
Nourishing Tomorrow: How One World One Family Mission is fighting the World’s Invisible Hunger Crisis
नई दिल्ली, सेहत संवाददाता
जब कभी भी भूख की बात होती है तो अकसर हमारे दिमाग में खाली पेट और मायूस चेहरों के बच्चों की तस्वीर उभरती है। लेकिन बात अकसर भूख को मिटाने की होती हैं, शरीर और मस्तिष्क के विकास के लिए जरूरी पोषण तत्वों का क्या, इस पर कभी किसी का ध्यान ही नहीं जाता है। दुनिया भर में लाखों बच्चों को भूख मिटाने के लिए खाना उपलब्ध नहीं है, ऐसे में पोषण की बात कौन करेगा? यही वजह है कि किसी तरह भूख मिटाने के बाद भी विकास के लिए जरूरी पोषक तत्वों की कमी को पूरा करना एक गंभीर प्रश्न बन जाता है, इसे छिपी हुई भूख या फिर हिडन हंगर के नाम से जाना जाता है।
पारंपरिक भूख क अपेक्षा हिडन हंगर हमेशा दिखाई नहीं देती, पेट भरे बच्चों के चेहरे तो दो पल के लिए हंसते हुए दिखाई देते हैं, लेकिन वह खुद इस बात से अनभिज्ञ होते हैं कि जो खाना उन्होंने भूख मिटाने के लिए खाया उसमें न्यूट्रिशनल वैल्यू या शरीर के लिस जरूरी पोषक तत्व कितने थे या थे भी कि नहीं? सामान्य रूप से देखने पर ऐसे बच्चे स्वस्थ्य दिखते हैं, लेकिन आयरन, जिंक, आयोडीन और अन्य जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट की कमी उसके मस्तिष्क के विकास, रोग प्रतिरोधक क्षमता और संपूर्ण स्वास्थ्य पर असर डालती है। जिसका असर जीवन पर्यन्त रहता है। पोषक तत्वों की कमी पूरी नहीं होने पर बच्चे पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाते, रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर बार बार बीमार पड़ते हैं इसके साथ ही व्यस्क होने पर उनकी उत्पादकता भी कम होती है।
बव्चों के विकास के लिए जरूरी और एक बेहतर मानव विकास को देखते हुए वन वल्र्ड वन फैमिली मिशन के तहत श्री सत्य साईं अन्नपूर्ण कार्यक्रम का संचालन शुरू किया, जिससे कुपोषण और हिडन हंगर की वैश्विक समस्याओं को दूर किया जा सके। वसुधैव कुटंभंकम की विचारधारा से प्रेरित इस मिशन को कुपोषण दूर करने का विश्व का सबसे बड़ा मिशन कहा जाता है। जिसका यह मानना है कि भौगौलिक और आर्थिक परिस्थितियां अलग होते हुए भी हर बच्चा सामान अवसर का हकदार है, जिससे उसे बेहतर विकास और एक बेहतर व्यक्तित्व का निर्माण हो सके।
छिपी हुई भूख यानि हिडन हंगर समस्या की जड़ तक पहुंच
सदियों से भूख को दूर करने के लिए खाने की उपलब्धता पर ही जोर दिया गया, हालांकि अब आहार विशेषज्ञ इस बात पर जोर दे रहे हैं कि केवल भूख को दूर करना समस्या का हल नही है, हिडन हंगर की समस्या के सभी पहलूओं पर गौर करना होगा जिससे वर्तमान के बच्चों को एक बेहतर मानवीय जीवन दिया जा सके। बच्चों को सामान विकास के लिए न्यूट्रिशन और संतुलित आहार की जरूरत है, जो उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जरूरी हैं। खाने और पोषण की जरूरत के बीच के इस अंतर को पाटने के लिए साईंस्योर की शुरूआत की गई, जिसे एक फार्मुलेटेड न्यूट्रिशन हेल्थ सप्लीमेंट के तौर पर बनाया गया, विशेष से बढ़ती उम्र के बच्चों और स्कूल जाने वाले बच्चों की पोषण जरूरतों को देखत हुए इस सप्लीमेंट सभी जरूरी पोषण तत्वों को शामिल किया गया, जिसे पानी या फिर दूध के साथ मिक्स करके लिया जा सकता है। साईं स्योर बच्चों के रोजाना की पचास प्रतिशत न्यूट्रिशन जरूरतों को पूरा कर देता है। यह केवल एक सप्लीमेंट नहीं है बल्कि बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी में जरूरी इंटिग्रेटेड पोषक तत्वों को दूर करने की एक विकसित योजना है। जरूरी पोषक तत्वों की कमी को दूर कर साईं स्योर के माध्यम से बच्चे पढ़ने में बेहतर हो रहे हैं, इसके साथ ही उनके मानसिक विकास और एकाग्रता भी बेहतर देखी गई।
एक हेल्दी सुबह की शुरूआत साईं स्योर के साथ
इस मिशन का मुख्य लक्ष्य सप्लीमेंट के साथ बच्चों की एक हेल्दी सुबह की शुरूआत करना है। इस मिशन के तहत आज दुनियाभर के 10 मिलियन बच्चों को हर सुबह स्कूल जाने से पहले हेल्दी ड्रिंक दिया जा रहा है, इसमें भारत के बच्चे भी शामिल हैं। मिशन को 150,0000 सरकारी स्कूल और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की मदद से संचालित किया जा रहा है। मिशन की पहुंच ऐसे क्षेत्रों तक हो गई जहां उन्हें पोषक युक्त सप्लीमेंट मिलना काफी चुनौतीपूर्ण था। इसका एक मात्र मकसद यही रखा गया कि बच्चों को स्कूल जाने से पहले अपने दिन की शुरूआत एक हेल्दी सप्लीमेंट के साथ करनी चाहिए, जिससे वह पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। मिशन के परिणाम काफी संतोषजनक रहे हैं, अध्यापिकाओं के फीडबैक के अनुसार सप्लीमेंट का सेवन करने वाले बच्चे अब अधिक जागरूकता और एकाग्रता के साथ पढ़ाई कर रहे हैं, परीक्षा में उनका प्रदर्शन भी बेहतर हुआ है।
बच्चों के पोषण का एक वैश्विक मिशन
भारत में शुरू हुआ यह प्रयास आज एक वैश्विक मिशन का रूप ले चुका है। अन्नपूर्णा मॉडल से प्रेरित कई अन्य देश जैसे इंडोनेशिया, थाईलैंड, नाइजीरिया, मलावी, श्रीलंका और ऑस्ट्रिया में भी इसकी शुरूआत हो चुकी है। मिशन के लिए सरकारी और शैक्षणिक संस्थाओं के साथ भी साझेदारी की गई है। विभिन्न देशों की सांस्कृतिक मान्यताएं अलग होने के बावजूद पोषक की कमी को दूर करने के इस अभियान को हर देश ने खुले दिल से स्वीकार किया।
बच्चे ही नहीं समुदायों को सम्मान के साथ भोजन देना
वन वल्र्ड, वन फैमिली का यह मिशन केवल स्कूल जाने वाले बच्चों तक सीमित नहीं है। दुनियाभर के ऐसे परिवार जो गरीबी की वजह से खाने के लिए मोहताज हैं, उनके लिए मिशन द्वारा फीड द वल्र्ड पहल की शुरूआत की गई। इस कार्यक्रम के तहत पोषण युक्त आहार बेघर, बुजुर्ग सिटिजन, परिवार से अलग हुए और समाज की मुख्य धारा से अलग समुदायों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसे स्वयं सेवकों, स्थानीय सरकार और सामजिक प्रयास से जरूरतमंद तक पहुंचाया जाता है। मिशन का मुख्य उद्देश्य यह है कि जरूरमंद सभी लोगों को पूरे सम्मान के साथ खाना पहुंचाया जाए। शहरी क्षेत्र हो या फिर ग्रामीण फीड द वल्र्ड यह संदेश देता है कि जब लक्ष्य को पूरा करने का जज्बा सामुहिक प्रयास के साथ जुड़ जाता है तो जमीनी स्तर पर उद्देश्य पूर्ण बदलाव संभव हो जाते हैं।
भविष्य का लक्ष्य कोई खाली पेट न सोए
मिशन का दूरगामी लक्ष्य रोजाना दस मिलियन स्कूली बच्चों तक पहुंचना है। हालांकि सतत न्यूट्रिशन कार्यक्रम का उद्देश्य विश्व भर में 80 मिलियन बच्चों तक पहुंचना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए इनोवेशन यानि नवाचार, सहभागिता और निस्वार्थ प्रतिबद्धता की आवश्यकता होगी। हालांकि मिशन इस बात में विश्वास रखता है कि जब मानवता एक साथ एक परिवार के रूप में जुड़ती है जब कठिन से कठिन लक्ष्य भी प्राप्त किया जा सकता है। पूरे विजन का सार इस एक लाइन में छिपा है कि, किसी एक भी खाली पेट न सोने दिया जाए जो अपने आप में काफी सारगर्भित वाक्य है।
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