
नई दिल्ली, परिमल कुमार
क्या आप जानते हैं कि बदलते मौसम के साथ हमारी हवा भी ज़हरीली होती जा रही है? जिस हवा में हम सांस लेते हैं, उसमें अब भारी धातुओं (Heavy Metals) की उपस्थिति पाई गई है। AIIMS (All India Institute of Medical Sciences) और TERI (The Energy and Resources Institute) द्वारा किए गए एक शोध में यह सामने आया है कि हमारे वातावरण में मौजूद Particulate Matter (PM 2.5 और PM 10) में भारी धातुओं की मात्रा पाई गई है।
इस शोध में देश के 6 प्रमुख शहरों—जैसलमेर, दिल्ली, पंचकुला, लुधियाना, पटियाला, और विशाखापट्टनम—की हवा का विश्लेषण किया गया। परिणाम चिंताजनक हैं, क्योंकि हर शहर की हवा में भारी धातुओं की मौजूदगी दर्ज की गई है।
कोहरा बदला धुएं में
पहले के समय में जब कोहरा पड़ता था, तो इससे किसानों को लाभ मिलता था और लोग ठंड का आनंद लेते थे। लेकिन बढ़ते औद्योगिकीकरण ने कोहरे को धुएं में बदल दिया है, और लोगों के आनंद को डर में। आज, सर्दियों के आते ही दिल्ली, गुड़गांव, फरीदाबाद, पंचकुला, और नोएडा जैसे शहरों के लोगों में यह चिंता बढ़ जाती है कि अब 2-3 महीने जहरीली हवा के बीच निकालने होंगे।
सर्दियों के दौरान, खासतौर पर नवंबर से जनवरी तक, बढ़ते प्रदूषण के कारण AQI (एयर क्वालिटी इंडेक्स) पर चर्चा होती है कि हवा कितनी खराब हो चुकी है और लोग सांस लेने में तकलीफ महसूस कर रहे हैं। लेकिन चिंता की बात यह है कि इस मुद्दे पर ना तो नवंबर से जनवरी से पहले ध्यान दिया जाता है, और न ही बाद में।
AIIMS और TERI ने यह पता लगाने के लिए एक शोध किया कि इस जहरीली हवा में क्या-क्या शामिल है। इस अध्ययन के लिए उन्होंने छह शहरों—दिल्ली, पंचकुला, लुधियाना, पटियाला, जैसलमेर और विशाखापत्तनम—को चुना। शोध में पाया गया कि इन शहरों की हवा में ऑर्गेनिक कार्बन कंपोनेंट्स के साथ-साथ भारी धातुएं, जैसे—निकल, जिंक, लेड, कॉपर और क्रोमियम भी मौजूद हैं। ये सभी तत्व हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं, खासकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए।
जहरीली हवा से होने वाली बीमारियाँ और उनसे बचाव के उपाय:
इस प्रदूषण से न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर हो सकता हैं, और कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है। यदि कोई व्यक्ति सिगरेट नहीं पीता, फिर भी वह इस जहरीली हवा में सांस ले रहा है, तो समझिए कि वह सिगरेट के हानिकारक तत्वों को अपने शरीर में ग्रहण कर रहा है। सामान्य सिरदर्द, आंखों में जलन, बुखार, ये सभी इस धुएं और जहरीली हवा में आम समस्याएं बन चुकी हैं।
तो, आखिरकार इस प्रदूषण से बचने के क्या उपाय किए जा सकते हैं? जब भी यह बात आती है, तो सबसे पहले यही ध्यान में आता है कि अगर किसान पराली जलाना बंद कर दें, तो प्रदूषण और धुएं से राहत मिल जाएगी। लेकिन पराली जलाना ही इसके कारण का एक मात्र हिस्सा नहीं है। बढ़ता औद्योगिकीकरण, कटते पेड़ और कम होता सार्वजनिक परिवहन, इन सभी पर अब बात करनी होगी और समाधान निकालना होगा, नहीं तो बच्चों और बुजुर्गों के लिए इस माहौल में जीना और भी मुश्किल हो जाएगा।
इसके अलावा, जब भी घर से बाहर निकलें, तो हमेशा मास्क पहनें। कोशिश करें कि जब वातावरण में धुआं ज्यादा हो, तो उस समय घर से बाहर निकलने से बचें। इस प्रकार के उपायों से हम खुद को और अपने परिवार को इस जहरीली हवा से कुछ हद तक बचा सकते हैं।

Parimal Kumar, Senior Journalist