दिल्ली के इस कॉलेज में शुरू हुआ मासिक धर्म स्वास्थ्य पर सर्टिफिकेट कोर्स

Indraprastha College for Women (IPCW), University of Delhi, in collaboration with the UNESCO Regional Office for South Asia, launched Empower Flow: A Certificate Course for Menstrual Health & Hygiene
Indraprastha College for Women (IPCW), University of Delhi, in collaboration with the UNESCO Regional Office for South Asia, launched Empower Flow: A Certificate Course for Menstrual Health & Hygiene

 

इन्द्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय और यूनेस्को ने मासिक-धर्म स्वास्थ्य पर भारत का पहला सर्टिफिकेट कोर्स लॉन्च किया

नई दिल्ली, सेहत संवाददाता

मासिक धर्म स्वास्थ्य को बढ़ावा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए, दिल्ली विश्वविद्यालय के इंद्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय ने यूनेस्को के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय कार्यालय के सहयोग से “एम्पॉवर फ्लो: स्पॉटलाइट रेड” नामक सर्टिफिकेट कोर्स का शुभारंभ किया। इस अनूठी पहल के साथ, इन्द्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता पर एक शैक्षणिक पाठ्यक्रम शुरू करने वाला भारत का पहला संस्थान बन गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महिला गरिमा और सशक्तीकरण के विजन के अनुरूप, इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रमुख गणमान्य व्यक्ति सम्मिलित हुए। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती नयना सहस्रबुद्धे (उपाध्यक्ष, भारतीय स्त्री शक्ति) रहीं। उनके साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में स्वीडन से लीना बैकर और जॉयस पोअन (शिक्षा क्षेत्र प्रमुख, यूनेस्को नई दिल्ली) उपस्थित रहीं। यूनेस्को नई दिल्ली की डॉ. हुमा मसूद ने भी विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इस कार्यक्रम का सफल आयोजन महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. पूनम कुमरिया के नेतृत्व में किया गया, जिसकी समन्वयक डॉ. चेतना गुप्ता रहीं।

मासिक धर्म से जुड़ी रूढ़ियों, सामाजिक वर्जनाओं और जानकारी के अभाव को दूर करने के लिए तैयार किया गया यह पाठ्यक्रम स्वास्थ्य, शिक्षा और लैंगिक दृष्टिकोण को एक साथ लाता है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को ज्ञान और संवेदनशीलता से लैस करना है ताकि वे समाज में नेतृत्व कर सकें और मासिक धर्म समानता पर सार्थक चर्चा को आगे बढ़ा सकें।

इस मुद्दे की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए, प्राचार्या प्रो. पूनम कुमरिया ने कहा कि मासिक धर्म के प्रति जागरूकता और संसाधनों की कमी आज भी कई युवतियों की शिक्षा में बाधा बनती है। मुख्य अतिथि श्रीमती सहस्रबुद्धे ने इसे एक स्वाभाविक प्रक्रिया के रूप में सामान्य बनाने और इस पर खुलकर संवाद करने का आह्वान किया। वहीं जॉयस पोअन ने इसे सार्वजनिक शिक्षा का एक अनिवार्य हिस्सा बताया और डॉ. हुमा मसूद ने मासिक धर्म स्वास्थ्य को संस्थागत प्रणालियों व नीतिगत ढांचे में शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया।

देश भर के अन्य महाविद्यालयों और समुदायों तक पहुँचने की योजना के साथ, यह पहल समावेशी प्रथाओं और जागरूक समाज के निर्माण की ओर एक बड़ा कदम है। इन्द्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय और यूनेस्को की यह साझेदारी लैंगिक-संवेदनशील शिक्षा और युवा कल्याण के साझा लक्ष्यों को दर्शाती है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *