एनीमिया की शिकार महिला का गर्भाश्य निकाला, अब देना होगा 30 लाख रुपए जुर्माना, उपभोक्ता फोरम ने सुनाया अहम फैसला

The uterus of a woman suffering from anemia was removed, now a fine of 3 million rupees will have to be paid, the consumer forum has delivered an important verdict
The uterus of a woman suffering from anemia was removed, now a fine of 3 million rupees will have to be paid, the consumer forum has delivered an important verdict

नई दिल्ली, सेहत संवाददाता

मेडिकल नेगलिजेंस यानि इलाज के दौरान लापरवाही का एक नया मामला सामने आया है। एनीमिया की शिकार 51 वर्षीय महिला के गर्भाश्य और बच्चेदानी को निकाल दिया गया, जिसे चिकित्सीय भाषा में हिस्टेक्टमी का ऑपरेशन कहते हैं, इसके बाद महिला को किडनी और यूरिन संबंधी कई तरह की परेशानियां हो गई और सर्जरी के दो दिन बाद महिला की मौत हो गई। मामले पर हैदराबाद डिस्ट्रिक डिस्पयूट रिड्रेसल कमिशन ने अस्पताल और महिला रोग विशेषज्ञ पर 30 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है।

दरअसल बात 2021 की है, 51 वर्षीय महिला पीरियड्स के दौरान दर्द, क्लॉटिंग और अनियमित मासिक धर्म की शिकायल लेकर अस्पताल पहुंची थी। मेडिकल परीक्षण के बाद चिकित्सक ने लैप्रोस्कोपिक हिस्टेक्टमी की सलाह दी, जिसमें बिना चीरा लगाए महिला के गर्भाश्य और बच्चेदानी को निकालने की बात कही गई। महिला को एनीमिक यानि 8.4 ग्राम हीमोग्लोबिन होने के बाद भी सर्जरी के लिए फिट माना गया। सर्जरी के बाद महिला को आगे के इलाज के एसआईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया, उसी रात महिला की तबियत अधिक खराब हो गई महिला का बीपी बहुत लो हो गया, इसके साथ ही प्लेटलेट्स काउंट भी काफी गिर गया। महिला को पेशाब करने में भी दिक्कत हो रही थी। दोबारा की गई ब्लड रिपोर्ट से पता चला कि अत्यधिक ब्लीडिंग की वजह से वायटल ऑर्गन यानि लिवर और किडनी ने काम करना बंद कर दिया है। इसी वजह से महिला को ज्वाइंडिस हुआ और उसे पेशाब करने में दिक्कत हो रही थी। पेल्विक यानि पेट के निचले हिस्से में लगातार खून का थक्का और पेशाब रूके होने की वजह से महिला की मौत हो गई। जिला कोर्ट ने अस्पताल सहित महिला रोग विशेषज्ञ को मामले में दोषी पाया और 30 लाख रूपए जुर्माने के तौर पर देने का आदेश पारित किया गया। छह साल तक कानूनी लड़ाई के बाद फैसला पति के हक में आया।

जागरूकता संदेश- बच्चेदानी निकालने का ऑपरेशन हिस्टेक्टमी कहलाता है, अकसर ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं की सहमति बिना इसे कर दिया जाता है, जिससे कई बार फायब्रायड, यूटे्रस में सूजन आदि की वजह बताई जाती है। अकसर बच्चे के जन्म के बाद अधिक मात्रा में होने वाली ब्लीडिंग को रोकने के लिए बच्चेदानी निकाल दी जाती है, जो महिला के स्वास्थय पर बाद में काफी हानिकारक प्रभाव डालती है। बच्चेदानी निकालने का ऑपरेशन चार चरण में होता है, जिसे पार्शियल आधा, टोटल यानि पूरी, रेडिकल और ओवेरियन और पेलविक ट्यूब को निकालना भी शामिल होता है। इसलिए ऐसी किसी भी सर्जरी से पहले अच्छी तरह मरीज की मेडिकल हिस्ट्री को समझ लेना चाहिए।

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