
- केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कॉस्मेटिक रूल 2020 में किया संशोधन
नई दिल्ली
बीते तीन साल में देश में ब्यूटी और पर्सनल केयर बाजार ने काफी तरक्की की है। स्वदेशी उत्पादों ने विदेशों में भी धूम मचा रखी है। लेकिन बढ़ते हुए बाजार के साथ उत्पादकों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। भारतीय ब्यूटी उद्योग को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कॉस्मेटिक रूल 2020 में संशोधन किया है। नये बदलाव के बाद अब किसी भी ब्यूटी प्रॉडक्ट्स पर इस्तेमाल करने की तिथि यानि एक्सपायरी डेट लिखनी होगी, इसके साथ ही रिकार्ड कीपिंग मानकों का भी प्रयोग करना होगा। ऐसा न करने की सूरत में उत्पादन करने वाली कंपनी का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
इस बावत 29 जुलाई 2025 को एक नोटिफिकेशन जारी किया गया। जिसमें कॉस्मेटिक उत्पादक कंपनियों के लिए मानकों को सख्त किया गया है। इस नोटिफिकशन का आश्य है कि कॉस्मेटिक उत्पाद जैसे कि क्रीम, फेसवॉश, क्लींजर आदि के ऊपर इस बात की जानकारी अवश्य दी जाएगी कि इस उत्पाद को इस तिथि से पहले इस्तेमाल कर लिया जाएं। इसके साथ ही एक्सपायरी डेट भी लिखनी होगी, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता को बरकरार रखा जा सके। इसके साथ ही उत्पादकों की गुणवत्ता जांच अधिकारी को कंट्रोलिंग ऑफिसर की जगह अब कंट्रोलिंग ऑर्थारिटी कहा जाएगा। नये बदलाव के बाद ड्रग्स एवं कॉस्मेटिक एक्ट 1940 के सेक्शन 12 व सेक्शन 33 में दिए गए अधिकारों के तहत केंद्र सरकार ड्रग्स टेक्निकल एडवायजरी बोर्ड के साथ सलाहमशरा कर कॉस्मेटिक रूल के नये बदलावों को लागू करने के लिए स्वतंत्र होगी। इसके साथ ही नियम नंबर 31ए कैंसिलेशन एंड सस्पेंशन ऑफ लाइसेंस के तहत स्टेट लाइसेंसिस ऑर्थरिटी को नियमों की अवहेलना करने वाली कंपनी का लाइसेंस रद्द करने का अधिकार होगा। विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय ब्यूटी उत्पादों के बाजार में बीते तीन साल में काफी वृद्धि हुई है। एक अनुमान के अनुसार इंडियन ब्यूटी एंड पर्सनल केयर मार्केट वर्ष 2033 तक 47,03.0 मिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। सीएजीआर के अनुसार इंडियन ब्यूटी एंड पर्सनल केयर प्रॉडक्ट्स 10.2 प्रतिशन की गति से बढ़ रहा है।
कुछ राहत के पहलू
- ऐसे लाइसेंस धारक जिनका लाइसेंस रद्द कर दिया गया है, वह 90 दिन के भीतर राज्य सरकार के पास दोबारा आवेदन कर सकते हैं, इसके बाद राज्य सरकार का निर्णय अंतिम निर्णय होगा।
- नये बदलाव के नियम 26 के तहत लाइसेंस धारक को कंपनी में बनने वाले प्रत्येक उत्पाद के उत्पादन की तारिख, उसमें इस्तेमाल किया गया इंडिग्रेडेंट आदि की जानकारी रखनी होगी, और इस रिकार्ड को हर तीन साल में स्टॉक या बैच खत्म होने के बाद दोबारा एप्लाई करना होगा।
- हालांकि यह नियम लाइसेंसधारक साबून उत्पादकों पर लागू नहीं होगा।
- नियम 11 के तहत सेंट्रल ड्रग्स लैबोरेटरी अब सेंटल कॉस्मेटिक लैबोरेटरी के रूप में विश्लेषण और परीक्षण का कार्य करेगी।
- निर्यात करने वाली कंपनियों के लिए भी नियमों में कुछ बदलाव किए गए हैं रूल 34 दस के अनुसार, पैकेजिंग पर उस कंपनी के कॉस्मेटिक नियमों को लिखा जाएगा, जिस कंपनी में उत्पाद भेजा जा रहा है। ऐसे देश जहां मैन्यूफैक्चर का नाम और पता नहीं भेजा जा सकता, वहां कोड नंबर दिया जाएं, जिसे राज्य लाइसेंस ऑर्थरिटी द्वारा स्वीकृत किया गया हो।
- https://www.livemint.com/news/india/india-overhauls-cosmetics-regulations-to-enhance-safety-and-accountability-curb-fakes-11754165336713.html

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