क्या संभव है मुफ्त विश्वस्तरीय इलाज? बढ़ते मेडिकल खर्चों के बीच उम्मीद की किरण बना कर्नाटक का यह अस्पताल

Is completely free and world-class treatment possible? Amid rising medical costs, this hospital in Karnataka has become a ray of hope.
Is completely free and world-class treatment possible? Amid rising medical costs, this hospital in Karnataka has become a ray of hope.
  • श्री मधुसूदन साईं इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस एंड रिसर्च के अस्पताल परिसर में कहीं भी नहीं बिलिंग काउंटर, देशभर से मरीज पहुंचते हैं यहां इलाज के लिए

नई दिल्ली, सेहत संवाददाता

नेशनल हेल्थ एकाउंट सर्वे वर्ष 2022-23 के अनुसार भारत सरकार प्रति नागरिक स्वास्थ्य पर 3,169 रूपए सालाना खर्च करती है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार की भागीदारी (केंद्र 264 रुपए प्रतिमाह व राज्य सरकारें 8.70 रुपए प्रतिदिन) होती है। ऐसे में निम्न आयवर्ग के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीद लगाना चुनौतीपूर्ण है। आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना के लागू होने के बाद आउट ऑफ पॉकेट एक्सपेंडिचर (ओओपीई) यानि इलाज में जेब से होने वाले खर्च में कुछ कमी आई बावजूद इसके मेडिकल उपकरण और दवाओं पर होने वाला खर्च एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

देशभर में आरोग्य मंदिर की पहुंच और आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना की वजह से वर्ष 2012-13 के अनुपात में आउट ऑफ पॉकेट एक्सपेंडिचर (ओओपीई) की स्थिति में बदलाव हुआ है। वैश्विक स्तर पर देखे तो पाकिस्तान (84 डॉलर), नेपाल, (180) बांग्लादेश (130) और श्रीलंका (246)के एवज में भारत में प्रति व्यक्ति इलाज के खर्च पर जेब से 121 डॉलर खर्च करता है। ओओपीई में भारत दुनिया भर में 64वें स्थान पर आता है। ऐसे में यदि कोई संस्थान बिना बिल व बिना शुल्क के विश्वस्तरीय चिकित्सा सेवा उपलब्ध करता तो वह भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था में एक अनूठा मॉडल बन सकता है।

बात करें कर्नाटक की तो सात करोड़ जनसंख्या वाले राज्य में सरकार 18,690 करोड़ रुपए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण पर खर्च करती है। इस आधार पर राज्य सरकार प्रति व्यक्ति सालाना 2700 रुपए इलाज पर खर्च करती है, जिसमें बीमारियों से बचाव, अस्पतालों के निर्माण वैक्सीन, स्वास्थ्य शिक्षा, स्वास्थ्य बीमा आदि सुविधाएं शामिल है। हालांकि राज्य में आयुष्मान भारत जनआरोग्य योजना को राज्य में इंटीग्रेटेड आयुष्मान भारत आरोग्य कर्नाटक के नाम से संचालित की जा रही है। जिसके तहत प्रत्येक परिवार को सालाना पांच लाख रुपए का कैशलेस इलाज मिल रहा है, बावजूद इसके प्रति व्यक्ति आउट ऑफ पॉकेट खर्च को खत्म नहीं किया जा सका। ऐसा तब ही संभव है जबकि कोई अस्पताल बिना शुल्क इलाज के लिए आगे आए।

बिलिंग काउंटर के बिना अस्पताल!

व्यवहारिक रूप से यदि देखा जाएं तो यह सोचना भी संभव नहीं कि किसी अस्पताल में बिलिंग काउंटर ही नहीं बनाया गया हो, एम्स जैसे सरकारी अस्पताल भी सब्सिडी के आधार पर इलाज व उपकरणों की कीमत में रियायत या छूट देते हैं। लेकिन कर्नाटक के चिक्कबल्लारपुर जिले के मुद्देनहल्ली गांव ने बीते एक दशक में स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय पहचान बनाई है। यहां देश का पहला ऐसा अस्पताल देखने को मिला जहां विश्वस्तरीय मेडिकल सुविधाएं बिना किस शुल्क के दी जा रही है, नवजात शिशु केयर हो, दिल का वाल्व प्रत्यारोपण या फिर घुटने की सर्जरी किसी भी विभाग में इलाज कराने का खर्च जीरो, करना केवल इतना होता कि नि:स्वार्थ भाव से मिले इलाज के बदले अस्पताल में अपनी सेवा का योगदान दीजिए, जो आप अपनी क्षमता के अनुसार चुन सकते हैं।

क्या अमीर क्या गरीब, इस अस्पताल की ओपीडी में इलाज के साथ ही दुआएं भी मिलती हैं, इलाज के लिए इंतजार की लाइन लंबी नहीं लगती, जबकि यह तय हो कि अस्पताल में कदम रखने से पहले पॉकेट नहीं देखनी पड़ेगी, केवल इलाज ही नहीं श्री मधुसूदन साईं इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस एंड रिसर्च  देश का पहला निशुल्क निजी ग्रामीण मेडिकल कॉलेज हैं, जहां इलाज के किसी भी प्रोसिजर, ओपीडी या जांच के लिए शुल्क नहीं लिया जाता। स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण इस तीन लक्षयों को साधने वाले श्री मधुसूदन साईं ग्लोबल ह्यूमेनटेरियन मिशन के तहत जरूरतमंद बच्चों की स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण के सेवा कार्य में लगा है। इसी मिशन के तहत 160 एकड़ क्षेत्र में फैले मिशन के परिसर में देश के पहले निशुल्क ग्रामीण निजी मेडिकल कॉलेज शुरू किया गया है, नेशनल मेडिकल कमिशन से मान्यता प्राप्त इस मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों से किसी तरह की फीस नहीं ली जाती, यहां केवल छात्र डॉक्टर बनकर नहीं निकलते, बल्कि मानवीय मूल्यों के साथ ऐसे व्यक्तित्व का निर्माण करके निकलने है जो उन्हें एक बेहतर डॉक्टर बनने के साथ ही एक बेहतर इंसान बनने में मदद करते हैं। 600 बेड वाले स्टेट ऑफ आर्ट हॉस्पिटल का वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा औपचारिक अनावरण किया गया। हाल ही में इंफोसिस की सीएसआर (सोशल कोऑरेटिव रिस्पांसबिलिटी) के तहत श्री मधुसूदन साईं इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च मिशन द्वारा वैश्विक स्तर अभी तक 50 लाख से अधिक मरीजों ने ओपीडी सुविधा का लाभ उठाया है।

सामूहिक प्रयास और दान से संभव हुआ मिशन

वसुधैव कुंटुबंकम के तहत सत्य साईं बाबा के प्रेरणा से स्वास्थ्य शिक्षा और पोषण के लक्ष्य को पूरा करने में जुटे श्री मधुसूदन साईं ग्लोबल ह्यूमेंटेरियन मिशन का विस्तार आज सौ से अधिक देशों में हो चुका है। अस्पताल की एक दीवार पर इस मिशन में सहयोग देने वालों के नाम भी लिखे हैं, जिसमें सिंगापुर, भारत, अर्जेंटिना, श्रीलंका, मलेशिया, इटली, कनाडा, डेनमार्क, हांगकांग, नीदरलैंड, टर्की, ग्रीस आदि शामिल हैं।

A Neonatal Child Care Centre was inaugurated on 19 June 2025 under the CSR initiative of Infosys."
A Neonatal Child Care Centre was inaugurated on 19 June 2025 under the CSR initiative of Infosys.”

 

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