
Active Kids, better brain Function, good mental health:
नई दिल्ली, परिमल कुमार
“पढ़ोगे-लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे बनोगे खराब”—हममें से कई लोगों ने बचपन में यह बात जरूर सुनी होगी। लेकिन आज के दौर में यह सोच पूरी तरह बदल चुकी है। खेल-कूद न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बल्कि मानसिक विकास के लिए भी बेहद आवश्यक है।
तेजी से बढ़ते तकनीकी युग ने न केवल बड़ों की जीवनशैली को प्रभावित किया है, बल्कि बच्चों की शारीरिक सक्रियता (फिजिकल एक्टिविटी) को भी कम कर दिया है। इसका सीधा असर न केवल उनके शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव डाल रहा है।
आज हम चर्चा करेंगे कि बच्चों के लिए शारीरिक गतिविधियां क्यों जरूरी हैं, और इस विषय पर फिनलैंड में हुई एक रिसर्च से हमें क्या सीखने को मिलता है।
Physical Fitness from Childhood Protects Mental Health
यह शोध University of Jyvaskyla और Institute of Biomedicine at the University of Eastern Finland में किया गया, जिसे Sports Medicine Journal में प्रकाशित किया गया है। इस अध्ययन में 241 बच्चों को शामिल किया गया और उन्हें आठ वर्षों तक ट्रैक किया गया।
शोध से यह खुलासा हुआ कि शारीरिक रूप से फिट रहने वाले बच्चे, जो बचपन से किशोरावस्था में प्रवेश कर रहे थे, बाकी बच्चों की तुलना में कई तरह से अलग पाए गए:
- बेहतर कार्डियो-रेस्पिरेटरी फिटनेस: इन बच्चों की हृदय और श्वसन प्रणाली की फिटनेस अन्य बच्चों से अधिक बेहतर पाई गई।
- तनाव और डिप्रेशन के कम लक्षण: इन बच्चों में मानसिक तनाव और अवसाद के लक्षण अपेक्षाकृत कम देखे गए।
- उन्नत कॉग्निटिव स्किल्स: इन बच्चों की कॉग्निटिव स्किल्स (जिनमें सोचने, याद रखने, निर्णय लेने, और समस्याओं का समाधान करने की क्षमता शामिल है) अन्य बच्चों की तुलना में अधिक विकसित थीं।
- बेहतर मानसिक स्वास्थ्य: इन बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य बाकी बच्चों से अधिक बेहतर पाया गया।
अपने कमरों में कैद होते बच्चे और WHO के चिंताजनक आँकड़े
तेजी से बढ़ते तकनीकी युग में बच्चे खेल के मैदान से दूर होते जा रहे हैं और मोबाइल, टैबलेट, कंप्यूटर, और टीवी जैसे डिवाइसों के करीब होते जा रहे हैं। यह प्रवृत्ति शहरों में अधिक देखने को मिलती है, लेकिन शहरीकरण और सोशल मीडिया के प्रभाव के चलते अब गांव भी इससे अछूते नहीं रहे हैं।
इस बदलते कल्चर का परिणाम बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहा है। बच्चों में इन समस्याओं का प्रचलन बढ़ रहा है:
- आँखों की रोशनी कमजोर होना।
- मोटापे की समस्या।
- पाचन तंत्र का कमजोर होना।
- शारीरिक गतिविधियों की कमी।
- घबराहट और मानसिक तनाव।
यहां तक कि घर से थोड़ी दूरी पर किराना दुकान तक जाने के लिए भी वाहन का उपयोग करना, और छोटी-छोटी बातों पर घबरा जाना आम हो गया है।
WHO के डराने वाले आँकड़े
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आँकड़ों के अनुसार, किशोरावस्था में 15% बच्चे मानसिक विकारों से पीड़ित हैं। हर 7 में से 1 बच्चा मानसिक रूप से परेशान है। इस स्थिति के पीछे मुख्य कारण बच्चों का अपने कमरों तक सीमित हो जाना है।
- बाहर की ताजी हवा से दूर रहना।
- शारीरिक गतिविधियों की कमी।
- खेल-कूद का दायरा केवल मोबाइल गेम्स तक सीमित रहना।
यह स्थिति न केवल बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है, बल्कि उनकी सामाजिक और भावनात्मक विकास को भी बाधित कर रही है।
फ़िनलैंड में हुए शोध Physical Fitness From Childhood Protects Mental Health ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि बच्चे नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियों में भाग लेते हैं, तो उन्हें भविष्य में anxiety और depression जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। यह न केवल बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाएगा, बल्कि उन्हें शारीरिक रूप से भी मजबूत और स्वस्थ रखेगा।
हर माता-पिता का यह कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों को बचपन से ही प्रतिदिन शारीरिक गतिविधियाँ करने की आदत डालें। भले ही बच्चे कभी-कभी खेलने, व्यायाम करने, या बाहर घूमने से इनकार करें, लेकिन उन्हें उनके उज्ज्वल भविष्य और बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रेरित करना जरूरी है। नियमित शारीरिक गतिविधियाँ न केवल बच्चों को आज के समय में फिट रखती हैं, बल्कि उनके जीवन को लंबे समय तक खुशहाल और संतुलित बनाती हैं।
लेखक Kiddocracy के संस्थापक और वरिष्ठ पत्रकार हैं

Parimal Kumar, Senior Journalist