बिना चीरा लगाए 14 साल की बच्ची के दिल का सफल इलाज

Fortis Hospital Manesar has achieved the remarkable milestone of performing 300 cardiac surgeries, showcasing expertise in rare and highly risky life-saving procedures.
Fortis Hospital Manesar has achieved the remarkable milestone of performing 300 cardiac surgeries, showcasing expertise in rare and highly risky life-saving procedures.
  • फोर्टिस हॉस्पीटल मानेसर ने 300 कार्डियाक सर्जरी करने की शानदार उपलब्धि दर्ज की, दुर्लभ और अत्यधिक जोखिम वाली जीवनरक्षक प्रक्रियाओं में विशेषज्ञता का परिचय दिया

नई दिल्ली/ मानेसर

फार्टिस मानेसर अस्पताल के हृदयरोग विशेषज्ञों ने 14 साल की बच्ची के दिल का इलाज बिना चीरा लगाए कर दिया, बच्ची जन्म से ही हृदय विकार से ग्रसित थी, जिसे कंजेनाइटल हार्ट डिसीस कहा जाता है, ओपेन हार्ट या चीरा लगाकर की गई सर्जरी के एवज में मिनीमल इंवेसिव सर्जरी अधिक चुनौतीपूर्ण होती है, बच्ची की कम उम्र और कम वजन को देखते हुए चिकित्सकों ने मिनीमल इंवेसिव का विकल्प चुना, जो पूरी तरह सफल रहा। सर्जरी में शरीर के निचले भागों से हृदय के हिस्से को बायपास करते हुए सीधे फेफड़ों को रक्त पहुंचाने के लिए एक स्पेशल स्टेंट लगाया जाता है। नियंत्रित इलेक्ट्रोसर्जिकल तकनीक की मदद से बच्ची की पल्मोनरी आर्टरी में एक छोटे के छेद के जरिए पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया, और बिना चीरा लगाए या बिना ओपेन हार्ट सर्जरी के बच्ची को जीवन दान दिया गया।

फोर्टिस हॉस्पीटल मानेसर ने 300 कार्डियाक सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी कर क्षेत्र में एडल्ट एवं पिडियाट्रिक कार्डियाक केयर के अग्रणी तथा उन्नत केंद्र के तौर पर अपनी पहचान बना ली है। इस उपलब्धि ने हाइ रिस्क और जटिल तथा दुर्लभ कार्डियक कंडीशन समेत रीडू सर्जरी, मिनीमली इन्वेसिव प्रक्रियाओं, स्कारलेस एंडोस्कोपिक सर्जरी और हृदय विकारों  को दुरुस्त करने वाली करेक्शन प्रक्रियाओं के मामले में अस्पताल की लगातार बढ़ रही साख को एक बार फिर मजबूती दी है।

अस्पताल की उपलब्धियों के बारे में, डॉ महेश वाधवानी, चीफ कार्डियाक सर्जन एवं एचओडी, सीटीवीएस, फोर्टिस हॉस्पीटल मानेसर ने कहा, “अस्पताल में 300 सर्जरी करने का मतलब है हमारे प्रति मरीजों का भरोसा और साथ ही, हमारी मल्टीडिसीप्लीनरी टीम के बीच अत्यधिक तालमेल होना। इनमें से कई मामलों को तो अन्य अस्पतालों द्वारा सर्जरी करने लायक भी नहीं माना जा रहा था, या इनमें काफी अधिक रिस्क था। लेकिन हमारा पूरा जोर हमेशा से ही, उन्नत तथा साक्ष्य-आधारित कार्डियाक केयर प्रदान करने और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप परिणाम उपलब्ध कराने का रहा है।”

पिडियाट्रिक और नियोनेटल मामलों में अत्यधिक सर्जिकल प्रिसीजन की जरूरत के बारे में, डॉ श्यामवीर सिंह खंगरोट, सीनियर कंसल्टेंट, नियोनेटल एंड पिडियाट्रिक कार्डियाक सर्जरी, फोर्टिस हॉस्पीटल मानेसर ने कहा, “जटिल जन्मजात हृदय विकारों के उपचार के लिए ऐसी रणनीतियां बनाना जरूरी होता है जो जहां तक संभव हो बच्चे की अपनी हृदय संरचनाओं को सुरक्षित रख सकें। इन मामलों में प्रोस्थेटिक इंप्लांट्स से बचने और त्वरित रिकवरी की जरूरत होती है ताकि बच्चे की आगे चलकर लंबे समय तक के लिए जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाकर रखा जा सके।

फोर्टिस हॉस्पीटल मानेसर,सीनियर कंसल्टेंट, पिडियाट्रिक कार्डियोलॉजी, दीपक ठाकुर, ने कहा, “समय पर रेफरल और पिडियाट्रिक कार्डियोलॉजी, सर्जरी एवं क्रिटिकल केयर के बीच भरपूर तालमेल से इस प्रकार के परिणामों को प्राप्त किया जा सकता है। नवजात से लेकर किशोरों तक के मामले में, अब हम जटिल जन्मजात हृदय रोगों के उपचार के लिए मिनीमली इन्वेसिव और सुनिश्चित उपचार उपलब्ध कराने में सक्षम हैं।”

फोर्टिस हॉस्पीटल मानेसर के एडिशनरल डायरेक्टर कार्डियक एनेस्थीसिया डॉ आलोक रंजन साहू, ने बताया कि “इन हाइ रिस्क रीडू सर्जरी और पिडियाट्रिक मामलों में मिली सफलता वास्तव में, हमारे एडवांस पेरीऑपरेटिव मैनेजमेंट तथा प्रिसाइज़ एनेस्थीटिक केयर का प्रमाण है।

 

अन्य सफल हार्ट सर्जरी

  • अस्पताल की टीम ने 47-वर्षीय महिला मरीज की डबल वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया। मरीज काफी गंभीर हृदय रोग से ग्रस्त थीं, और इस वजह से उनका जीवन बिस्तर तक सिमटकर रह गया था। वह व्हील-चेयर तक सीमित हो गईं थीं और उन्हें घर पर भी लगातार ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखना जरूरी था। उन्हें पूर्व में स्ट्रोक और हार्ट फेल होने की शिकायत भी थी और डॉक्टरी जांच में उन्हें एडवांस रियूमेटिक हार्ट रोग से ग्रस्त पाया गया जिसकी गिरफ्त में मल्टीपल वाल्व भी आ चुके थे और उनकी अनियमित हृदय गति ने काफी हद तक हार्ट फंक्शन को कमजोर कर दिया था। डॉक्टरों ने जटिल डबल वाल्व रिप्लेसमेंट प्रक्रिया को अंजाम दिया, और उनके दोनों एओर्टिक तथा मिट्रल वाल्वों को बदला और अतिरिक्त प्रक्रियाओं को भी किया ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की जटिलताओं से मरीज का बचाव हो सके।

 

  • ऐसा ही एक अन्य असाधारण मामला बांग्लादेश से इलाज के लिए आए 60-वर्षीय मरीज का था, जिन्हें उनकी पिछली बायपास सर्जरी तथा अन्य कई रोगों के चलते ऑपरेशन के अयोग्य घोषित किया गया था। लेकिन फोर्टिस मानेसर की टीम ने उनकी दुर्लभ ‘बीटिंग हार्ट’रीडू मिनीमली इन्वेसिव मिट्रल वाल्व रिस्पेलसमेंट सर्जरी की। उल्लेखनीय है कि यह प्रक्रिया इतनी दुर्लभ है कि दुनियाभर में ऐसे कुछ सैंकड़ों मामले ही सामने आए हैं। अस्पताल में कुछ ऐसाी एडवांस सर्जिकल तकनीकों की मदद से इसे किया गया जो डॉक्टरों को हृदय को रोके बगैर ही मिट्रल वाल्व को बदलने का विकल्प देती हैं, यहां तक कि ऐसे मरीजों के मामले में भी जिन्होंने पहले भी हार्ट सर्जरी हो चुकी हैं। —

 

  • कार्डियाक टीम ने 43-वर्षीय एक प्रोफेशनल स्कूबा डाइवर की अवरुद्ध धमनियों, हार्ट वाल्व से रिसाव और हृदय की कमजोर मांसपेशियों का इलाज सिंगल सर्जरी से ही करने का शानदार उदाहरण पेश किया। सर्जरी के बाद, मरीज के हार्ट फंक्शन में काफी सुधार दिखायी दिया है और अब मरीज सक्रिय लाइफस्टाइल में वापसी कर चुका है।

 

  • एक अन्य महत्वपूर्ण सर्जरी एबसटीन विसंगति से ग्रस्त 6-वर्षीय मरीज की थी। यह बच्ची अत्यंत दुर्लभ किस्म के जन्मजात हृदय विकार से पीड़ित थी। हालांकि इस बच्ची को अन्य मेडिकल केंद्रों पर ऑपरेशन के अयोग्य करार दिया गया था, लेकिन फोर्टिस मानेसर के सर्जनों ने इस बच्ची के ही शरीर से टिश्यू लेकर उसके वाल्व को रिपेयर किया, और इस प्रकार कृत्रिम वाल्व लगाने से बचाव हुआ, तथा मरीज की रिकवरी भी जल्द हुई।

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