
नई दिल्ली, सेहत संवाददाता
विराट कोहली हैमस्ट्रिंग इंजरी के कारण अफगानिस्तान के खिलाफ आगामी तीन मैचों की वनडे सीरीज से बाहर हो गए हैं। खिलाड़ियों में होने वाली मांसपेशियों की यह आम समस्या है, हाल ही में कई क्रिकेटरों और एथलीटों को हैमस्ट्रिंग इंजरी के कारण प्रतियोगिताओं से बाहर होना पड़ा है। “हैमस्ट्रिंग इंजरी: खिलाड़ियों से लेकर आम लोगों तक, क्यों बढ़ रहा है यह खतरा?” इस खबर में इस इंजरी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाने का प्रयास किया गया है।
स्पोर्ट्स डायटिशियन विशेषज्ञ डॉ वंशजा कहती हैं कि हैमस्ट्रिंग जांघ यानि थाई के पीछे की ओर स्थित तीन मांसपेशियों का समूह है, जो घुटने को मोड़ने और कूल्हे यानि हिप को पीछे ले जाने में मदद करती हैं, इन मांसपेशियों में खिंचाव, आंशिक रूप या पूरी तरह फटना हैमस्ट्रिंग इंजरी कहलाता है। इसकी कई वजह हो सकती है, खिलाड़ी अकसर खेल के मैदान में अपनी पॉश्चर, दौड़ने या फिर बैठने के प्रति अधिक सजग नहीं रह पाते, दौड़ते समय अचानक गति बढ़ाना या दिशा बदलना, खेलकूद में एक दूसरे का पैर अड़ जाना, पर्याप्त वॉर्म अप नहीं करना, मांसपेशियों में लचीलेपन की कमी और मांसपेशियों की कमजोरी या थकान के कारण हैमस्ट्रिंग इंजरी हो सकती है। इसके प्रमुख लक्ष्ण हैं जांघ के पीछे अचानक तेज दर्द, चटकने या खिंचने जैसा एहसास, सूजन या नीला पड़ना, चलने और दौड़ने में परेशानी, मांसपेशियों कमजोरी आदि इसके लक्ष्ण हो सकते हैं। हैमस्ट्रिंग इंजरी के कई तीन प्रमुख तरह की ग्रेड होती हैं, पहली ग्रेड में मामूली खिंचाव महसूस होता है, हल्का दर्द, लेकिन चलना संभव, ग्रेड टू में मांसपेशियां आंशिक रूप से फट जाती हैं, दर्द सूजन और चलने में कठिनाई महसूस होने लगती है। वहीं ग्रेड थ्री में मांसपेशियां पूरी तरह फट जाती हैं, तेज दर्द और गंभीर कमजोरी महसूस होती है, कभी कभी ऐसी स्थिति में सर्जरी की भी जरूरत होती है। इस इंजरी में चिकित्सक आरआईसीई शार्ट में राइस के क्रम में उपचार की सलाह देते हैं।
क्या है प्राथमिक उपचार राइस (RICE)
आर- सबसे पहले शारीरिक गतिविधि पर रोक यानि रेस्ट करना जरूरी
आई- आईपैस लगाना, दस से पन्द्रह मिनट और हर दो से तीन घंटे में प्रभावित जगह पर आइस लगाना चाहिए
सी- यानि दबाव बनाना, इसके लिए इलैस्टिक बैंडेज का प्रयोग किया जा सकता है
ई- यानि एलिवेशन, प्रभावित पैर को थोड़ा उॅंचाई पर रखना चाहिए
नोट- हैमस्ट्रिंग इंजरी में पूरी तरह ठीक होने में एक हफ्ते से लेकर दो से तीन महीने का समय लग सकता है यह इंजरी के बताए गए ग्रेड पर निर्भर करता है।