बढ़ रहे हैं हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा यानि लिवर कैंसर के मामले

Delhi State Cancer Institute Observes Global Fatty Liver Day with Focus on Preventing Liver Cance
Delhi State Cancer Institute Observes Global Fatty Liver Day with Focus on Preventing Liver Cance

दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट ने मनाया फैटी लीवर डे और कैंसर की रोकथाम पर दिया विशेष जोर

नई दिल्ली, सेहत संवाददाता

दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (डीएससीआई) ने स्पेयर सोसायटी के साथ  मिलकर ग्लोबल फैटी लिवर डे 2026 का आयोजन किया। इस अवसर पर फैटी लिवर रोग के बढ़ते मामलों और इसके लीवर कैंसर, विशेष रूप से हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा (एचसीसी), से बढ़ते संबंधों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।

संस्थान के ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों, नर्सिंग स्टाफ, डायटीशियन तथा जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य फैटी लिवर रोग की समय पर पहचान, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा प्रभावी रोकथाम के उपायों पर चर्चा करना था। कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी एवं हेपेटोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. नरेश अग्रवाल के व्याख्यान “फैटी लिवर से एचसीसी तक”से हुई। अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि मेटाबोलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड फैटी लिवर डिजीज (एमएएफएलडी) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इसकी पहचान और उपचार किया जाए तो सिरोसिस और वर लिवर कैंसर जैसी गंभीर जटिलताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

इसके बाद फैटी लिवर रोग पर एक पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसमें रोग के प्रबंधन, चुनौतियों और नई उपचार पद्धतियों पर विचार-विमर्श हुआ। इस चर्चा में डॉ. पंकज त्यागी, विभागाध्यक्ष, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, डीएससीआई; डॉ. वसुधा गोयल, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट; तथा सुश्री अंजुमन, डायटीशियन, डीएससीआई ने अपने अनुभव और विशेषज्ञता साझा की। इस अवसर पर डॉ. पंकज त्यागी, विभागाध्यक्ष, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, डीएससीआई ने कहा, “फैटी लिवर आज दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाले लीवर रोगों में से एक है। अच्छी बात यह है कि समय पर जांच, स्वस्थ जीवनशैली और मेटाबोलिक जोखिम कारकों के प्रभावी नियंत्रण से सिरोसिस और लीवर कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। जागरूकता ही इसकी रोकथाम का सबसे प्रभावी माध्यम है।”

डॉ. सविता अरोड़ा, निदेशक, दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट ने इस  मौके  पर अपने संदेश में कहा, “ग्लोबल फैटी लिवर डे का आयोजन निवारक ऑन्कोलॉजी और जनस्वास्थ्य के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। वैज्ञानिक अध्ययनों से यह स्पष्ट हो रहा है कि फैटी लिवर रोग और लीवर कैंसर के बीच गहरा संबंध है। ऐसे में जागरूकता, नियमित स्क्रीनिंग और समय पर हस्तक्षेप की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। स्वास्थ्य संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे लोगों को शिक्षित करें और उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करें।”

अपने संदेश में डॉ. रविंदर सिंह, संयुक्त निदेशक, डीएससीआई ने कहा, “आज का कार्यक्रम ज्ञान साझा करने और विभिन्न विशेषज्ञताओं के बीच सार्थक संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच बना। फैटी लिवर और लिवर कैंसर के संबंध को उजागर कर हम स्वास्थ्यकर्मियों और आम जनता दोनों को अपने लीवर के स्वास्थ्य के प्रति अधिक सजग और सक्रिय बनने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं।”

इस सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने फैटी लिवर रोग के प्रमुख जोखिम कारकों जैसे मोटापा, मधुमेह, मेटाबोलिक सिंड्रोम, असंतुलित खान-पान और शारीरिक निष्क्रियता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, वजन नियंत्रण और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच के माध्यम से इस रोग के अनेक मामलों को रोका जा सकता है और कई मामलों में इसे प्रारंभिक अवस्था में ठीक भी किया जा सकता है।

कार्यक्रम का समापन जन-जागरूकता बढ़ाने, उच्च जोखिम वाले लोगों की नियमित स्क्रीनिंग सुनिश्चित करने तथा लीवर स्वास्थ्य को व्यापक कैंसर रोकथाम कार्यक्रमों से जोड़ने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। इस अवसर पर प्रतिभागियों ने वैश्विक संदेश “लव योर लिवर” को भी दोहराया और लोगों से अपने लीवर की देखभाल को स्वस्थ जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

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