
- सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पचास से अधिक अधिवक्ताओं से इस संदर्भ में हस्ताक्षर के साथ ज्ञापन पत्र सौंपा
देश के प्रथम राष्ट्रपति, राष्ट्रनायक, स्वतंत्रता सेनानी, प्रख्यात अधिवक्ता, संविधान सभा के अध्यक्ष और भारत रत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती 3 दिसंबर को देशभर की विभिन्न अदालतों में ‘अधिवक्ता दिवस के रूप में मनाई जाती है। किंतु यह परंपरा अब तक सुप्रीम कोर्ट में औपचारिक रूप से लागू नहीं हो सकी है। वर्ष 2025 में अधिवक्ता दिवस को पहली बार सर्वोच्च न्यायालय परिसर के लाउंज में मनाने की पहल ने सर्वोच्च न्यायालय बार एसोसिएशन की कार्यशैली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
अधिवक्ता सचिन कुमार श्रीवास्तव ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और महासचिव को 50 से अधिक अधिवक्ताओं के हस्ताक्षर के साथ एक ज्ञापन सौंपा था, जिसमें अधिवक्ता दिवस को औपचारिक रूप से मनाने और लाउंज में डॉ. राजेंद्र प्रसाद की तस्वीर लगाने की मांग की गई थी। हालांकि बार प्रबंधन की ओर से इस मांग पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। दूसरी ओर, इसी दिन महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्यक्रमों का व्यापक आयोजन किया गया, जिससे अधिवक्ताओं ने इसे ‘उदासीनता’ करार दिया।
बार की चुप्पी के बीच, सचिन कुमार श्रीवास्तव ने अपने दिए गए ज्ञापन के मद्देनज़र बुधवार शाम 3:30 बजे अधिवक्ता लाउंज में उपस्थित वरिष्ठ व कनिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ मिलकर डॉ. राजेंद्र प्रसाद की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर अधिवक्ता दिवस को मनाया। अधिवक्ताओं ने इसे न्यायपालिका के इतिहास और भारत के प्रथम राष्ट्रपति के प्रति सम्मान की दिशा में एक प्रतीकात्मक लेकिन महत्वपूर्ण कदम बताया।
सूत्रों के अनुसार, एसोसिएशन के अध्यक्ष और महासचिव से डॉ. राजेंद्र प्रसाद की तस्वीर को लाउंज में लगाने की अनुमति भी मांगी थी, लेकिन मंजूरी नहीं दी गई । न ही बार एसोसिएशन ने इस संबंध में कोई औपचारिक कार्यक्रम आयोजित किया।
गौरतलब है कि इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष श्री कपिल सिब्बल के कार्यकाल में इसी प्रकार का ज्ञापन सचिन कुमार श्रीवास्तव व अन्य अधिवक्ताओं द्वारा सौंपा गया था, लेकिन उस समय भी मांग पर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया और न ही तस्वीर लगाने की अनुमति दी गई।
लंबे समय से चली आ रही इस मांग के बाद, वर्ष 2025 में पहली बार सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ताओं द्वारा स्वयं के प्रयासों से डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती को ‘अधिवक्ता दिवस’ के रूप में मनाया गया। वरिष्ठ व कनिष्ठ अधिवक्ताओं द्वारा उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।