हफ्ते में एक बार वाली इंसुलिन भारत में लांच, डायबिटिज मरीजों के लिए राहत

Once-a-week insulin launched in India, relief for diabetes patients, basal insulin launched for the first time in India will reduce patients' expenses
Once-a-week insulin launched in India, relief for diabetes patients, basal insulin launched for the first time in India will reduce patients’ expenses
  • भारत में पहली बार लांच हुई बेसल इंसुलिन मरीजों का खर्च कम करेगी

नई दिल्ली, सेहत संवाददाता

डायबिटिज के मरीजों के लिए राहत भरी खबर है, हर रोज इंसुलिन लेने के झंझट से मरीजों को अब छुट्टी मिलेगी, भारत सरकार ने देश हफ्ते में एक बार ली जाने वाली इंसुलिन को भारत में लांच करने की अनुमति दे दी है, जिसके बाद डायबिटिज मरीजों का इंसुलिन पर होने वाला खर्च चालीस प्रतिशत तक कम हो जाएगा। डेनमार्क की दवा कंपनी द्वारा बनाई गई इंसुलिन आइकोडेक की बिक्री के लिए मंजूरी मिलने के बाद अब भारत के डायबिटिज मरीज भी इसका प्रयोग कर सकेंगे। कंपनी का दावा है कि यह हफ्ते में एक बाद दिया जाने वाला बेसल इंसुलिन है।

इंसुलिन आइकोडेक (Awiqli) क्या है?

इंसुलिन आइकोडेक (Awiqli) एक लंबे समय तक असर करने वाली (Long-Acting) बेसल इंसुलिन है, जिसे सप्ताह में केवल एक बार लगाया जाता है। यह शरीर में लगभग 7 दिनों तक धीरे-धीरे काम करती रहती है और पूरे सप्ताह ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करती है।

टाइप 2 डायबिटीज़ वाले लोगों के लिए

यह इंसुलिन सुरक्षित और प्रभावी मानी गई है। यह HbA1c (पिछले 3 महीनों की औसत शुगर) को कम करने में रोज़ाना लगने वाली बेसल इंसुलिन जितनी ही या उससे बेहतर साबित हुई है। यदि ज़रूरत हो, तो इसे खाने के समय लगने वाली इंसुलिन (बोलस इंसुलिन) के साथ भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

टाइप 1 डायबिटीज़ वाले लोगों के लिए

यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करती है, लेकिन लो ब्लड शुगर (हाइपोग्लाइसीमिया) होने का खतरा रोज़ाना लगने वाली बेसल इंसुलिन की तुलना में अधिक हो सकता है। इसलिए टाइप 1 डायबिटीज़ में इसका उपयोग केवल डॉक्टर की सलाह और नियमित निगरानी में ही करना चाहिए।

ध्यान रखने वाली बातें

क्योंकि यह इंसुलिन सप्ताह में केवल एक बार लगती है, इसलिए इसकी मात्रा (डोज़) को तुरंत कम या ज़्यादा नहीं किया जा सकता। यदि आप ज़्यादा व्यायाम करते हैं, कम खाना खाते हैं या आपकी दिनचर्या बदलती है, तो लो शुगर होने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए नियमित रूप से ब्लड शुगर की जाँच करना और डॉक्टर द्वारा बताई गई सलाह का पालन करना बहुत ज़रूरी है।

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