
नई दिल्ली, सेहत संवाददाता
मानसून से पहले या बारिश के बाद बढ़ी उमस (Humidity) केवल असहजता ही नहीं बढ़ाती, बल्कि यह हीट स्ट्रेस (Heat Stress) का कारण बन सकती है। खासकर हृदय रोगियों, उच्च रक्तचाप (हाई बीपी), मधुमेह, मोटापा और बुजुर्गों को इस मौसम में विशेष एहतियात बरतने की जरूरत होती है। जब वातावरण में नमी अधिक होती है, तो शरीर का पसीना आसानी से नहीं सूखता और शरीर का तापमान नियंत्रित करने की प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित होने लगती है। इसका सीधा असर हृदय पर पड़ता है।
उमस में दिल पर क्यों बढ़ता है दबाव?
आमतौर पर शरीर पसीने के माध्यम से खुद को ठंडा रखता है। लेकिन जब हवा में नमी अधिक होती है, तो पसीना वाष्पित यानि आसानी से सूख नहीं पाता है। ऐसे में शरीर का तापमान बढ़ने लगता है और उसे सामान्य रखने के लिए हृदय को अधिक मेहनत करनी पड़ती है।
इस दौरान—
- हृदय की धड़कन तेज हो सकती है।
- रक्तचाप में उतार-चढ़ाव आ सकता है।
- शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है।
- पहले से हृदय रोग से पीड़ित लोगों में सीने में दर्द, सांस फूलना या हार्ट फेल्योर के लक्षण बढ़ सकते हैं।
किन लोगों को सबसे अधिक खतरा?
- हृदय रोगी
- हाई ब्लड प्रेशर के मरीज
- मधुमेह (डायबिटीज) के मरीज
- 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग
- मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति
- किडनी रोगी
- बाहर धूप या गर्म वातावरण में काम करने वाले लोग
हीट स्ट्रेस के शुरुआती संकेत
- अत्यधिक पसीना आना या बिल्कुल पसीना न आना
- कमजोरी और चक्कर आना
- तेज धड़कन
- सिरदर्द
- सांस लेने में तकलीफ
- मांसपेशियों में ऐंठन
- मतली या उल्टी
- अत्यधिक थकान
यदि ये लक्षण गंभीर हों या सीने में दर्द, बेहोशी या सांस लेने में गंभीर परेशानी हो तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।
बचाव के आसान उपाय
- पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें, प्यास लगने का इंतजार न करें।
- बहुत अधिक चाय, कॉफी और शराब से बचें।
- दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच अनावश्यक बाहर निकलने से बचें।
- हल्के रंग और ढीले सूती कपड़े पहनें।
- घर और कार्यस्थल को हवादार रखें।
- ओआरएस या इलेक्ट्रोलाइट्स का सेवन जरूरत के अनुसार करें।
- डॉक्टर द्वारा दी गई हृदय और रक्तचाप की दवाएं नियमित लें।
- यदि आप डाययूरेटिक्स (पानी की दवा) लेते हैं, तो गर्मी के मौसम में स्वयं दवा की मात्रा न बदलें; किसी भी बदलाव से पहले अपने चिकित्सक से सलाह लें।
विशेषज्ञ की राय
“उमस के दौरान शरीर को ठंडा रखने में अधिक ऊर्जा लगती है, जिससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। हृदय रोगियों को पर्याप्त पानी पीना चाहिए, धूप और उमस से बचना चाहिए तथा सांस फूलना, सीने में दर्द या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।”
— डॉ. अनिल बंसल, वरिष्ठ फिजिशियन एवं पूर्व सदस्य, आईएमए