बारिश से राहत नहीं, बढ़ी उमस बनी दिल पर भारी: हार्ट मरीजों के लिए क्यों बढ़ जाता है खतरा?

No relief from rain, the increased humidity feels heavy on the heart: Why does the risk increase for heart patients? After the first rain of the monsoon, you do feel a slight drop in temperature, but the increased humidity in the atmosphere puts extra pressure on the body
No relief from rain, the increased humidity feels heavy on the heart: Why does the risk increase for heart patients?

नई दिल्ली, सेहत संवाददाता

मानसून की पहली बारिश के बाद भले ही तापमान में कुछ गिरावट महसूस होती है, लेकिन वातावरण में बढ़ी उमस (Humidity) शरीर पर अतिरिक्त दबाव डालती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति विशेष रूप से हृदय रोगियों, बुजुर्गों, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और मोटापे से ग्रस्त लोगों के लिए जोखिम बढ़ा सकती है।

उमस अधिक होने पर शरीर को पसीने के माध्यम से खुद को ठंडा करने में कठिनाई होती है। नतीजतन, हृदय को शरीर में रक्त प्रवाह बनाए रखने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। यदि व्यक्ति पहले से किसी हृदय रोग से पीड़ित है, तो यह अतिरिक्त दबाव गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

वरिष्ठ फिजिशियन एवं पूर्व सदस्य, डॉ. अनिल बंसल का कहना है:

“बारिश के बाद बढ़ी उमस को लोग अक्सर सामान्य मौसम परिवर्तन मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यही मौसम हृदय रोगियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। शरीर का तापमान नियंत्रित रखने के लिए हृदय को अधिक मेहनत करनी पड़ती है। यदि समय पर पर्याप्त पानी न पिया जाए या दवाएं नियमित न ली जाएं, तो स्थिति गंभीर हो सकती है।”

उमस में हार्ट मरीजों का खतरा क्यों बढ़ जाता है?

  • शरीर का तापमान नियंत्रित करने में कठिनाई
  • अत्यधिक पसीने से पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी
  • हृदय पर अतिरिक्त दबाव
  • रक्तचाप में उतार-चढ़ाव
  • सांस फूलना और थकान
  • पहले से मौजूद हृदय रोग के लक्षणों का बढ़ना

किन लोगों को सबसे अधिक सावधान रहने की जरूरत?

  • हार्ट अटैक या एंजियोप्लास्टी करा चुके मरीज
  • उच्च रक्तचाप के मरीज
  • मधुमेह से पीड़ित लोग
  • 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग
  • मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति
  • किडनी और फेफड़ों के मरीज

क्या बरतें सावधानी?

✔ पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें (यदि डॉक्टर ने तरल पदार्थ सीमित करने की सलाह न दी हो)।

✔ तेज उमस के दौरान अनावश्यक शारीरिक श्रम से बचें।

✔ सुबह या शाम हल्की सैर करें, दोपहर की उमस से बचें।

✔ दवाएं समय पर लें और बिना डॉक्टर की सलाह के कोई बदलाव न करें।

✔ सांस फूलना, सीने में दर्द, चक्कर आना या अत्यधिक पसीना आने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।

✔ हल्के, सूती कपड़े पहनें और घर में पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखें।

उमस में दिखें ये लक्षण तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

  • सीने में दर्द या दबाव
  • अचानक सांस लेने में तकलीफ
  • अनियमित धड़कन
  • अत्यधिक कमजोरी या बेहोशी जैसा महसूस होना
  • हाथ, जबड़े या पीठ में फैलता दर्द

Sehat365 Health View

बारिश के मौसम में लोग अक्सर केवल संक्रमण और मच्छरजनित बीमारियों पर ध्यान देते हैं, लेकिन उमस भी एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य जोखिम है। हृदय रोगियों के लिए मौसम में यह बदलाव सतर्क रहने का संकेत है। नियमित दवा, पर्याप्त पानी, संतुलित आहार और समय पर चिकित्सकीय सलाह से अधिकांश जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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