
- क्या नो शुगर डायट को कहा जा सकता है सही डायट, क्या है सही अनुपात
- विशेषज्ञों की राय, शुगर शरीर के लिए क्यों और कितनी जरूरी होती है
नई दिल्ली, सेहत संवाददाता
हाल ही में सिने अभिनेता जितेन्द्र कुमार ने अपनी फिटनेट से जुड़ी कई बातें सोशल मीडिया पर साझा की, 84 साल की उम्र में भी फिट रहने के पीछे उन्होंने व्यायाम, मेडिटेशन और सही डायट के साथ ही शुगर यानि चीनी का इस्तेमाल नहीं करने को बताया, जी हां जितेन्द्र ने कहा कि वह पीछे 27 साल से नो शुगर डायट पर हैं, जितेन्द्र के इस बयान ने काफी लोगों का ध्यान खींचा है, खासकर ऐसे वर्ग जो वजन कम करना चाहते हैं, बढ़ती उम्र में भी फिट रहना चाहते हैं या फिर जो अपनी सेहत को लेकर सजग हैं। दरअसल चीनी, नमक, चावल और तेल को लेकर लंबे समय से यह बहस चली आ रही है कि सेहत के लिए सबसे पहले किसको अपने खाने की थाली से अलग करना चाहिए, इससे पहले भी कुछ ऐसे शोध सामने आए हें, जिसमें चीनी को तेल से भी अधिक नुकसान देह बताया गया है। इस लेख में हम इसबात को समझने की कोशिश करेंगें कि चीनी सही मायने में कितनी सही?
विशेषज्ञों की मानें तो फिट रहने का कोई एक मंत्र नहीं है, बल्कि यह कई आदतों का एक खुबसूरत गुलदस्ता है, जिसमें से किसी एक आदत को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जितेन्द्र की फिटनेस में संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, कुछ जेनेटिक वजहें, और निरंतर अभ्यास को अहम बताया गया है। लेकिन इसका यह अर्थ कतइ नहीं निकाला जा सकता कि नो शुगर- परफेक्ट हेल्थ, आइए इसे थोड़ा बारिकी से समझते हैं,
शुगर का हमारे शरीर में क्या काम है?
शुगर का सेवन करते ही रक्त साथ मिलकर यह शरीर में तेजी से इंसुलिन बढ़ाती है, यह हमें अस्थाई उर्जा स्पार्क यानि उर्जा का प्रवहन करती है। इसी वजह से चीनी या शुगर इंटेक के बाद लोग कुछ समय तक तो एनजेर्टिक महसूस करते हैं, लेकिन कुछ समय बाद दोबारा थका थका महसूस करते हैं, वहीं शुगर इंटेक या शुगर का सेवन करने के कुछ दीर्घकालीन प्रभाव भी हैं, यह टाइप टू डायबिटिज की वजह, कमर की चर्बी बढ़ाने या फिर मोटापा बढ़ाने में कारगर होने के साथ ही हृदयघात, डेंटल समस्याएं या फिर प्री डायबिटिक स्टेज को भी बढ़ा सकती है। संक्षेप में चीनी की अधिकता घातक हैं न कि केवल चीनी।
क्या फिट रहने के लिए चीनी को पूरी तरह छोड़ देना चाहिए?
अब प्रश्न यह उठता है कि चीनी की अधिकता से होने वाले नुकसान को देखते हुए क्या चीनी का सेवन पूरी तरह त्याग देना चाहिए? नहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा बिल्कुल भी सही नहीं है, दरअसल चीनी की अपनी तीन तरह की स्थितियां होती है, जिन्हें अच्छी तरह समझना जरूरी है।
प्राकृतिक चीनी
दूध, फल, संपूर्ण आनाज और फाइबर आदि से मिलने वाली शुगर को नैचुनल शुगर कहा जाता है, प्राकृतिक चीनी को हेल्दी माना गया है, जिसका सेवन सामान्य परिस्थितयों में सामान्य व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है।
एडेड शुगर दूसरी श्रेणी में एडेड शुगर को शामिल किया जाता है, स्वीट्स, डेजर्टस जैसे आइसक्रीम, केक, पेस्ट्री, साफ्ट मिल्क आदि में पाई जाने वाली चीनी को एडेड शुगर कहा जाता है, परेशानियों इसके सेवन या इसके अधिक सेवन से शुरू होती है, क्योंकि यह तेजी से ब्लड में शुगर स्पाइक को बढ़ा देता है।
शुगर इंटेक का क्या फार्मुला होना चाहिए?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार नियमित ली जाने वाली प्रस्तावित कैलोरी, उम्र और वजन के हिसाब से दस प्रतिशत से कम का हिस्सा चीनी का होना चाहिए, जबकि आदर्श स्थिति में केवल पांच प्रतिशत का प्रयोग ही सही बताया गया है। पुरूषों के लिए नियमित 25 से 35 ग्राम से कम और महिलाओं के लिए 20 से 25 ग्राम से कम चीनी का सेवन करना आदर्श स्थिति बताया गया है। अब परेशानी इसलिए पैदा होती है कि चीनी केवल चीनी में न होकर अन्य कई प्रीजरवेटिव चीजों में भी होती है, जिसे ग्लाइसेमिक इंडेक्स के नाम से जानते हैं, यह भी शुगर स्पाइक में सहायता करती है।
जीरो शुगर नहीं है सही
जीरो शुगर की जगह हमें डायट में स्मार्ट शुगर हैबिट को अपनाना चाहिए, मसलन रोजना एडेड शुगर जैसी स्वीट्स या डेजर्ट आदि के सेवन से बचें, एडेड शुगर को कभी कभी लिया जा सकता है, बिस्कुट, सॉस, जूस आदि उत्पादों में हिडेन शुगर होती है, इसका भी ध्यान रखें, विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक नो शुगर डायट के कई नुकसान हो सकती हैं।
जरूरी है शरीर के लिए शुगर
सामान्य व्यक्ति के ब्लड ग्लूकोज को संतुलित बनाए रखने के लिए चीनी जरूरी मानी गई है, इसकी अधिकता पर प्रश्न किया जा सकता है, लेकिन जीरो शुगर बिना किसी मेडिकल कंडियन या चिकित्सीय सलाह के खुद पालन नहीं करना चाहिए, जबकि वजन कम करने के लिए तो बिल्कुल भी नहीं, शुगर अपने आप में जहर नहीं है, अधिक और अनियंत्रित सेवन से नुकसान अधिक देखे गए है। संयमित जीवन शैली से फिटनेस को हासिल किया जा सकता है न कि किसी भी एक जरूरी चीज का पूरी तरह बहिष्कार करके।
नोट- जानकारी, लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल की पूर्व डायटिशियन डॉ किरन दीवान से की गई बातचीत पर आधारित