
- वर्ष 2016 में शुरू की गई हेल्पलाइन पर एक करोड़ कॉल आई छह लाख नियमित संपर्क में रहे, जिसमें से दो लाख दस हजार लोगों ने तंबाकू को पूरी तरह छोड़ दिया
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट (VPCI) द्वारा चलाया जा रहा नेशनल टोबैको क्विट हेल्पलाइन (1800-112-356) तंबाकू छोड़ने में लोगों की काफी मदद कर रहा है। VPCI के निदेशक प्रोफेसर राज कुमार के अनुसार, इस हेल्पलाइन का उपयोग करने वाले करीब 35 प्रतिशत (दो लाख दस हजार) लोग सफलतापूर्वक तंबाकू छोड़ पाए हैं, जिनमें बिना धुएँ वाला तंबाकू भी शामिल है।
इंस्टीट्यूट डे कार्यक्रम के दौरान बात करते हुए प्रोफेसर कुमार ने बताया कि यह हेल्पलाइन देश की सबसे प्रभावी, लेकिन कम पहचानी गई, जनस्वास्थ्य योजनाओं में से एक है। शुरुआत में यह सेवा VPCI से शुरू की गई थी, लेकिन इसकी सफलता को देखते हुए बाद में इसका विस्तार किया गया। इसके तहत बेंगलुरु के निमहांस, मुंबई के टाटा मेमोरियल कैंसर इंस्टीट्यूट और गुवाहाटी के रीजनल कैंसर इंस्टीट्यूट में कॉल सेंटर खोले गए, ताकि देशभर के लोगों तक इसकी पहुँच हो सके।
आज यह हेल्पलाइन सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक (सोमवार को छोड़कर) काम करती है और 15 भारतीय भाषाओं में काउंसलिंग की सुविधा देती है।
इसकी पहचान बढ़ाने के लिए भारत सरकार ने यह भी अनिवार्य कर दिया है कि हेल्पलाइन नंबर सभी तंबाकू उत्पादों पर छापा जाए। प्रोफेसर कुमार ने कहा, “इससे जब भी कोई व्यक्ति तंबाकू का पैकेट उठाता है और छोड़ने के बारे में सोचता है, तो मदद का नंबर उसे वहीं मिल जाता है।” VPCI ने यह भी अध्ययन किया कि क्या हेल्पलाइन पर खर्च किया गया पैसा जनता के लिए फायदेमंद है। प्रोफेसर कुमार के मुताबिक नतीजा साफ है—
“हां, यह लोगों को तंबाकू छोड़ने में मदद करने का सबसे असरदार तरीका है।”
जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसी आसान और कम खर्च वाली सेवाओं को मज़बूत करने से भारत में तंबाकू की बड़ी समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है—एक फोन कॉल के ज़रिये।
प्रोफेसर कुमार ने बताया कि 2016 में शुरू की गई यह हेल्पलाइन सिर्फ कॉल उठाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के तंबाकू छोड़ने के पूरे सफर में उसके साथ रहती है। जब कोई व्यक्ति फोन करता है, तो उसे एक प्रशिक्षित काउंसलर से जोड़ा जाता है, जो उसकी लत को समझाता है और मानसिक रूप से छोड़ने के लिए तैयार करता है। इसके बाद हेल्पलाइन की टीम खुद कॉल करती है, छोड़ने की तारीख तय की जाती है, पहले काउंसलिंग दी जाती है और छोड़ने के बाद भी 7 दिन, 1 महीना, 3 महीने और 9 महीने तक फॉलो-अप किया जाता है।
प्रोफेसर कुमार ने कहा, “यही लगातार साथ देना इस योजना को सफल बनाता है।”आंकड़े भी इसकी सफलता दिखाते हैं। 2016 से अब तक दिल्ली से ही करीब एक करोड़ कॉल हेल्पलाइन पर आए हैं। इनमें से लगभग छह लाख लोगों ने नियमित सहायता के लिए पंजीकरण कराया, और इनमें से करीब 35 प्रतिशत लोग तंबाकू छोड़ने में सफल रहे।
प्रोफेसर कुमार ने कहा, “अगर इन नतीजों की तुलना दुनिया के दूसरे अध्ययनों से करें, तो ये आंकड़े बहुत उत्साह बढ़ाने वाले हैं।”

Senior Reporter