
नई दिल्ली, सेहत संवाददाता
उम्र के एक पड़ाव के बाद आकर महिलाओं को अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत महसूस होती है, जब बच्चे अपना ध्यान खुद रखने लगते हैं उन्हें मां या पापा की दखलंदाजी उनके जीवन में पसंद नहीं आती, बाकी सब भी अपने काम में व्यक्त, घर का काम खत्म करने के बाद 51 वर्षीय सुगंधा की नजर अपने बढ़ते वजन पर गई, पेट के नीचने हिस्से में मोटापा बढ़ गया था, चेहरे पर भी हल्की दरारें उभर आई थीं, फिर याद आया कल यानि रविवार को मदर्स डे भी है, उसने अपने आप से प्रश्न किया, क्या एक महिला होने के नाते क्या वह खुद के साथ न्याय कर रही है?
पचास की उम्र के बाद अकसर महिलाओं में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ जाती है, इसकी दो वजह होती हैं, पहला एक तो वह समय पर अपनी सेहत पर ध्यान नहीं देती दूसरा मेनोपॉज की उम्र आने पर कैल्शियम की कमी उनके शरीर में कई तरह के प्रभाव डालती है। उसी में से एक है बल्की यूट्रेस और टॉयर फैट, दोनों ही स्थिति में हल्का का अंतर है, लेकिन फिजिकल एग्लामिनेशन करने पर इन दोनों में फर्क देखा जा सकता है। महिला रोग विशेषज्ञ डॉ आरती बवेजा बताती हैं कि बल्की यूट्रेस में पेल्विक पेन बना रहता है, पीरियड्स कई दिनों तक चलते हैं और यूट्रेस या बच्चेदानी अधिक बड़ी हो जाती है, जिसमें फायब्रोयड इकट्ठा होने लगता है। इस स्थिति में फिजिकल एग्जामिनेशन के बाद डॉकटर से संपर्क करना बहुत जरूरी हो जाता है।
यूट्राइन फायब्रॉयड
यूट्राइन फायब्रॉयड को इसकी प्रमुख वजह बताया गया है, फायब्रॉयड मांस का एक तरह का गुच्छा होता है जो बच्चे की भीतर वॉल पर इकट्ठा होने लगता है, हालांकि फायब्रायड के होने की वजह अभी तक स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह कैंसरजेनिक भी हो सकता है और नॉन कैंसर जनित भी। महिलाओं को नीचले हिस्से में विशेषकर पीरियड्स से पहले हेवीनेस लगता है और पीरियड्स खत्म होने के बाद थोड़ा हल्का महसूस होता है, जबकि टॉयर फैट में भारीपन नहीं लगता है।
इंडोमेट्रियोसिस
पीरियड्स के समय अत्यधिक दर्द, खून में थक्के आना आदि इंडोमेट्रियोसिस की वजह से हो सकता है, जो बल्की यूट्रेस की वजह भी माना जाता है, यूट्रेस यानि बच्चेदानी की भीतरी सतह पर एक लाइनिंग में खून के थक्के बढ़ने लगते हैं, जो मासिक धर्म के समय बाहर निकलते हैं जो दर्द की वजह होते हैं। इसकी वजह से ही कमर में दर्द और लोवर अब्डमन यानि पेट के नीचले हिस्से में दर्द होता है।
पेल्विक इंफेल्मेशन यानि बच्चेदानी में सूजन
बच्चेदानी या फिर प्रजनन के अंगों में सूजन की वजह से भी बल्की यूट्रेस हो जाता है। इसके प्रमुख लक्षण पेल्विक एरिया में दर्द, कभी कभी बुखार होना या फिर अबनॉर्मल डिस्चार्ज आदि हो सकते हैं, अकसर महिलाएं इस तरह के दर्द में स्टेरॉयड दवाएं लेती हैं, जो बाद में उनमें हार्मोन्स को असंतुलित कर देती हैं।
अनियंत्रित हार्मोन्स
एस्ट्रोजन के अत्यधिक मात्रा में बनने ये यह यूट्रेस के आकार को सामान्य से अधिक बड़ा कर देते हैं बच्चेदानी के टिश्यू में ग्रोथ या विकास होने पर इसका असर इसके साइज या आकार पर पड़ता है, हालांकि यही वजह फायब्रायड के होने की भी बताई जाती है। कभी कभी गर्भधारण के बाद और बच्चे को जन्म देने के बाद अचानक से बच्चेदानी के आकार में बदलाव भी बल्की यूट्रेस की वजह होता है।
कैसे करें पहचान
- बल्की यूट्रेस में पेट के निचले हिस्से में भारीपन रहता है, जबकि टॉयर फैट कमर के साइट में दिखने वाला जमा फैट है, इसका थोड़ा असर पेल्विक एरिया पर भी दिखता है
- बल्की यूट्रेस की पहचान अल्ट्रासाउंड से की जाती है, जबकि टायर फैट का पता फिजिकल एग्जामिनेशन से लगाया जा सकता है।
- कई बार यूट्रेस यानि बच्चेदानी को निकालकर भी बल्की यूट्रेस का इलाज किया जाता है, जिसे हिस्ट्रेक्टमी का ऑपरेशन कहा जाता है
- बल्की यूट्रेस के इलाज के लिए एक कुशल चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए, जबकि टॉयर फैट आहार और व्यायाम से सही किया जा सकता है।
- टायर फैट लचिला होता है जबकि बल्की यूट्रेस सख्त।