क्या आप भी कर रहे हैं Passenger Parenting?

Are you also practicing Passenger Parenting? It could have a deep impact on your child's development.
Are you also practicing Passenger Parenting? It could have a deep impact on your child’s development.
  • बच्चे के विकास पर पड़ सकता है गहरा असर

परिमल कुमार,

आज की व्यस्त ज़िंदगी में माता-पिता अक्सर बच्चों के साथ रहते हुए भी उनसे दूर हो जाते हैं। इसे ही Passenger Parenting कहा जाता है। दरअसल यह Passive approach of parenting है, जिसमें मां-बाप बच्चे के जीवन में शामिल तो दिखते हैं लेकिन असल में मौजूद नहीं होते।

चाहे ऑफिस का काम हो, मेट्रो जैसी भागदौड़ भरी लाइफ हो या फिर टीवी और मोबाइल जैसी डिजिटल व्यस्तताएं—जब आप बच्चे से ज़्यादा स्क्रीन को तरजीह देते हैं, तो यह Passenger Parenting की निशानी है।

 

विशेषज्ञों के मुताबिक, पैसेंजर पेरेंटिंग में पांच बड़ी कमियां साफ दिखती हैं:

Low Involvement (कम भागीदारी)

Lack of monitoring (निगरानी की कमी)

Emotional Distance (भावनात्मक दूरी)

Over Reliance on Others (दूसरों पर ज़रूरत से ज़्यादा निर्भरता)

Delayed Reaction (देरी से प्रतिक्रिया देना)

इन कमियों का असर सीधे बच्चे के Emotional, Cognitive और Social विकास पर पड़ता है। बच्चे में Behavioral Issues आ सकते हैं, वह Emotional Insecurity का शिकार हो सकता है, आत्मसम्मान में कमी और सामाजिक कौशल (Social Skills) की कमजोरी देखी जा सकती है। यहां तक कि पढ़ाई में पिछड़ने और माता-पिता के प्रति सम्मान घटने जैसी समस्याएं भी उभर सकती हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना ज़रूरी है, लेकिन कम उम्र में उन्हें पूरी तरह छोड़ देना उनके विकास के लिए खतरनाक हो सकता है। इसलिए मां-बाप को चाहिए कि वे Driver Parenting अपनाएं यानी खुद स्टीयरिंग संभालें, या कम से कम Co-Pilot Parenting करें, ताकि बच्चे को दिशा मिलती रहे।

संस्थापक : Kiddocracy

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