
विश्व कैंसर दिवस — कैंसर से बचाव, शीघ्र पहचान व संपूर्ण इलाज से ही कैंसर पर विजय
विश्व में कैंसर की अग्रणी संस्था यूआईसीसी के आह्वान पर विश्व कैंसर दिवस (World Cancer Day) हर साल 4 फरवरी को मनाया जाता है। इसका आयोजन UICC (Union for International Cancer Control) द्वारा किया जाता है।
डॉ. दिलीप कुमार आचार्य, राष्ट्रीय अध्यक्ष, आईएमए, कैंसर निवारण एवं तंबाकू नियंत्रण समिति ने बताया कि इस दिवस की घोषणा पहली बार वर्ष 2000, में होने के बाद से पूरे विश्व में इसे मनाया जाता है, डॉ आचार्य ने बताया कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा भी करीब 15 दिन पहले, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ अनिल कुमार नायक, राष्ट्रीय महासचिव डॉक्टर सरवरी दत्ता के निर्देशन में डॉक्टर आचार्य द्वारा पूरे देश में फैले हुए सभी 1800 इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की ब्रांचेस को इसे मनाने के लिए गाइडलाइंस भेज दी जाती है वह बाद में कई ब्रांचेस द्वारा अपनी गतिविधियां शेयर भी करी जाती है/
विश्व कैंसर दिवस 2026 की थीम: “अद्वितीयता से एकजुट” (United by Unique) 2026 का अभियान UICC के तीन साल (2025–2027) के वैश्विक अभियान का दूसरा वर्ष है। * उद्देश्य: इस थीम का मुख्य उद्देश्य “व्यक्ति-केंद्रित देखभाल” (People-centered care) को बढ़ावा देना है। यह मानता है कि भले ही लाखों लोग कैंसर से प्रभावित हैं, लेकिन प्रत्येक रोगी का अनुभव, उसकी भावनाएं और जरूरतें अनूठी होती हैं।
कैंसर के वैश्विक आंकड़े (Global Statistics)
वार्षिक मृत्यु: हर साल 1 करोड़ (10 मिलियन) लोग कैंसर से मरते हैं। यह एचआईवी/एड्स, मलेरिया और तपेदिक (TB) की संयुक्त मृत्यु दर से भी अधिक है।
“भारत में कैंसर (Cancer) के आंकड़े काफी गंभीर हैं। भारत में कैंसर के प्रमुख आंकड़े (2024-2025 के अनुमान) नए मामलों की संख्या: भारत में हर साल लगभग 14 से 15 लाख नए कैंसर के मामले सामने आते हैं। 2025 तक यह संख्या बढ़कर 15.7 लाख होने का अनुमान है। मृत्यु दर: भारत में कैंसर से होने वाली मौतों की संख्या सालाना लगभग 8 से 9 लाख है। रोके जा सकने वाली मौतें: कैंसर से होने वाली 40% से अधिक मौतें रोकी जा सकती हैं (जैसे धूम्रपान, शराब और खराब आहार को नियंत्रित करके)। जल्द पहचान का महत्व: यदि समय पर स्क्रीनिंग और उपचार हो, तो एक तिहाई (1/3) मौतें रोकी जा सकती हैं। आर्थिक लागत: अगले 30 वर्षों में कैंसर की अनुमानित वैश्विक लागत $25 ट्रिलियन है।
डॉ आचार्य ने बताया कि कैंसर रोकथाम के दो मुख्य तरीके
- प्राथमिक रोकथाम (Primary Prevention – जोखिम कम करना)
कैंसर के 1/3 से अधिक मामलों को रोका जा सकता है। सरकारों और व्यक्तियों को निम्नलिखित पर ध्यान देना चाहिए:
तंबाकू का त्याग: यह कैंसर का सबसे प्रमुख कारण है। इसे छोड़ने से जीवन प्रत्याशा बढ़ती है। तंबाकू से 15 प्रकार के कैंसर होते हैं
शराब पर नियंत्रण: शराब के सेवन को सीमित करने से मुंह, ग्रासनली और स्तन कैंसर का खतरा कम होता है। शराब से भी साथ प्रकार के कैंसर हो सकते हैं
स्वस्थ जीवनशैली: नियमित व्यायाम और सही वजन बनाए रखने से किडनी और पेट के कैंसर का खतरा कम होता है। मोटापा भी कैंसर का कारण होता है इससे भी 7 प्रकार के कैंसर हो सकते हैं
टीकाकरण: हेपेटाइटिस-बी (लिवर कैंसर के लिए) और एचपीवी (सर्वाइकल कैंसर के लिए) के टीके लगवाना। 9 से 14 की उम्र में लड़कियों को एचपीवी वैक्सीन का टीका लगाकर सर्वाइकल कैंसर पर करीब करीब पुरी कंट्रोल किया जा सकता है
- द्वितीयक रोकथाम (Secondary Prevention – स्क्रीनिंग और जल्दी पहचान)
यदि कैंसर का पता शुरुआती चरणों में चल जाए, तो इसके ठीक होने की संभावना 1/3 बढ़ जाती है।
नियमित स्क्रीनिंग: मैमोग्राम (स्तन कैंसर), पैप स्मीयर (सर्वाइकल कैंसर) और कोलोनोस्कोपी जैसी जांचें लक्षण दिखने से पहले ही बीमारी को पकड़ सकती हैं।
बचाव दर: उदाहरण के लिए, शुरुआती चरण में स्तन कैंसर की पहचान होने पर बचने की दर 95% है, जबकि अंतिम चरणों में यह केवल 20% रह जाती है
कैंसर के संकेत और लक्षण
कैंसर के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि बीमारी शरीर में कहां है। कुछ मुख्य संकेत निम्नलिखित हैं:
असामान्य गांठ या सूजन: कैंसर की गांठें अक्सर दर्द रहित होती हैं और समय के साथ बढ़ती जाती हैं।
खांसी, सांस फूलना या निगलने में कठिनाई: लगातार खांसी या निगलने में तकलीफ पर ध्यान दें।
मल त्याग की आदतों में बदलाव: जैसे कब्ज, दस्त या मल में खून आना।
अकारण रक्तस्राव: योनि, गुदा मार्ग, मूत्र या खांसी के साथ खून आना।
अकारण वजन कम होना: कम समय (जैसे एक-दो महीने) में अचानक वजन कम होना।
थकान: अत्यधिक थकान और ऊर्जा की भारी कमी महसूस होना।
दर्द: अस्पष्ट या लगातार बना रहने वाला दर्द।
मस्से या तिल में बदलाव: तिल के आकार, रंग या रूप में बदलाव, या उसमें से खून निकलना।
पेशाब संबंधी समस्याएं: बार-बार पेशाब आना, पेशाब रुकना या पेशाब के दौरान दर्द होना।
स्तन में असामान्य बदलाव: आकार में बदलाव, त्वचा में बदलाव या दर्द महसूस होना।
भूख की कमी: लंबे समय तक सामान्य से कम भूख लगना।
घाव जो ठीक न हो: कोई ऐसा घाव, छाला या मुंह का अल्सर जो लंबे समय तक ठीक न हो।
हार्टबर्न या अपच: लगातार होने वाली जलन या बदहजमी।
रात में पसीना आना: रात को सोते समय शरीर का पसीने से भीग जाना।
इनमें से अधिकतर लक्षण कैंसर के अलावा किसी अन्य सामान्य कारण से भी हो सकते हैं, लेकिन जल्द पहचान (early detection) बचाव के लिए बहुत जरूरी है। यदि आप अपने शरीर में कोई भी असामान्य बदलाव महसूस करते हैं, तो तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें।
गैर-परिवर्तनीय जोखिम कारक (Non-modifiable Risk Factors)
ये वे कारक हैं जिन्हें बदला नहीं जा सकता:
आयु: उम्र बढ़ने के साथ कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
कार्सिनोजेन्स: वे पदार्थ जो कोशिका के व्यवहार को बदल देते हैं।
आनुवंशिकी (Genetics): विरासत में मिले आनुवंशिक लक्षण कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
प्रतिरक्षा प्रणाली: कमजोर इम्यून सिस्टम कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है।
अतः इस कैंसर दिवस विश्व कैंसर दिवस पर डॉक्टर आचार्य द्वारा आमजन से यही अपील की गई है कि ऊपर बताए गए किसी भी लक्षण को पाने पर अपने डॉक्टर से कंसल्ट करें अपने सेहत का ध्यान रखें बच्चियों को वैक्सीन लगवाएं जिससे कैंसर होने से ही बचा जा सके या उसकी शुरुआती दौर में ही पहचान हो सके व पहचान के बाद इसका संपूर्ण इलाज जरूर करवा करवाइए, मध्य प्रदेश में सरकार द्वारा आयुष्मान योजना के अंतर्गत कैंसर का संपूर्ण इलाज मुफ्त में इस योजना में रजिस्टर्ड अस्पताल में भी करवाया जा सकता है
डॉ. दिलीप कुमार आचार्य,
राष्ट्रीय अध्यक्ष,
आईएमए, कैंसर निवारण एवं तंबाकू नियंत्रण समिति

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