
अंतराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून पर विशेष
18 सप्ताह के योग कार्यक्रम से जीवन की गुणवत्ता, आत्म–सम्मान और मानसिक स्वास्थ्य में हुआ सुधार, प्रोस्थेसिस के उपयोग में भी बढ़ोतरी
नई दिल्ली, सेहत संवाददाता
किसी मार्ग दुर्घटना, आघात या फिर ट्रामा के कारण अपने पैरों को खो चुके मरीजों के लिए योग एक प्रभावी सहायक उपचार के रूप में उभरकर सामने आया है। इस संदर्भ में किए गए एक अध्ययन के अनुसार नियमित योग अभ्यास न केवल मरीजों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर करता है बल्कि अवसाद, चिंता और तनाव के लक्षणों को भी कम करने में सहायक है। इन मरीजों पर एक तरह का रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल किया गया, जिसके परिणाम काफी संतोषजनक पाए गए हैं।
अध्ययन में आघातजनित निचले अंग विच्छेदन वाले यानि पैरों को खो चुके 50 मरीजों को शामिल किया गया। इनमें 26 मरीजों को योग समूह और 24 मरीजों को नियंत्रण समूह में रखा गया। सभी प्रतिभागियों का सामाजिक-जनसांख्यिकीय विवरण, जीवन की गुणवत्ता, अवसाद, चिंता, तनाव, आत्म-सम्मान और शारीरिक छवि का मूल्यांकन प्रारंभिक अवस्था तथा विच्छेदन के 6 से 18 सप्ताह बाद किया गया।
अध्ययन के अनुसार, 18 सप्ताह बाद योग करने वाले मरीजों में जीवन की गुणवत्ता नियंत्रण समूह की तुलना में उल्लेखनीय रूप से बेहतर पाई गई, इसके साथ ही अवसाद और चिंता के लक्षणों में भी महत्वपूर्ण कमी दर्ज की गई। छह सप्ताह के भीतर मरीजों की आत्म-छवि और आत्म-सम्मान में सुधार देखा गया, जबकि 18 सप्ताह बाद तनाव के स्तर में भी स्पष्ट गिरावट दर्ज की गई।
शोधकर्ताओं ने पाया कि यद्यपि दोनों समूहों में शारीरिक छवि स्कोर लगभग समान रहे, लेकिन योग करने वाले मरीजों ने कृत्रिम अंग (प्रोस्थेसिस) का उपयोग अधिक समय तक किया। इससे संकेत मिलता है कि योग मरीजों को पुनर्वास प्रक्रिया में अधिक सक्रिय और आत्मविश्वासी बनाने में मदद कर सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अंग विच्छेदन केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि गहरा मानसिक और भावनात्मक आघात भी होता है। रोजगार के अवसरों में कमी, सामाजिक अलगाव, आत्म-सम्मान में गिरावट और बढ़ती निर्भरता जैसे कारण मरीजों में अवसाद, चिंता और पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) जैसी समस्याओं को जन्म दे सकते हैं। अनुमान है कि ऐसे लगभग 28 प्रतिशत विच्छेदित मरीज अवसाद और 64 प्रतिशत मरीज चिंता के लक्षणों से प्रभावित होते हैं।
अध्ययन के तहत योग समूह के मरीजों ने 18 सप्ताह तक प्रतिदिन 30 मिनट का योग अभ्यास प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख में किया। दोनों समूहों को नियमित फिजियोथेरेपी भी प्रदान की गई, अध्ययन के दौरान किसी भी मरीज में योग से संबंधित कोई प्रतिकूल प्रभाव सामने नहीं आया और सभी प्रतिभागियों ने 90 प्रतिशत से अधिक सत्र पूरे किए।
शोधकर्ताओं का कहना है कि मानक फिजियोथेरेपी के साथ योग को शामिल करना एक सुरक्षित और आसानी से लागू की जा सकने वाली अतिरिक्त चिकित्सा पद्धति हो सकती है, जो निचले अंग विच्छेदन यानि पैरों को खोने वाले मरीजों के शारीरिक और मानसिक पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।