सर्विकल कैंसर से बचाव से पहले वैक्सीनेशन की जंग

The central government has launched a 90-day HPV vaccination campaign. 14-year-old girls will be given a single-dose vaccine, which will be included in the regular vaccination schedule.
The central government has launched a 90-day HPV vaccination campaign. 14-year-old girls will be given a single-dose vaccine, which will be included in the regular vaccination schedule.
  • केंद्र सरकार ने 90 दिनों का एचपीवी टीकाकरण अभियान शुरू किया
  • 14 साल की लड़कियों को दिया जाएगा सिंगल डोज वैक्सीन, नियमित टीकाकरण में शामिल होगा

पांच साल पहले केंद्र सरकार ने देश का पहला व्यस्क कोविड टीकाकरण शुरू किया, कोविड से बचाव के लिए अनिवार्य रूप से लिए जाने वाले इस वैक्सीन को आसानी से स्वीकार नहीं किया गया। वैक्सीन को लेकर लोगों में व्याप्त भ्रम को दूर करने के लिए केंद्र सरकार को कोविड वार रूम बनाना पड़ा, जिससे वैक्सीन से जुड़े भ्रम को दूर किया जा सके। बात कोविड महामारी थी इसलिए कुछ हद तक इसे लोगों ने स्वीकार भी किया, हालांकि यह अलग विषय है कि आज भी वैक्सीन की प्रमाणिकता और हृदयघात को जोड़कर देखा जाता है। दो दिन पहले सरकार ने सर्विकल कैंसर के कारण एचपीवी वायरस से बचाव के लिए 90 दिनों का एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया, जिसे बाद में नियमित टीकाकरण में भी शामिल किया जाएगा। चुनौती यह है कि एचपीवी वैक्सीन किशोर लड़कियों को उस समय दिया जाएगा जबकि उनका शरीर भविष्य में मां बनने के लिए खुद को तैयार कर रहा होता है, साथ ही पूर्व में वर्ष 2009-10 में आंध्र प्रदेश में एचपीवी टीकाकरण के अनुभव बेहतर नही रहे।

सर्विकल कैंसर देश का दूसरा सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर है,  हर साल एक लाख 23 हजार महिलओं व किशोरियों में इसकी पहचान होती है, जबकि 75000 मौत एचपीवी वायरस की वजह से होती है। निश्चित रूप से नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में इसे शामिल करने से कैंसर से होने वाली मौतों को रोका जा सकेगा, साथ ही अस्पतालों में कैंसर के मरीजों के दवाब को भी कम किया जा सकेगा। भारत में सिक्किम, पंजाब और दिल्ली ऐसे राज्य हैं जहां एचपीवी वैक्सीन दिया जा रहा है, लेकिन इसकी गति काफी धीमी है। दिल्ली के एक मात्र अस्पताल दिल्ली कैंसर इंस्टीट्यूट में वर्ष 2016 में तीन डोज का एचपीवी वैक्सीन कार्यक्रम लागू किया गया लेकिन लड़कियों को वैक्सीन के लिए अस्पताल तक लाना या मोबलाइज करना बड़ी चुनौती बना और कुछ समय बाद ही दिल्ली में एचपीवी टीकाकरण बंद कर दिया, हालांकि विश्व कैंसर दिवस यानि चार फरवरी को दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने इसे फिर से शुरू करने की बात कही। अब प्रश्न उठता है इसबार सरकार ने ऐसा क्या नया किया जिससे लड़कियों को इस वैक्सीन के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

सिंगल डोज होगी एचपीवी वैक्सीन

कोविड के समय बनाए गए गावी (ग्लोबल एलायंस फॉर वैक्सीन एंड इम्यूनाइजेशन) और भारत सरकार के आईसीएमआर ( इंडियन कांउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च) बीच हुई साझेदारी के तहत फार्मा कंपनी एमएसडी फार्मासियुटिकल्स की गार्डसिल देश में 2.5 करोड़ वैक्सीन की डोज वर्ष 2025 से 2027 के बीच करेगी, जिससे एक करोड़ वैक्सीन डोज का आपूर्ति हो चुकी है। एक अनुमान के अनुसार देश में 14 साल की लड़कियों के पूरी तरह टीकाकरण के लिए सालाना 1.5 करोड़ वैक्सीन की जरूरत होगी। हालांकि प्रश्न यह भी है कि देश में कोविड का टीका तैयार करने वाली स्वदेसी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने इसका निर्माण क्योंकि नहीं किया? मालूम हो कि कंपनी ने स्वदेशी एचपीवी सर्ववावैक तैयार की है, जो गार्डसिल की अपेक्षा अधिक सस्ती है, लेकिन इसकी सिंगल डोज प्रमाणिकता पर विश्व स्वास्थय संगठन और आईसीएमआर की स्वीकृति नहीं मिलने के कारण  अभी इसे नियमित टीकाकरण में शामिल करने की अनुमति नहीं मिली है। यह भी कहा जा रहा है कि अनुमति या स्वीकृति मिलने के बाद सर्ववावैक को भी नियमित टीकाकरण में जगह मिल सकती है। इसके बाद वैक्सीन लेने के कई विकल्प होंगे। स्वदेशी एचपीवी टीका सभी तरह के एचपीवी वायरस 16, 18 6 और नौ पर भी कारगर है।

क्रियान्वयन की चुनौती

एचपीवी टीकाकरण के लिए कोविन की जगह लड़कियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म यूविन का प्रयोग करना होगा, जिसमें वैक्सीन मैनजमेंट प्रोग्राम के तहत स्लॉट आवंटित होगा। 90 दिन का शुरूआती अभियान 14 साल की लड़कियों को ध्यान में रखकर शुरू किया गया है, जिसमें माता पिता की अनुमति के बाद किशोरियों का टीकाकरण किया जाएगा। वैक्सीन एडवाइजरी कमेटी ने इस बात की सख्त हिदायत दी है कि वैक्सीन देने से पहले लड़कियों के स्वास्थ्य की अच्छी तरह जांच हो, वैक्सीन लेने के बाद सेंटर पर ही तीस मिनट ठहरना अनिवार्य होगा। सेंटर पर वैक्सीनेशन से जुड़े भ्रम को दूर करने के लिए विशेषज्ञों की टीम बैठाने का भी फैसला लिया गया है।

सुरक्षित है वैक्सीन

वर्ष 2009-10 में आंध्र प्रदेश में अंतरराषट्रीय संगठन पाथ के सहयोग और आईसीएमआर की सहमित के बाद 9 साल से 14 साल की किशोरियों मे एचपीवी टीकाकरण शुरू किया गया, जिसके बाद में बेहतर परिणाम नहीं मिलने के कारण टीकाकरण कार्यक्रम को तुरंत बंद कर दिया गया, इस बावत गठित एथिकल कमेटी की फाइडिंग में कहा गया कि टीकाकरण के बाद जिन लड़कियों को परेशानी हुई उनको पहले भी कई तरह की दिक्कतें थी, इसलिए इस बार ऐसी किसी किशोरी को वैक्सीन नहीं देने की बात कही गई जिसका पहले से किसी तरह इलाज इम्यूनोसपरेस थेरेपी चल रही हो। विश्व भर में एचपीवी टीके का प्रयोग किया जा रहा है, जिसको लेकर भ्रम को जानकारी से ही दूर किया जा सकता है। आस्ट्रेलिया ने सबसे पहले वर्ष 2006 में देश में एचपीवी टीकाकरण शुरू किया, बाद में वर्ष 2013 में इसमें लड़कों के टीकाकरण को भी शामिल कर लिया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि सेक्सुअली एक्टिव होने से पहले वैक्सीन दिया जा सकता है, इसलिए निर्धारित उम्र नौ से 14 साल रखी गई। इससे युवती की प्रजनन क्षमता पर किसी तरह प्रभाव नहीं पड़ता।

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