सिकल सेल बीमारी- जब लाल रक्त कणिकाएं गोल नहीं, दरांती के आकार की हो जाती हैं

Sickle cell disease – when red blood cells become sickle-shaped instead of round.
Sickle cell disease – when red blood cells become sickle-shaped instead of round.
  • यह एक जेनेटिक रक्त विकार है, असामान्य कोशिकाएं रक्तवाहिकाओं में फंस जाती है, जिससे विभिन्न अंगों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंचती

नई दिल्ली, सेहत संवाददाता

रकत विकारों की विभिन्न बीमारियों में सिकल सेल को भी माना जाता है, यह एक आनुवांशिक रोग है हर साल 19 जून को विश्व सिकल सेल दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिससे लोगों को इसके बारे में जागरूक किया जा सके। दरअसल सिकल सेल बीमारी एक गंभीर आनुवांशिक रक्त विकार है, जिसमें शरीर की लाल रक्त कोशिकाएं, सामान्य गोल आकार की होने की जगह दरांती या सिकल जैसी आकृति की हो जाती है। असामान्य कोशिकाएं रक्त वाहिकाओं में फंस जाती है, जिससे शरीर के विभिन्न अंगों तक ऑक्सीजनन की आपूर्ति प्रभावित होती है।

संयुक्त राष्ट्र् महासभा ने वर्ष 2008 में पहली बार सिकल सेल बीमारी को एक वैश्विक सामाजिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में मान्यता दी, जिसके बाद हर साल 19 जून को विश्व सिकल सेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। अधिकांश लोगों को इस बीमारी के लक्ष्ण और पहचान के बारे में जानकारी नहीं होती, क्योंकि यह बीमारी आनुवांशिक है इसलिए इसे नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन कुछ उपायों से जोखिम के खतरों को कम किया जा सकता है। सबसे पहले यह समझ लेते हैं कि सिकल सेल बीमारी के प्रमुख लक्ष्ण क्या हैं, इसमें बार बार तेल दर्द, अत्यधिक थकान और कमजोरी, एनीमिया या खून की कमी, हाथों या पैरों में सूजन, बार बार संक्रमण होना, बच्चे का विकास धीमे होना, सांस लेने में तकलीफ आदि सिकल सेल बीमारी के लक्ष्ण हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि इससे पूरी तरह बचा नहीं जा सकता लेकिन कुछ उपायों से जोखिम को कम किया जा सकता है।

सिकल सेल बीमारी से कैसे बचें?

  1. विवाह से पहले जांच कराएं: यदि परिवार में सिकल सेल का इतिहास है, तो विवाह से पहले दोनों लोगों को सिकल सेल स्क्रीनिंग करानी चाहिए।
  2. गर्भावस्था के दौरान जांच: गर्भवती महिलाओं को समय पर जांच करानी चाहिए, ताकि बच्चे में इस बीमारी के जोखिम का पता लगाया जा सके।
  3. जेनेटिक काउंसलिंग लें: यदि पति-पत्नी दोनों सिकल सेल ट्रेट (वाहक) हैं, तो विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है।
  4. नवजात शिशु की स्क्रीनिंग: जन्म के बाद शिशु की जांच से बीमारी का जल्दी पता लगाया जा सकता है और समय पर उपचार शुरू किया जा सकता है।

रोगियों के लिए जरूरी सावधानियां

  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
  • संक्रमण से बचाव के लिए टीकाकरण समय पर कराएं।
  • नियमित रूप से डॉक्टर की सलाह लें।

 

 

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