
- उत्तम नगर निवासी दंपति राहुल राठौर और मीनू राठौर ने ग्रेटर कैलाश के एससीआई सेंटर पर कराया जा आईवीएफ ट्रीटमेंट
नई दिल्ली, सेहत संवाददाता
दिल्ली के उत्तम नगर निवासी एक दंपति आईवीएफ स्कैम के शिकार हो गए है, दंपति ने बायोलॉजिकल प्रोपर्टी यानि एब्रायो का गलत इस्तेमाल, आईवीएफ इलाज में धोखाधड़ी, मेडिकल फॉड सहित आईवीएफ सेंटर पर गई गंभीर आरोप लगाए है। मामले पर थाना ग्रेटर कैलाश में भारतीय न्याय संहित बीएनएस के तहत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। शुक्रवार देर शाम तक दंपति डिफेंस कॉलोनी पुलिस न्याय की उम्मीद में बैठे रहे। वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने एआरटी सरोगेसी रेगुलेशन एक्ट 2021 के तहत राहुल राठौर और पत्नी मीनू राठौर को सचिवालय बुलाया गया।
मामला शुरू हुआ वर्ष दिसंबर 2024 में जबकि दंपति आईवीएफ के लिए डॉ रितु गर्ग और डॉ मनप्रीत कौर से पहली बार मिले, जहां से उन्हें ग्रेटर कैलाश के एसीआई सेंटर भेज दिया गया, इस समय तक दंपति की डॉ शिवानी सचदेव से भी मुलाकात कराई गई, जिन्हें आईवीएफ विशेषज्ञ माना जाता है। कई चरणों की काउंसलिंग के बाद नौ जनवरी 2025 को आईवीएफ के लिए जरूरी मेडिकल जांच एससीआई सेंटर पर कराई गईं, इस दौरान दंपति को आश्वासन दिया गया कि उनकी आईवीएफ प्रक्रिया नियमों के तहत पारदर्शिता के साथ पूरी की जाएगी। यहां बता दें कि दंपति को अपने ही स्पर्म और एग्स यह प्रक्रिया करानी थी, उन्हें किसी तरह का डोनर या सेरोगेट मदर नहीं चाहिए थी, इस बात को ध्यान में रखते हुए 12 फरवरी 2025 को राहुल और मीनू के स्पर्म और एग्स लिए गए। सेंटर द्वारा दंपति के एब्रायो की पूरी सुरक्षा की गारंटी दी गई, इसके बाद पांच जनवरी 2026 को मीनू ने जुड़वा बेटियों को जन्म दिया, और बताया गया के दोनों बच्चियां राहुल और मीनू की बायोलॉजिकल संतान हैं, लेकिन इस बीच बच्चियों की शक्ल सूरत पर संदेह होने पर दोनों का डीएनए टेस्ट कराया गया, सात जनवरी को बच्ची और माता पिता की डीएनए जांच कराई गई, 14 जनवरी को आई रिपोर्ट में यह साफ हो गया कि न तो बच्चियों का डीएनए माता पिता से मैच कर रहा है और न ही शक्ल और रंग में वह राहुल और मीनू की तरह हैं। इसपर दंपति को एंब्रायो जानबूझ कर बदले जाने का शक हुआ।
सेहत365डॉटकॉम के संवाददाता से बात करते हुए राहुल राठौर ने बताया कि जब इस बात की शिकायत लेकर हम सेंटर पर पहुंचे तो न सिर्फ हमें धमकाया गया, बल्कि कहा गया कि आप चाहे जिनते पैसे ले लो, मामले को यही खत्म कर दो, लेकिन दंपति द्वारा बायोलॉजिकल प्रॉपर्टी का गलत इस्तेमाल, मेडिकल फ्रॅाड और ह्यूमन ट्रैफिकिंग की शिकायत सहित सेंटर पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। इस संदर्भ में ग्रेटर कैलाश थाने में 31 मार्च 2026 को एफआईआर दर्ज की गई। दंपति से एआरटी तकनीक का गलत इस्तेमाल करने, भावनाओं को आहत करने सहित कई मुद्दों पर अपनी बात रखी है।
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