श्वासा एआई एप से खांसने से हो जाएगी अस्थमा की पहचान

Asthma can be detected just by coughing, a mobile app developed for chronic pulmonary and obstructive diseases
Asthma can be detected just by coughing, a mobile app developed for chronic pulmonary and obstructive diseases
  • क्रानिक पल्मोनरी और अब्सट्क्टिव डिसीस के लिए मोबाइल एप Swassa तैयार

नई दिल्ली, सेहत संवाददाता

एआई यानि आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस आने वाले समय में जीवन के हर पहलू का अहम हिस्सा होगा, स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई की मदद से सटीक डेटा परीक्षण, जांच और सटीक शल्य प्रक्रियाओं को अंजाम दिया जा रहा है। एआई से मानसिक स्वास्थ्य की पहचान के बाद अब एम्स ने श्वांस या क्रानिक अब्सट्र्किटव डिसीस के लिए मोबाइल एप लांच किया है। इस एप के माध्यम से दो से तीन बार खांसने पर अस्थमा या सांस संबंधी परेशानियों का पता लगाया जा सकेगा। सीओपीडी बीमारियों के लिए इस एप का 400 से अधिक मरीजों पर परीक्षण किया जा चुका है। इसकी खासियत यह है कि स्पूटम या बलगम का सैंपल देने की जगह मरीज को मोबाइल में डाउनलोड स्वासा एप के सामने केवल दो से तीन बार खांसना होगा। इससे आठ मिनट के अंदर मरीज की रिपोर्ट सामने होगी।

एम्स के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के डॉ हर्षल साल्वे ने बताया कि भारत मंडपम में आयोजित एआई इंपैक्ट समिट 2026 में स्वासा को इनोवेशन केस स्टडी के साथ पेश किया गया है। मोबाइल एप को एक निजी एप कंपनी ने विकसित किया है। परिक्षण के बाद अब एम्स ने इस एप का प्रयोग सीओपीडी के मरीजों में सांस संबंधी परेशानियों की स्क्रीनिंग के लिए करने के लिए हरी झंडी दे दी है।

मालूम हो कि एम्स के बल्लभगढ़ आउटरीच ओपीडी में इसका उपयोग शुरू भी कर दिया गया है। एप के माध्यम से स्क्रीनिंग काफी आसान है, इसमें पहले मरीज की बुनियादी जानकारी हासिल की जाती हैं, फिर एप एआई आधारित एल्गोरिदम के आधार पर यह पता लगाया जाता है कि मरीज को सांस की समस्या है या नहीं और यदि है तो वह कितनी गंभीर है। हालांकि रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद आने के सघन परीक्षण के लिए स्पूटम या बलगम का सैंपल लिया जा सकता है।

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