Lucknow: लिवर की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए लिवर ट्रांसप्लांट ही अंतिम उपचार माना जाता है, चिंता का विषय है कि करीब 75 प्रतिशत मरीजों का समय पर लीवर ट्रांसप्लांट नहीं हो पाता और इलाज के इंतजार में ही दम तोड़ देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अंगदान की कमी, अत्यधिक खर्च और सीमित ट्रांसप्लांट इसकी मुख्य वजह हैं।
केजीएमयू के सर्जरी विभाग में एक कार्यक्रम के दौरान लुधियाना मेडिकल कॉलेज से आये डा. गुर सागर सिंह सहोता ने बताया कि कि लीवर सिरोसिस, हेपेटाइटिस-बी और सी, फैटी लिवर और अल्कोहल से जुड़ी बीमारियां लीवर फेल होने के प्रमुख कारण हैं। अंतिम चरण में पहुंच चुके मरीजों के लिए ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प बचता है। लीवर प्रत्यारोपण के लिए दो तरह के दाता होते हैं- जीवित दाता (आमतौर पर परिवार का सदस्य) और ब्रेन डेड दाता।

वह कहते हैं कि लीवर ऐसा अंग है जो आंशिक रूप से दान किया जा सकता है और दाता का लीवर कुछ ही महीनों में पुन: विकसित हो जाता है, फिर भी परिवार के सदस्य कई कारणों से दान नहीं कर पाते। इनमें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, उम्र, रक्त समूह का मेल न होना या सर्जरी का डर शामिल हैं। ऐसे में ब्रेन डेड मरीज के अंगदान से कई मरीजों की जिन्दगी बचायी जा सकती है। अंगदान के प्रति अभी भी लोगों में भ्रांति का नतीजा है कि ब्रेन डेड मरीज के परिजन अंगदान करने को तैयार नहीं होते। जिस कारण लीवर की गम्भीर बीमारी से जूझ रहे मरीज इलाज का कोई विकल्प ही नहीं बचता।
डा. सहोता का कहना है कि यदि मृत अंगदान (कैडवर डोनेशन) को बढ़ावा दिया जाए और अस्पतालों में ट्रांसप्लांट समन्वय तंत्र को मजबूत किया जाए, तो हजारों जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
महिलाओं को लीवर दान करने वाले कम
कई बार लिवर से जूझ रहीं महिलाओं का ट्रांसप्लांट इस कारण नहीं हो पाता कि परिवार का कोई सदस्य उन्हें अपना लिवर का हिस्सा देने को तैयार नहीं होता। आंकड़े बताते हैं कि जहां 90 प्रतिशत पुरूषों को लिवर दान करने के लिए परिवारजन तैयार हो जाते हैं वहीं मात्र 10 प्रतिशत महिलाओं को ही लिवर डोनेट होता है। ताजुज्ब की बात है कि अधिकांश पुरूष मरीजों को उनकी पत्नी ही लिवर दान करती हैं।
लिवर को बचाना है तो रहें फिजिकली एक्टिव

केजीएमयू के सर्जरी विभाग के प्रो. एच.एस. पाहवा का कहना है कि लीवर को स्वस्थ रखने के लिए सबसे जरूरी है कि शारीरिक रूप से एक्टिव रहा जाये। संतुलित भोजन करें और व्यायाम को दिनचर्या में जरूर शामिल करें। फैटी लिवर की समस्या अब 20-25 साल के लोगों में भी देखने को मिल रही है। अक्सर लोग इसे हल्के में लेते हैं। यदि फैटी लीवर को नजरअंदाज किया जाये तो यही लिवर सिरोसिस का कारण बनता है। वह बताते हैं कि इसके मामले लगातार भारत में तेजी से बढ़ रहे हैं, क्योंकि डायबिटीज,मोटापा और खानपान को लेकर हम इतना ध्यान नहीं देते।
सर्जरी विभाग का स्थापना दिवस 21 को
केजीएमयू के सर्जरी विभाग का 114वां स्थापना दिवस 21 फरवरी को मनाया जायेगा। इससे पूर्व 17 से 20 फरवरी तक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा। विभाग के प्रमुख प्रो. अभिनव अरुण सोनकर ने बताया कि विभाग के स्थापना दिवस समारोह के उपलक्ष्य में पांच दिवसीय कार्यक्रम किये जा रहे हैं। प्रथम चार दिनों (17 से 20 फरवरी) में शैक्षणिक व्याख्यान एवं कार्यशालाएं सर्जरी विभाग में आयोजित की जायेंगी, जबकि 21 फरवरी को स्थापना दिवस समारोह अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में होगा।
आयोजन सचिव डॉ. गीतिका नंदा ने बताया कि इस चार दिवसीय शैक्षणिक कार्यक्रम से पहले दिन प्लास्टिक सर्जरी, वैस्कुलर थोरेसिक सर्जरी, ट्रॉमा एवं पीडियाट्रिक सर्जरी से संबंधित विषयों पर चर्चा होगी। दूसरे दिन सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, एंडोक्राइन सर्जरी और स्तन सर्जरी, तीसरे दिन: अपर जी. आई, हेपेटो-पैक्रियाटो बिलियरी तथा लोअर जी.आई. सर्जरी और चौथे दिन मिनिमल एक्सेस सर्जरी, रीनल सर्जरी एवं हर्निया सर्जरी, से संबंधित विषयों सहित विभिन्न व्याख्यान, केस-आधारित चर्चाएं, पैनल विमर्श एवं हँड्स-ऑन कार्यशालाएं की जायेंगी, जिसमें उत्तर प्रदेश एवं अन्य राज्यों के इंस्टिट्यूट्स, मेडिकल कॉलेजों एवं अस्पतालों से लगभग 90-95 वरिष्ठ सर्जन, संकाय सदस्य और लगभग 180 रेजिडेंट चिकित्सक एवं स्नातकोतर विदयार्थी सहभागिता करेंगे। इस चार दिवसीय शैक्षणिक सत्रों में सर्जरी की नवीन तकनीकों एवं समकालीन विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा उन्नत शल्य तकनीकों, आधुनिक उपकरणों, नवीन शोध एवं उपचार पद्धतियों पर व्याख्यान दिए जायेंगे।

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