
स्टेपल फूड फोर्टिफिकेशन के लिए एफएमसीजी कंपनियों और नीति निर्माताओं द्वारा उद्योग जगत के नेताओं का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया
नई दिल्ली, सेहत संवाददाता
कुपोषण को दूर करने के लिए भारत सरकार द्वारा पोषण अभियान सहित कई राष्ट्रीय कार्यक्रम संचालित कर रखे हैं, वहीं कुपोषण मुक्त भारत में प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों ने भी अपनी भागीदारी मजबूत करते हुए फोर्टिफायड फूड्स को बढ़ावा देने की बात की है। लंबे समय से उद्योग जगत तेल, आटा, चावल, दालें आदि खाद्य उत्पादों की न्यूट्रिशनल वैल्यू बढ़ाने के लिए फार्टिफेकेशन की पैरवी कर रही हैं। इसी विषय पर एफएमसीजी कंपनियों के जानेमाने उद्योगपति इडिया हैबिटेट सेंटर में एकजुट हुए। जिसमें फोर्टिफायड फूड की चुनौतियां, कंपनियों की भागीदारी, डिस्ट्रिब्यूटरशिप, मार्जिन यानि मुनाफा व मार्केटिंग की चुनौतियां आदि पर चर्चा की गई।
टेकनोसर्व की दीप्ति गुलाटी ने कहा कि वर्ष 2011 में हमने राजस्थान के कुछ जिलों में पीडीएस यानि पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम में फोर्टिफायड फूड का वितरण शुरू किया, इसके बाद नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे तीन और चार में कुपोषण में कमी देखी गई, लेकिन कुछ समय बाद ही व्यवहारिक दिक्कतों की वजह से फोटिफायड फूड को पीडीएस योजना से हटाना पड़ा, दीप्ति गुलाटी ने कहा कि दरअसल सरकार को भी पता है कि फोर्टिफिकेशन से कुपोषण को दूर किया जा सकता है, क्योंकि फोर्टिफायड फूड सभी जरूरी मिनिरल्स, प्रोटीन और विटामिन का संतुलित मिश्रण होते हैं, लेकिन अपने देश में अभी इसकी अनिवार्यता नहीं है कि सभी एफएमजी कंपनियां फोर्टिफिकेशन को अनिवार्य रूप से अनुपालन करें, लेकिन विशेषज्ञ के तौर पर हम यह मानते हैं कि खाद्य निर्मामा कंपनियां को इसे स्वेच्छा से लागू करना चाहिए, जिससे सभी को संतुलित और पोषणयुक्त आहार मिल सके।
डीएसएम एफ के ग्लोबल बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर श्रीधर एनबी ने बताया कि खाद्य तेल इंडस्ट्री की बात करें तक 60 मिलियन मिट्रिक टन के खाद्य तेल बाजार में पॉम ऑयल, सोया ऑयल और सनफ्लावर ऑयल की भागीदारी है, जिसमें हम सीड ऑयल पर अधिक जोर देते हैं, क्योंकि पॉम ऑयल की न्यूट्रिशिनल वैल्यू सीड्स ऑयल से अपेक्षाकृत कम हैं, लेकिन लागत और मार्जिन की वजह से अधिकांश खाद्य तेल निर्माता कंपनियां न्यूट्रिशिनल वैल्यू के मानकों का पालन नहीं कर पाती, खाद्य तेल की गुणवत्ता को बरकरार रखने के लिए एफएसएसआई ने वर्ष 2011 में ड्राप्सी रोग फैलने के बाद खुले तेल की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी, लेकिन दूरदराज में अब भी लूज में तेल बेचा जा रहा है। श्रीधर ने कहा कि अफ्रीका इस मामले में सबसे आगे हैं जहां 70 प्रतिशत खाद्य उत्पादों का फोर्टिफेकेशन पूरी कर लिया गया है। इसमें प्रीमिक्स का भी अहम योगदान होता हैं, जिसकी न्यूट्रिशिनल वैल्यू को मानक के अनुसार तय किया जाना चाहिए। हालांकि जाने वाले उद्योगपतियों ने इसकी चुनौतियों पर भी ध्यान दिया, जिसमें कहा गया कि लोगों की मानसिकता, लाभांश और प्रतिस्पर्धा के बीच न्यूट्रिशन को बनाए रखना खासा चुनौतिपूर्ण है।
टेक्नोसर्व द्वारा संचालित मिलर्स फॉर न्यूट्रिशन ने, CII फूड एंड एग्रीकल्चर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CII FACE) के सहयोग से नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित मुख्य खाद्य पदार्थ उद्योग नेताओं का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। जिसमें मुख्य खाद्य पदार्थों के फोर्टिफिकेशन को बड़े स्तर पर बढ़ाने हेतु रोडमैप विकसित करने के लिए में प्रमुख नीति-निर्माताओं, खाद्य उद्योग के नेताओं, मिलर्स, पोषण विशेषज्ञों और विकास क्षेत्र के हितधारकों को एकत्रित किया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए, टेक्नोसर्व के सीनियर प्रैक्टिस लीडर एवं मिलर्स फॉर न्यूट्रिशन एशिया के प्रोग्राम लीडर श्री मोनोजित इंद्रा ने कहा, “भारत ने मुख्य खाद्य पदार्थों के फोर्टिफिकेशन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है, इस सम्मेलन ने फोर्टिफाइड मुख्य खाद्य पदार्थों को अपनाने में तेजी लाने और पोषण प्रभाव के लिए टिकाऊ मार्ग तैयार करने हेतु उद्योग नेताओं, विकास भागीदारों और नीति-निर्माताओं के बीच मजबूत समन्वय स्थापित करने में मदद की है।”
राष्ट्रीय सम्मेलन का एक प्रमुख परिणाम यह रहा कि सभी प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से यह स्वीकार किया कि खाद्य फोर्टिफिकेशन को एक नीति-आधारित हस्तक्षेप से आगे बढ़कर नवाचार, उपभोक्ता सहभागिता और मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र साझेदारियों द्वारा समर्थित मुख्यधारा के उद्योग आंदोलन के रूप में विकसित होना चाहिए।
इस पहल के महत्व और परिणामों पर टिप्पणी करते हुए, मिलर्स फॉर न्यूट्रिशन इंडिया के कंट्री प्रोग्राम मैनेजर श्री अभिषेक शुक्ला ने कहा, “सम्मेलन में हुई चर्चाओं ने पुनः पुष्टि की कि फोर्टिफिकेशन भारत में पोषण सुरक्षा को मजबूत करने में परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकता है। सम्मेलन में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के निदेशक (विज्ञान एवं मानक) डॉ. राकेश कुमार, CII राष्ट्रीय पोषण समिति के पूर्व सह-अध्यक्ष श्री सिराज ए. चौधरी, AWL एग्री बिजनेस के अनुसंधान एवं विकास प्रमुख श्री विद्याशंकर सत्यकुमार, मदर डेयरी फ्रूट एंड वेजिटेबल्स के प्रबंध निदेशक श्री जे टी चारी, तथा द अक्षय पात्र फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री भारतारसभा प्रभु सहित वरिष्ठ सरकारी प्रतिनिधियों और उद्योग नेताओं ने भाग लिया।
चर्चाओं में मुख्यधारा के पैकेज्ड खाद्य उत्पादों में पोषण को एकीकृत करने तथा दीर्घकालिक जनस्वास्थ्य प्रभाव प्रदान करने में सक्षम व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य फोर्टिफिकेशन समाधानों को बड़े स्तर पर बढ़ाने में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया गया।