बाद धीरे धीरे सर पर स्पॉज से ठंडा या सामान्य किया जाता है।

क्या हो सकता है हीट स्ट्रोक से

डॉ अजय चौहान ने बताया कि हीट स्ट्रोक के मरीजों को सही प्रबंधन नहीं दिए जाने जाने पर किडनी फेलियर हो सकती है। सबसे पहले लक्षण होता है मरीज सुधबुध खो देता है, बेहोश हो जाता है, बहुत गुस्सा होता है और कई बार चेहरा और कान लाल पड़ जाते हैं। अस्पताल पहुंचने पर सबसे पहले मरीज के शरीर के तापमान को रेक्टल या मल द्वार से बॉडी टेंपरेचर जांचा जाता है, यह 105 फारेनहाइट से अधिक होने पर टब शिफ्ट किया जात है।

यूनिट में क्या हैं इंतजाम

तीन टब, कूलिंग अरेंजमेंट के लिए पर्याप्त आइस या बर्फ, हॉल्टिंग रूम सहित कई बुनियादी सुविधाएं का बंदोबस्त आरएमएल अस्पताल की हीट स्ट्रोक यूनिट में किया गया है।

लस्सी और आम पना का करें इस्तेमाल

आरएमएल अस्पताल के निदेशक डॉ एल श्याम ने कहा कि बढ़ते तापमान को देखते हुए लोगों को यह सलाह दी जाती हैं वह शरीर को पूरी तरह हाइड्रेट रखें, बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं खासतौर पर तेज धूप में घर से बाहर नहीं निकलें। नियमित रूप से शरीर के तापमान को संतुलित रखने के लिए आम पना, लस्सी और शीतल पेयजल का प्रयोग करते रहें।

 

 

 

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