केजीएमयू: घोटालेबाजों की उड़ी नींद, शासन ने गठित की जांच कमेटी

लखनऊ। केजीएमयू में होने वाली नियुक्तियों में गड़बड़ी करने वालों की नींद उस वक्त उड़ गई जब शासन ने जांच कमेटी गठित कर दी। विशेष सचिव चिकित्सा शिक्षा कृतिका शर्मा की अध्यक्षता वाली कमेटी केजीएमयू में की गईं नियुक्तियों की ही जांच नहीं करेगी बल्कि नियम विरूद्ध प्रमोशन, कर्मियों को नियमित किए जाने और उन्हें फर्जी तरीके से पेंशन व अन्य सेवा लाभ दिए जाने की भी जांच करेगी। माना जा रहा है कि अगर पारदर्शी तरीके से जांच की गई तो कर्मियों की नौकरियां ही नहीं जायेंगी बल्कि नियुक्तियों में फर्जीवाड़ा कर अपनी जेबें भरने वालों पर मुकदमें भी हो सकते हैं।

ऐसा नहीं है कि पहली बार नियुक्तियों में गोरखधंधे की बात सामने आई हैं। इससे पहले भी कई बार केजीएमयू प्रशासन को ऐसी शिकायतें मिलीं लेकिन अफसरों ने हर बार खानापूर्ति करते हुए शिकायतों को कचरे के डब्बे में डाल दिया था। इस बार प्रदेश सरकार ने इसका संज्ञान लेते हुए शासन स्तर से जांच कमेटी बना दी है।

केजीएमयू में फर्जी नियुक्तियों का मामला यूं ही जांच के दायरे में नहीं आ गया। विवाद कथित धर्मांतरण से शुरू हुआ था जिसके बाद केजीएमयू प्रशासन के साथ कई अन्य महत्वपूर्ण पदों पर बैठे अफसरों पर पक्षपात और नियम विरूद्ध काम करने के आरोप लग गए। धर्मांतरण मामले की जांच एसटीएफ को सौंप दी गई तो दूसरे मामले केजीएमयू प्रशासन की गले की फांस बन गए। नियुक्तियों की जांच का आदेश आने के बाद केजीएमयू प्रशासन के साथ कुछ फैकल्टी व कर्मियों के चेहरे पर हवाइयां उड़ गई हैं जिन्होंने अपने रिश्तेदारों और पत्नियों तक को गलत तरीके से नियमित पद पर नियुक्त करा लिया है।

विवादों को नई दिशा देने की हुई कोशिश

धर्मांतरण के मामले में केजीएमयू प्रशासन पर जब एक मजहब को सपोर्ट करने का आरोप लगा तो विवाद को नई दिशा देने की कोशिश की और कैम्पस में बनीं मजारों पर नोटिस चस्पा कर दिए। मजार मामले में अभी तक शासन की ओर से कोई दखल नहीं दिया गया है जबकि मजारों पर आस्था का केन्द्र मानने वाले विरोध में जरूर सामने आ गए हैं। विरोध के बाद केजीएमयू प्रशासन अब मजार को नोटिस पर दूसरा नोटिस जारी कर रहा है।

जांच का दायरा बढ़वाने की मंशा

केजीएमयू में वर्तमान और पूर्व फैकल्टी मेम्बर नियुक्तियों की जांच से संतुष्ट नहीं है। उनकी मंशा है कि जांच का दायरा नियुक्तियों तक ही सीमित न रहे। उपकरणों की खरीद फरोख्त और भवन निर्माण के कार्यों के टेण्डरों की भी जांच की जाए। यह भी देखा जाए कि जो उपकरण जरूरी बताकर क्रय किए गए या किए जा रहे उनकी संस्थान को कितनी आवश्यकता है। आरोप है कि केजीएमयू में कुछ ऐसे उपकरणों की खरीद की गई हैं जिनकी संस्थान को कोई जरूरत नहीं थी। केवल कुछ अफसरों को लाभ पहुंचाने के लिए करोड़ों की खरीद की गई। अगर जांच की आंच उपकरणों की खरीद फरोख्त तक पहुंच गई तो वर्तमान केजीएमयू प्रशासन की मुश्किलें बढ़ जायेंगी।

किन बिन्दुओं पर गठित हुई कमेटी

विशेष सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी की जांच का प्रमुख मुद्दा है कुलपति के ओएसडी अब्बास की नियुक्ति। हालांकि अब्बास को पद से हटा दिया गया है। आरोप है कि अब्बास को रिटायरमेंट के बाद ओएसडी ही नहीं बनाया गया था बल्कि उन्हें अन्य सेवा लाभ भी मिल रहे थे। जांच कमेटी अब अब्बास के अलावा उन नियुक्तियों की भी जांच करेगी जिन्हें नियम विरूद्ध बताया जा रहा है। आरोप है कि कई कर्मियों को फर्जी तरीके से नियुक्त करने के अलावा उन्हें नियमित किया गया। इसमें केजीएमयू के कर्मियों के कई रिश्तेदार भी शामिल हैं जिन्हें कर्मचारियों ने घोटालेबाजों से मिलकर संस्थान में नियमित रूप से नियुक्त करा लिया। कमेटी में दूसरे सदस्य के रूप में वित्त नियंत्रक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को शामिल किया गया है जिनका जिम्मा होगा कि वह दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल कर यह पता लगाएं कि कौन कर्मी नियमित होने का हकदार था और कौन नहीं।

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