
- दिल्ली में इस साल अब तक 1,777 H1N1 मामलों की पुष्टि, 2,392 Influenza-A केस सामने आए; बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को अधिक सतर्क रहने की सलाह
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में मौसमी इन्फ्लुएंजा के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी के बीच H1N1 यानी स्वाइन फ्लू संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य विभाग और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने निगरानी बढ़ा दी है। 23 अगस्त तक दिल्ली में इस साल 2,392 Influenza-A मामलों में 1,777 H1N1 संक्रमण की पुष्टि हुई है। बढ़ते मामलों के मद्देनजर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने दिल्ली में स्वास्थ्य व्यवस्था और तैयारियों की समीक्षा की। हालांकि, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने स्पष्ट किया है कि देश में H1N1 का कोई नया स्ट्रेन सामने नहीं आया है और मौजूदा संक्रमण मौसमी इन्फ्लुएंजा का हिस्सा है।
सांस की स्वच्छता और भीड़ से दूरी जरूरी
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) की मौसमी इन्फ्लुएंजा संबंधी गाइडलाइनों में संक्रमण से बचाव के लिए श्वसन स्वच्छता पर विशेष जोर दिया गया है। फ्लू जैसे लक्षण होने पर घर पर रहना, खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकना, हाथों को नियमित रूप से साबुन से धोना और भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतना संक्रमण के प्रसार को कम करने में मदद करता है। NCDC की ओर से H1N1 के लिए मरीजों की श्रेणी तय करने, मास्क के इस्तेमाल, क्लीनिकल प्रोटोकॉल और होम केयर से संबंधित तकनीकी दिशानिर्देश भी उपलब्ध हैं।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
H1N1 संक्रमण में सामान्यतः बुखार, खांसी, गले में खराश, बदन दर्द, ठंड लगना और थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मरीजों में संक्रमण गंभीर रूप लेकर सांस लेने में परेशानी पैदा कर सकता है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में जटिलताओं का खतरा अधिक हो सकता है।
इलाज में डॉक्टर की सलाह जरूरी
स्वाइन फ्लू वायरल संक्रमण है, इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं लेना उचित नहीं है। अधिकांश हल्के मामलों में डॉक्टर की सलाह के अनुसार आराम, पर्याप्त तरल पदार्थ और लक्षणों के आधार पर उपचार किया जाता है। जोखिम वाले या गंभीर मरीजों में चिकित्सक एंटीवायरल दवा की जरूरत का आकलन कर सकते हैं। सांस लेने में कठिनाई, लगातार तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, सीने में दर्द या ऑक्सीजन स्तर में कमी जैसे संकेत दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। NCDC की गाइडलाइन मरीजों की स्थिति के आधार पर होम आइसोलेशन, जांच, उपचार और अस्पताल में भर्ती की श्रेणियां निर्धारित करती है।
फ्लू वैक्सीन से मिल सकती है अतिरिक्त सुरक्षा
मौसमी फ्लू वैक्सीन में H1N1 घटक शामिल होता है और यह संक्रमण, अस्पताल में भर्ती होने तथा गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है। विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले लोगों को टीकाकरण के संबंध में अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
बचाव के लिए क्या करें
- हाथों को साबुन और पानी से नियमित रूप से साफ करें।
- खांसी या छींक आने पर मुंह और नाक को ढकें।
- फ्लू जैसे लक्षण होने पर घर पर रहें और दूसरों से दूरी बनाए रखें।
- भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क और श्वसन स्वच्छता का ध्यान रखें।
- आंख, नाक और मुंह को बार-बार छूने से बचें।
- बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों में लक्षण दिखने पर डॉक्टर से जल्द संपर्क करें।
- बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं न लें।
विशेषज्ञों के मुताबिक घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन बढ़ते संक्रमण को देखते हुए सावधानी और समय पर चिकित्सकीय सलाह बेहद जरूरी है।