
- लिवर, किडनी, दिल सहित अन्य अंगों को किया गया प्रत्यारोपित
- राम मनोहर लोहिया अस्पताल और अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस ने अंगदान में कायम की मिसाल
नई दिल्ली, सेहत संवाददाता
राम मनोहर लोहिया अस्पताल के चिकित्सकों ने अंगदान में मिसाल कायम करते हुए एक 45 वर्षीय मस्तिष्क मृत महिला के अंगों को जरूरतमंद तीन मरीजों में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया। महिला की सेलेब्रल हैमरेज की वजह से मौत हो गई और परिजनों द्वारा उसके अंगों को दान करने की सहमति की बाद इस प्रक्रिया को शुरू किया गया। जिसमें महिला के किडनी, लिवर और दिल के माध्यम से लोगों को जीवनदान दिया गया।
महिला मरीज की किडनी राम मनोहर लोहिया अस्पताल में ही नेफ्रोलॉजी विभाग के किडनी मरीज को प्रत्यारोपित की गई, वहीं लखनऊ संजयगांधी पीजीआई में इलाज करा रहे कार्डियक फ्लेयर के एक मरीज को महिला का दिल पहुंचाया गया, इसी तरह कई अन्य अंगों को भी संरक्षित कर जरूरतमंद मरीजों के लिए प्रयोग किया जाएगा। महिला मरीज के परिजनों द्वारा किए गए इस नेक काम से कई लोगो को जीवनदान मिला। क्योंकि हर अंग एक नये और बेहतर जीवन की उम्मीद को बढ़ाता है। प्रक्रिया की शुरूआत में मेडिसिन और क्रिटियल केयर मेडिसिन विभाग के चिकित्सकों ने आपसी सलाह मशविरा किया, जिसमें यह पाया गया कि 45 वर्षीय महिला मस्तिष्क मृत हैं और उनके अंगों को अन्य जरूरतमंद मरीजों में प्रत्यारोपित किया जा सकता है। इसके बाद महिला की इस स्थिति के बारे में उसके परिवारों को बताया गया, आईसीयू में सभी अंगों को संरक्षित किया गया। परिजनों ने एक नेक काम को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महिला मरीज के अंगदान की सहमति दे दी।
नोटो की सहमति के बाद हुआ अंगदान
पारिवारिक सहमति और मेडिकल कंडिशन प्रूव होने के बाद तकनीकि औपचारिकताएं पूरी की गईं, इसके लिए एक अंग को दूसरे अस्पताल तक पहुंचाने के लिए ट्रांसपोर्ट कोऑर्डिनेशन, नोटो (नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन) की सहमति के तीन अंगों को तीन विभिन्न इंस्टीट्यूट में पहुंचाया गया। तड़के तकरीबन सुबह 3.30 बजे कार्डियक एनीस्थिसिया और जनरल एनेस्थीसिया टीम की सहायता से महिला के दिल को सीटीवीएस टीम दवारा रिट्राइव किया गया, जबकि लिवर को लिवर प्रत्यारोपण की टीम द्वारा, किडनी को यूरोलॉजी विभाग द्वारा निकाला गया। इसके बाद दिल को एअर एंबुलेंस के जरिए लखनऊ स्थित संजय गांधी पीजीआई को भेज दिया गया, लिवर को दिल्ली कैंट स्थित आरआर हॉस्पिटल को, जिसके लिए दिल्ली पुलिस की मदद से ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। सभी अंगों के रिट्राइवल के बाद मृतक महिला के शरीर को परिजनों को सौंप दिया गया। अंगदान की पूरी प्रक्रिया संस्थान के निदेशक, मेडिकल सुप्रीटेंडेंड और एडिशनल एमएस के दिशा निर्देश में पूरी की गई।
नोट- ब्रेन डेड मृतक की ऐसी अवस्था होती है, जिसमें मरने वाले का मस्तिष्क मृत्यु के कुछ समय बाद तक सक्रिय रहते हैं, ऐसे समय में निर्धारित समय में वायटल या जीवनदायक अंगों को किसी और के शरीर में प्रत्यारोपित कर उन्हें जीवनदान दिया जा सकता है, जरूरी अंगों में लिवर,किडनी और दिल को सबसे कम समय में अतिशीघ्र प्रत्यारोपित करने की जरूरत होती है, इसलिए ग्रीन कॉरिडोर या फिर एअर एंबुलेंस के जरिए अंगों को सही जगह तक पहुंचाया जाता है अन्य अंग जैसे त्वचा, पैंक्रियाज आदि को संरक्षित कर बाद में भी प्रयोग में लाया जा सकता है, इसके लिए नोटो की सहमति जरूरी है।

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