कोविड-19 की वैश्विक आपदा का खामियाजा FMG छात्रों को नहीं भुगतना चाहिए, DMA UP

FMG students should not bear the brunt of the global COVID-19 disaster, DMA UP

FMG students should not bear the brunt of the global COVID-19 disaster, DMA UP

 

विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स (FMG) से जुड़े हालिया घटनाक्रम ने हजारों भारतीय छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता की स्थिति पैदा कर दी है। कोविड-19 महामारी के दौरान वैश्विक स्तर पर शिक्षा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई थी। लॉकडाउन, अंतरराष्ट्रीय यात्रा प्रतिबंधों और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा प्रोटोकॉल के कारण दुनिया भर की विश्वविद्यालयों को अस्थायी रूप से ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था अपनानी पड़ी थी। हाल ही में नेशनल मेडिकल कमिशन द्वारा जारी एक आदेश में कहा गया है कि ऐसे विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स, जिन्होंने कोविड महामारी के दौरान ऑनलाइन क्लास के जरिए एमबीबीएस शिक्षा पूरी की है, उन्हें भारत में प्रैक्टिस करने के लिए ऑनसाइट ट्रेनिंग और इंटर्नशिप पूरी करनी होगी। डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश की राज्य प्रवक्ता डॉ. सिंह कृतिका जनार्दन ने कहा कि यह व्यवस्था पूरी तरह परिस्थितियों की देन थी और इसे छात्रों की पसंद या निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इस विषय पर सेहत365डॉटकॉम के संवाददाता ने डॉ कृतिका से विस्तृत बात की,

 

प्रश्न: क्या कोविड-19 जैसी वैश्विक आपदा का खामियाजा अब FMG छात्रों को भुगतना होगा?

जवाब,“कोविड-19 महामारी एक अभूतपूर्व वैश्विक संकट था जिसने पूरी दुनिया की शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया। उस समय विश्वविद्यालयों द्वारा ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था छात्रों की सुरक्षा और पढ़ाई को जारी रखने के लिए अपनाई गई थी। FMG छात्रों ने यह व्यवस्था अपनी इच्छा से नहीं चुनी थी, बल्कि यह परिस्थितियों के कारण आवश्यक हो गई थी।

आज कई वर्षों बाद उन छात्रों पर प्रतिगामी (retrospective) नियम लागू करना, जिन्होंने उस समय के प्रचलित नियमों के अनुसार अपने संस्थानों में प्रवेश लिया और अपनी पढ़ाई पूरी की, उनके साथ गंभीर अन्याय है। इन छात्रों ने कई वर्ष अपनी पढ़ाई में लगाए हैं, भारी आर्थिक संसाधन खर्च किए हैं और कठिन परिस्थितियों में अपनी शिक्षा पूरी की है।

इसके अतिरिक्त भारत में FMG छात्रों को पहले से ही कड़ी नियामक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जैसे कि FMGE/NExT परीक्षा उत्तीर्ण करना और अनिवार्य इंटर्नशिप पूरी करना। ये व्यवस्थाएँ पहले से ही यह सुनिश्चित करती हैं कि केवल योग्य और सक्षम डॉक्टर ही भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था में प्रवेश करें। ऐसे में अतिरिक्त और प्रतिगामी शर्तें लगाना छात्रों के लिए अनावश्यक बाधाएँ खड़ी कर सकता है।”

डॉ. सिंह कृतिका जनार्दन ने यह भी कहा कि इस पूरे विषय को संवेदनशीलता और व्यावहारिक दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है, ताकि उन छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखा जा सके जिन्होंने वैश्विक आपदा के दौरान भी अपनी पढ़ाई जारी रखने का प्रयास किया।

डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश ने संबंधित प्राधिकरणों से मांग की है कि कोविड-19 के दौरान हुई ऑनलाइन कक्षाओं के लिए अनिवार्य ऑन-साइट पूर्ति से जुड़े हालिया नोटिस को तुरंत वापस लिया जाए, महामारी से प्रभावित छात्रों को छूट दी जाए, तथा नए नियमों को प्रतिगामी रूप से लागू न किया जाए।

संगठन का यह भी कहना है कि FMGE/NExT परीक्षा और अनिवार्य इंटर्नशिप जैसे मौजूदा तंत्र FMG छात्रों की योग्यता और क्लिनिकल क्षमता का पर्याप्त आकलन करने के लिए पहले से मौजूद हैं।

 

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