
सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ आर्थोपेडिक्स्र, वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सकों की टीम ने की सर्जरी
नई दिल्ली,
सफदरजंग अस्पताल और वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने घुटना बदलने के लिए पहली बार रोबोट का प्रयोग किया, टोटल नी ट्रांसप्लांट यानि पूरा घुटना बदलने की यह सर्जरी पूरी तरह सफल रही। इसे संस्थान का पहला रोबोटिक टोटल नी प्रत्यारोपण बताया गया है। जिसमें संस्थान के सेंटर इंस्टीट्यूट ऑफ आर्थोपेडिक्स के चिकित्सकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
संस्थान में रोबोट असिसटेड आर्थोपेडिक सर्जरी की शुरूआत संस्थान की निदेशक डॉ कविता शर्मा के कुशल नेतृत्व की वजह से संभव हुई। वहीं रोबोटिक सर्जरी को सेंटर इंस्टीट्यूट ऑफ आर्थोपेडिक्स के निदेशक डॉ सुमित सूरल और यूनिट हेड डा़ भगवती प्रसाद की टीम द्वारा की गई। महत्वपूर्ण यह है कि संस्थान का पहला रोबोटिक टोटल नी प्रत्यारोपण आयुष्मान भारत योजना के अंर्तगत किया गया, इसके लिए मरीज से किसी तरह का शुल्क नहीं लिया गया। 75 वर्षीय बुजुर्ग पर यह सर्जरी की गई, जिनका घुटना पूरी तरह खराब हो चुका था। घुटना प्रत्यारोपण की इस टीम में डॉ भगवती प्रसाद शर्मा के साथ यूनिट हेड और सलाहकार डॉ धुव्र मैनी और डॉ कार्तिक यादव की भी अहम भूमिका रही।