
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नाकेबंदी के प्रभावों को लेकर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को लिखा पत्र
नई दिल्ली, सेहत संवाददाता
अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच जारी युद्ध के मद्देनअर स्टेट ऑफ होर्मुज पर नाकेबंदी का असर मेडिकल उपकरण उद्योग पर भी पड़ रहा है। जिसकी वजह से मेडिकल उपकरणों की कीमतें पचास फीसदी तक बढ़ गई हैं, जबकि क्रीटिकल प्लास्टिक जिसे मेडिकल पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है, की कीमतें 20 फीसदी तक बढ़ गई हैं। जबकि डीजल से चलने वाले उपकरणों की कीमतें पहले ही एलपीजी की दिक्कत की वजह से बढ़ी हैं जबकि इस बीच उर्जा उत्पादन और प्रक्रिया हीटिंग के लिए इस्तेमाल की जाने वाली अडानी पीएनजी गैस की कीमतों को लगभग दोगुना कर दिया गया है इसके साथ ही इसकी उपलब्धता भी घटा दी गई है। जिसकी वजह से सीरिंज, नाइट्राइल दस्ताने, कैथेटर और प्लास्टिक डिस्पोजेबल चिकित्सा उपकरणों पर फार्मा उपकरण कंपनियों का मार्जिन कम हो गया है।
इस बावत एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्रीज ने केंद्रीय वार्णिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखा है। जिसमें कहा गया है कि यदि मेडिकल उपकरण उद्योग के लिए जरूरी कच्चे माल में एक या दो हफ्ते की देरी होती है तो इसे संभाला जा सकता है, कंपनियों के पास पर्याप्त स्टॉक है, लेकिन इससे अधिक दिनों तक यदि हालात यही रहे तो मेडिकल उपकरण इंडस्ड्री पर इसका गंभीर असर पड़ेगा, संभव है कि जरूरी मेडिकल उपकरणों की कमी भी हो जाएं या फिर उपकरणों की कीमतें बढ़ानी पड़े। भारतीय मेडिकल इंडस्ट्री मुख्य रूप से हाई ग्रेड पॉलिमर के लिए आयात पर ही निर्भर है, जिसके लिए कठोर गुणवत्ता मानकों का पालन किया जाता है।
एआईएमईडी के फोरम कॉडिनेटर राजीव नाथ ने बताया कि हालांकि अभी किसी भी उपकरण को लेकर कभी नहीं हैं, लेकिन हालात को देखते हुए हम दवाब महसूस कर रहे हैं, हालांकि कुछ लोगों द्वारा इस तरह की अफवाह फैलाई जा रही है कि सिरिंज और ग्लबस आदि की कमी है, जबकि ऐसा नहीं है। हालांकि एलपीजी गैस की किल्लत के बीच कुछ हीट रिर्सोस संसाधनों पर इसका असर पड़ा है, लेकिन हालात अभी गंभीर नही हैं। लेकिन वैश्विक आपूर्ति श्रंखला की बदलती परिस्थितयों को देखते हुए सघन मॉनिटरिंग जरूरी है, ताकि उत्पादन समय और उद्योगों की स्थिरत पर युद्ध का प्रभाव न पड़े।
इस बावत एआईएमईडी ने सरकार ने प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान देने के लिए अनुरोध किया है।
सदस्य फोर्स मेजर के तहत सरकारी टेंडर अनुबंधों को रद्द करने के लिए संगठन सर्मथन की मांग करता है, जिससे मेडिकल उपकरण उद्योग से जुड़े पांच लाख अधिक मेडिकल और पैरामेडिकल स्टॉफ की नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आत्मनिर्भर भारत को मजबूत किया जाएं जिससे आयातित देशों जैसे यूएस और मध्य देशों पर देश की निर्भरता कम हो सके।
– यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि अंदरूनी माल ढुलाई शुल्क की लागत को कवर करने के लिए अवसरवादिता का लाभ न उठाया जाएं और कीमतों को बढ़ाया नहीं जाना चाहिए।
– अतिरिक्त जीएसटी की राशि सात दिनों के भीतर वापस करने के अपने वायदे का सम्मान करते हुए चिकित्सा उपकरण निर्माताओं के लिए तीव्र कार्यशील पूंजी संकट को दूर किया जाना चाहिए।
– यह विशेष रूप से उल्टे कर संरचाना की दोहरी चुनौती के बीच अत्यंत जरूरी है, निर्माता इनपुट पर 18 फीसदी जीएसटी का भुगतान करते हैं, जबकि ग्राहकों से केवल पांच फीसदी जीएसटी वसुला जाता है, जिसके परिणाम स्वरूप अप्रयुक्त इनपुट कर का महत्वपूर्ण संचय होता है, वर्तमान में अधिकांश् मामलों में रिफंड जीएसटी कटौती लंबे समय से बकाया है, जिससे कार्यशील पूंजी पर दवाब और उधार बढ़ रहा है।
– सरकार को मेडिकल उपकरणों की कमी की अफवाहों पर भरोसा कर आयातित शुल्क कम नहीं करना चाहिए। जबकि इसके विपरित मेडिकल इंडस्ट्री को सहयोग देना चाहिए, सरकार चिकित्सा उपकरणों के लिए कच्चे माल के आयात पर तीन महीने के लिए 2.5 प्रतिशत की अस्थाई छूट और घटकों के आयात पर पांच प्रतिशत की अस्थाई छूट प्रदान कर सकती है, जो चैप्टर 90 के अंतर्गत आते हैं।

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