थैलासीमिया मरीजों को सुरक्षित रक्त पहुंचाने की पहल की सराहना

Thalassemia patients hail blood safety bill tabled in Lok Sabha & Rajya Sabha
Thalassemia patients hail blood safety bill tabled in Lok Sabha & Rajya Sabha

नई दिल्ली,

थैलेसीमिया पेशेंट्स एडवोकेसी ग्रुप (TPAG) एवं रक्त संक्रमित मरीजों ने संसद में नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूज़न बिल 2025 लाए जाने का स्वागत किया है। मौजूदा शीतकालीन सत्र में लोकसभा सांसद श्री परशोत्तमभाई रूपाला ने यह बिल प्रस्तुत किया है। देश भर के थैलेसीमिया रोगी सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण रक्त पर निर्भर हैं, जिसकी उन्हें ज़िंदगी भर लगातार ज़रूरत पड़ती है। यह बिल उनके लिए एक ऐतिहासिक और बहुप्रतीक्षित कदम है।

राज्यसभा में डॉ. अजीत माधवराव गोपचडे ने समानांतर रूप से यह बिल प्रस्तुत किया है, जिससे इसे और बल मिला है। यह कदम दिखाता है कि भारतीय संसद देश के सबसे कम विनियमित लेकिन जीवन के लिए महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्रों में से एक में सुधार के लिए बेहद गंभीर है।

प्रस्तावित कानून का उद्देश्य एक समर्पित नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूज़न बिल अथॉरिटी बनाना, ब्लड कलेक्शन, टेस्टिंग, प्रोसेसिंग, स्टोरेज, डिस्ट्रीब्यूशन और ब्लड के लिए एक समान राष्ट्रीय मानक निर्धारित करना है। इसके साथ-साथ सभी रक्त केंद्रों का पंजीकरण अनिवार्य करना, रक्त की निगरानी को मजबूत करना, स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देना और असुरक्षित या नियमों का पालन न करने वाली गतिविधियों पर कठोर दंड का प्रावधान भी इस बिल में प्रस्तावित हैं। ये प्रावधान खंडित विनियमन और असंगत गुणवत्ता जैसी चिंताओं का सीधे तौर पर समाधान करेंगे, जिनसे रोगी, देखभालकर्ता और चिकित्सक लंबे समय से जूझ रहे हैं।

थैलेसीमिया समुदाय की ओर से भारत भर के थैलेसीमिया रोगियों ने रक्त की सुरक्षित और समान उपलब्धता को मजबूत करने के लिए इस नए विधायी प्रयास और प्रतिबद्धता के लिए गहरी सराहना व्यक्त की। उन लाखों रोगियों के लिए यह सुधार एक सुरक्षित, अधिक जवाबदेह और अधिक कुशल रक्त प्रणाली की उम्मीद जगाता है, जिनकी ज़िंदगी रक्त पर ही निर्भर है। राष्ट्रीय स्तर पर व्यवस्थित ढांचा बनने से सुरक्षा, गुणवत्ता आश्वासन, जवाबदेही और जनविश्वास को मजबूती मिलेगी।

TPAG की सदस्य सचिव अनुभा तनेजा मुखर्जी ने कहा: “हजारों थैलेसीमिया रोगियों के लिए, रक्त एक उपचार नहीं है। यह जीवन रेखा है। ये बिल अंततः गुणवत्तापूर्ण रक्त की सुरक्षित और समान उपलब्धता सुनिश्चित करने की बात करता है। साथ ही मजबूत और एकीकृत राष्ट्रीय ढांचा बनाने की तात्कालिकता को मान्यता देता है। हम इस विधायी कदम की सराहना करते हैं और संसद से आग्रह करते हैं कि वह इस कानून को पहल के आधार पर जल्द से जल्द पारित करे। रोगियों की गरिमा, सुरक्षा और भविष्य के लिए अब और प्रतीक्षा नहीं कर सकते।

थैलेसेमिक इंडिया के अध्यक्ष दीपक चोपड़ा ने कहा: “यह विधेयक भारत में रक्त सुरक्षा के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव का प्रतीक है। दशकों से, मरीज़ों को खून की गुणवत्ता में असमानता और व्यवस्था संबंधी कमियों का सामना करना पड़ा है। एक राष्ट्रीय ढांचा अंततः रोगी देखभाल में एकरूपता, जवाबदेही और सम्मान लाएगा। हम इस ऐतिहासिक कदम का स्वागत करते हैं।”

रक्त और रक्त घटकों के लिए एक मजबूत राष्ट्रीय नियामक ढांचा जन स्वास्थ्य के लिए बेहद आवश्यक है। TPAG विधेयक के पारित होने के बाद सही और समयबद्ध तरीके से इसके नियमों को लागू करने के लिए नीति निर्माताओं, विशेषज्ञों, राज्य अधिकारियों और नागरिकों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत के थैलेसीमिया पीड़ित लोगों के लिए यह विधेयक मात्र एक सुधार नहीं है। यह एक जीवन रेखा है और इसका समय पर पारित होना भारत में सुरक्षित खून प्राप्त करने के भविष्य को आकार देगा।

23 वर्षीय बीटा थैलेसीमिया रोगी सुनेहा पॉल ने कहा: “मैं जब दो महीने की थी, तभी मेरे थैलेसीमिया पीड़ित होने का पता चला था। तब से अब तक मुझे हर दो सप्ताह में खून चढ़ाया जा रहा है। आठवीं कक्षा में थी, तब पता चला कि मुझे एचआईवी हो गया है। इससे मेरी मुश्किलें और बढ़ गईं। मैं सुरक्षित ब्लड ट्रांसफ्यूज़न यकीनी बनाने के लिए अधिकारियों के प्रयासों की सराहना करती हूं। यह रोगियों की देखभाल का एक महत्वपूर्ण पहलू है। इस मामले को प्राथमिकता देने और मुझ जैसे रोगियों के जीवन में बदलाव लाने के लिए धन्यवाद। उठाए जा रहे गंभीर उपायों के लिए मैं आभारी हूं—आपके प्रयास वास्तव में जीवनरक्षक हैं।”

दो साल की उम्र से थैलासीमिया मेजर से पीड़ित नेहा ढिंगरा ने बताया: “ब्लड ट्रांसफ्यूज़न ने मेरी रोज़ाना की ज़िंदगी, मेरी चुनौतियों और मेरी ताकत को आकार दिया है। उन लोगों के लिए सुरक्षित खून से बढ़कर और कुछ भी नहीं है, जिन्हें जीवित रहने के लिए हमेशा इसी पर निर्भर रहना पड़ता हो। हाल ही में पेश किया गया राष्ट्रीय सुरक्षित रक्त विधेयक हजारों रोगियों के लिए स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद लेकर आया है। मैं इस विधेयक के लिए आभारी हूं।”

TPAG का मानना है कि सुरक्षित रक्त न केवल एक चिकित्सीय आवश्यकता है बल्कि एक मौलिक अधिकार भी है। दोनों सदनों में पेश किए गए विधेयक आने वाली पीढ़ियों के लिए इस अधिकार की रक्षा की नींव रखते हैं। ये खंडित विनियमन से हटकर एक आधुनिक, व्यापक कानून की ओर बदलाव को दर्शाते हैं जो सुरक्षा और नैतिक आचरण के उच्चतम मानकों के अनुरूप है। देश भर के थैलेसीमिया पीड़ित इस कदम की तहे दिल से सराहना करते हैं और सभी सांसदों से आग्रह करते हैं कि वे मौजूदा सत्र के दौरान ही इसे जल्दी से पारित करवाएं। हर देरी से व्यवस्थागत कमजोरियां बढ़ती हैं जो सीधे तौर पर रोगियों के जीवन को प्रभावित करती हैं।

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