
नई दिल्ली, सेहत संवाददाता
हर वर्ष 25 जून को विश्व विटिलिगो दिवस (World Vitiligo Day) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य सफेद दाग (Vitiligo) के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना, इससे जुड़े भ्रम दूर करना और मरीजों के प्रति सामाजिक भेदभाव को कम करना है।
विटिलिगो कोई संक्रामक बीमारी नहीं है। यह छूने, साथ बैठने, खाना खाने या कपड़े साझा करने से नहीं फैलता। इसके बावजूद आज भी कई मरीज सामाजिक उपेक्षा, मानसिक तनाव और आत्मविश्वास की कमी का सामना करते हैं। विटिलिगो एक ऐसी त्वचा संबंधी स्थिति है जिसमें त्वचा को रंग देने वाली कोशिकाएं (Melanocytes) प्रभावित हो जाती हैं। इसके कारण शरीर के विभिन्न हिस्सों पर सफेद धब्बे दिखाई देने लगते हैं। यह किसी भी उम्र में हो सकता है।
किन कारणों से हो सकता है?
- ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया
- आनुवंशिक (Genetic) कारण
- अत्यधिक मानसिक तनाव
- कुछ मामलों में त्वचा की चोट के बाद
हालांकि, इसका सटीक कारण अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
क्या विटिलिगो का इलाज संभव है?
राम मनेहर लोहिया अस्पताल के त्वचा रोग विभाग के प्रमुख डॉ कबीर सरदाना कहते हैं कि उपचार का चुनाव रोग की अवस्था, प्रभावित हिस्से और मरीज की उम्र पर निर्भर करता है। आधुनिक चिकित्सा में दवाएं, फोटोथेरेपी और कुछ मामलों में सर्जिकल विकल्प उपलब्ध हैं। उपचार का उद्देश्य रोग की प्रगति को नियंत्रित करना और त्वचा में रंग वापस लाने का प्रयास करना होता है।
विशेषज्ञ की राय
होम्योपैथी विशेषज्ञ डॉ. ए.के. गुप्ता कहते हैं,
“विटिलिगो को केवल त्वचा का रोग मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर चिकित्सकीय सलाह, संतुलित जीवनशैली और मानसिक तनाव पर नियंत्रण उपचार की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मरीजों को किसी भी प्रकार के भ्रम या झूठे दावों से बचते हुए योग्य चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।“
इन मिथकों से बचें
- सफेद दाग छूने से फैलता है।
- यह केवल खराब खान-पान से होता है।
- इसका कोई इलाज नहीं है।
- यह किसी अभिशाप या संक्रमण का परिणाम है।
सेहत365 का संदेश
विश्व विटिलिगो दिवस हमें यह याद दिलाता है कि सफेद दाग से पीड़ित व्यक्ति को दया नहीं, बल्कि सम्मान, सही जानकारी और समय पर चिकित्सा की आवश्यकता होती है।