किशोरों की मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने पर जोर

The Government of India, UNICEF, and partners have placed the voices of youth at the center of adolescent mental health initiatives.
The Government of India, UNICEF, and partners have placed the voices of youth at the center of adolescent mental health initiatives.

भारत सरकार, यूनिसेफ और साझेदारों ने किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य कार्यों में युवाओं की आवाज़ को केंद्र में रखा, गुजरात में विशेष कार्यक्रम

गांधीनगर, 5 मई 2026

यूनिसेफ ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW), गुजरात राज्य स्वास्थ्य विभाग और द जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ के सहयोग से आज गुजरात में युवाओं और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण पर बहु-भागीदार परामर्श का आयोजन किया।

दो दिवसीय कार्यक्रम मे इस बात पर जोर दिया गया कि स्टिग्मा किशोरों को मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँचने से रोकने वाली एक बड़ी बाधा है। इस परामर्श में भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, गुजरात सरकार के स्वास्थ्य विभाग, राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण, जॉर्ज इंस्टीट्यूट और यूनिसेफ के वरिष्ठ नीति-निर्माता और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुए।

युवाओं की पैनल चर्चा का संचालन यूनिसेफ की संचार, वकालत और साझेदारी प्रमुख जाफरिन चौधरी ने किया। पैनल में यूनिसेफ युवा अधिवक्ता गौरांशी शर्मा, उन्नति सुराना, और गुजरात के युवा संचालक हीत दोशी व यमन महादेव दवे शामिल थे। यूनिसेफ गुजरात के प्रमुख (कार्यवाहक) डॉ. नारायण गोंकर और यूनिसेफ इंडिया के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. सैयद हब्बे अली भी सत्र में उपस्थित रहे।

डॉ. ज़ोया अली रिज़वी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में किशोर स्वास्थ्य की उप-आयुक्त ने कहा, “भारत सरकार किशोरों के समग्र स्वास्थ्य और कल्याण, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य भी शामिल है, को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) और आयुष्मान भारत स्कूल हेल्थ एंड वेलनेस प्रोग्राम (AB-SHWP) जैसे प्रमुख कार्यक्रमों के माध्यम से सतत प्रयास कर रही है। हमें विश्वास है कि युवाओं के साथ परामर्श से पहुँच और समर्थन और मजबूत होगा।”

भारत सरकार ने किशोर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े स्टिग्मा, कम जागरूकता और मदद लेने के व्यवहार को संबोधित करने के लिए मजबूत नीतिगत और कार्यक्रमगत आधार तैयार किया है। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (NMHP), जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (DMHP), आयुष्मान भारत स्कूल हेल्थ एंड वेलनेस प्रोग्राम और RKSK जैसे कई कार्यक्रम देशभर में किशोर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ा रहे हैं। लगभग 8,000 किशोर-अनुकूल स्वास्थ्य क्लीनिक स्थापित किए गए हैं और करीब 10 लाख पीयर एजुकेटर समुदायों में स्वास्थ्य और कल्याण पर साप्ताहिक सत्र आयोजित करते हैं।

यह परामर्श युवाओं के लिए एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म था, जहाँ वे सीधे तौर पर इस बारे में बात कर सके कि उनके लिए एक स्वस्थ मानसिक स्वास्थ्य कैसा होता है, वे इस समय मदद के लिए कहाँ जाते हैं, और ऐसी कौन सी चीज़ें हैं जो उन्हें मदद के लिए आगे आने से रोकती हैं। 21 वर्षीय हीत दोशी ने कहा, “हमारी पीढ़ी बहुत बदलाव ला सकती है, खासकर मानसिक स्वास्थ्य में। बदलाव हमारे साथ शुरू होता है—दोस्तों के लिए सुरक्षित स्थान बनाकर और अपनी भावनाओं पर खुलकर बात करके। अगर हम मानसिक स्वास्थ्य को सामान्य बातचीत का हिस्सा बनाएंगे, तो हमारे आसपास के लोग भी ऐसा करेंगे।”

जाफरिन चौधरी ने कहा, “स्टिग्मा चुप्पी में पनपता है। जब युवा लोग इस बारे में खुलकर बात नहीं कर पाते कि वे किन हालातों से गुज़र रहे हैं – चाहे वह उनके घर में हो, स्कूल में हो या उनके समुदाय में – तो वे अकेले ही तकलीफ़ उठाते हैं। बचपन और किशोरावस्था विकास के अहम पड़ाव हैं जो बड़े होने की ओर बदलाव को आकार देते हैं। यह सुनिश्चित करना कि इस दौर में युवाओं को पूरा सहयोग मिले, उनके दीर्घकालिक कल्याण के लिए बेहद ज़रूरी है।”

“हम न केवल बच्चों और युवाओं के लिए काम करते हैं, बल्कि हम उनके साथ मिलकर बदलाव लाने वाले सह-निर्माताओं के तौर पर भी काम करते हैं। हमारा लक्ष्य ऐसे सुरक्षित, सुलभ और युवाओं के अनुकूल मंच तैयार करना है, जो युवाओं को खुलकर बातचीत करने और समय पर मदद पाने के लिए प्रोत्साहित करें,” उन्होंने आगे कहा।

डॉ. सैयद हब्बे अली ने बताया कि अवसाद, चिंता, आत्म-सम्मान की कमी, डिजिटल लत और आत्म-हानि भारत में युवाओं और किशोरों को प्रभावित करने वाले प्रमुख मानसिक स्वास्थ्य मुद्दे हैं। उन्होंने कहा कि आत्म-हानि और आत्महत्या के कारण घरेलू हिंसा, संबंधों में संघर्ष, परीक्षा और नौकरी का दबाव हैं, जिन्हें परिवार, शैक्षणिक संस्थान, पीयर सपोर्ट समूह और पेशेवर परामर्शदाता मिलकर संबोधित करें।

गुजरात सरकार के स्वास्थ्य आयुक्त/निदेशक एनएचएम  डॉ. रतनकंवर एच. गधाविचरण ने कहा, “मानसिक स्वास्थ्य शारीरिक स्वास्थ्य से अलग नहीं है। यह हर युवा के कल्याण का केंद्र है। आज का परामर्श सही दिशा में एक कदम है। जब हम युवाओं को सुनते हैं और उनकी बातों पर कार्रवाई करते हैं, तो हम एक स्वस्थ और मजबूत पीढ़ी का निर्माण करते हैं। गुजरात सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि हर किशोर को वह सहायता उपलब्ध हो जिसकी उसे आवश्यकता है, और वह भी बिना किसी स्टिग्मा या भेदभाव के।”

परामर्श का समापन किशोर-अनुकूल स्वास्थ्य केंद्र मूल्यांकन रिपोर्ट के विमोचन के साथ हुआ। यह दस्तावेज़ राष्ट्रीय और वैश्विक प्रयासों के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य स्टिग्मा कम करना, मदद लेने के व्यवहार को सुधारना और मानसिक स्वास्थ्य संवाद में युवाओं की भागीदारी को मजबूत करना है। यह चर्चा नवंबर 2026 में आयोजित होने वाले वैश्विक सम्मेलन Together Against Stigma की तैयारी का हिस्सा है, जिसे यूनिसेफ, AIIMS, जॉर्ज इंस्टीट्यूट और वर्ल्ड साइकियाट्रिक एसोसिएशन संयुक्त रूप से आयोजित करेंगे।

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