निर्जला एकादशी 2026: 24 घंटे बिना पानी और भोजन रहने से शरीर पर क्या असर पड़ता है?

Nirjala Ekadashi 2026: What effect does staying without food and water for 24 hours have on the body?
Nirjala Ekadashi 2026: What effect does staying without food and water for 24 hours have on the body?

निर्जला एकादशी पर बिना पानी और भोजन के 24 घंटे रहने से शरीर, दिमाग, किडनी और दिल पर क्या असर पड़ता है? जानिए डिहाइड्रेशन के लक्षण, स्वास्थ्य जोखिम और विशेषज्ञों की सलाह।

नई दिल्ली, सेहत संवाददाता

निर्जला एकादशी व्रत: आस्था के साथ स्वास्थ्य का भी रखें ध्यान

आज देशभर में श्रद्धालु निर्जला एकादशी का व्रत रख रहे हैं। इस व्रत की विशेषता यह है कि कई श्रद्धालु पूरे 24 घंटे या उससे अधिक समय तक बिना अन्न और बिना जल के उपवास करते हैं। 37 से 40 डिग्री के तापमान में बिना जल और अन्न के रहना सेहत पर असर डाल सकता है, इसलिए व्रत का संकल्प लेने से पहले इन जरूरी बातों को अवश्य जान लें, धार्मिक दृष्टि से यह व्रत अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक शरीर को पानी और भोजन न मिलने से शरीर के कई महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो सकते हैं, विशेषकर यदि मौसम गर्म हो या व्यक्ति पहले से किसी बीमारी से पीड़ित हो।

24 घंटे बिना पानी रहने पर शरीर में क्या होता है?

लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल की पूर्व आहार विशेषज्ञ डॉ किरन दीवान कहती हैं कि मानव शरीर का लगभग 50–60 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना होता है। पानी शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने, रक्त संचार, पाचन, पोषक तत्वों के परिवहन और अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने के लिए आवश्यक है। लगातार 24 घंटे तक पानी न मिलने पर शरीर में डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) शुरू हो सकता है। इसके कारण व्यक्ति को प्यास, सिरदर्द, चक्कर आना, कमजोरी, मुंह सूखना, थकान और पेशाब कम आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यदि पानी की कमी अधिक बढ़ जाए तो रक्तचाप गिर सकता है और शरीर का तापमान नियंत्रित रखना भी कठिन हो सकता है।

दिमाग को पानी की कितनी जरूरत होती है?

मानव मस्तिष्क लगभग 70–75 प्रतिशत पानी से बना होता है। शरीर में पानी की कमी का सबसे पहले असर मानसिक कार्यक्षमता पर दिखाई दे सकता है। हल्का डिहाइड्रेशन भी ध्यान केंद्रित करने की क्षमता कम कर सकता है, याददाश्त प्रभावित हो सकती है और चिड़चिड़ापन या सिरदर्द महसूस हो सकता है। कुछ लोगों में अत्यधिक कमजोरी या भ्रम की स्थिति भी बन सकती है।

किडनी और दिल पर क्या प्रभाव पड़ता है?

डॉ किरन दीवान कहती हैं कि किडनी का मुख्य कार्य शरीर से विषैले पदार्थों को मूत्र के माध्यम से बाहर निकालना है। पर्याप्त पानी न मिलने पर किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है और मूत्र की मात्रा कम हो जाती है। बार-बार ऐसा होने पर किडनी स्टोन जैसी समस्याओं का जोखिम भी बढ़ सकता है। वहीं, पानी की कमी से रक्त की मात्रा घटने लगती है, जिससे हृदय को रक्त पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। गर्मी के मौसम में यह स्थिति बुजुर्गों और हृदय रोगियों के लिए अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

भोजन करने पर शरीर ऊर्जा कैसे प्राप्त करता है?

उपवास के शुरुआती घंटों में शरीर लीवर और मांसपेशियों में जमा ग्लाइकोजन का उपयोग ऊर्जा के लिए करता है। लगभग 12–24 घंटे बाद शरीर धीरे-धीरे वसा (फैट) को ऊर्जा के स्रोत के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर देता है। स्वस्थ व्यक्तियों में एक दिन का उपवास सामान्यतः गंभीर नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन यदि इसके साथ पानी भी न लिया जाए तो जोखिम बढ़ सकता है।

किन लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए?

  • मधुमेह (डायबिटीज) के मरीज
  • किडनी या हृदय रोग से पीड़ित लोग
  • गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाएं
  • बुजुर्ग
  • अत्यधिक गर्मी में बाहर काम करने वाले लोग

ऐसे लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के निर्जला व्रत रखने से बचना चाहिए।

व्रत खोलते समय रखें ये सावधानियां

व्रत समाप्त होने पर एक साथ बहुत अधिक भोजन या बहुत ठंडा पानी लेने से बचें। सबसे पहले सामान्य तापमान का पानी या इलेक्ट्रोलाइट युक्त पेय लें। इसके बाद फल, नारियल पानी या हल्का सुपाच्य भोजन लें, ताकि शरीर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट सके।

निर्जला एकादशी आस्था और आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण पर्व है। यदि आप स्वस्थ हैं तो भी मौसम, उम्र और अपनी शारीरिक क्षमता को ध्यान में रखते हुए व्रत रखें। यदि चक्कर आना, अत्यधिक कमजोरी, बेहोशी, तेज धड़कन या भ्रम जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत व्रत तोड़कर चिकित्सकीय सहायता लें। धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य की सुरक्षा भी उतनी ही आवश्यक है।

मानव शरीर का लगभग 50–60% हिस्सा पानी होता है।

  • मस्तिष्क में लगभग 70–75% पानी होता है।
  • रक्त का 50% से अधिक भाग प्लाज्मा है, जिसमें अधिकांश हिस्सा पानी का होता है।
  • शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में पानी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • किडनी रोज़ाना लगभग 150–180 लीटर रक्त को फ़िल्टर करती हैं और पर्याप्त पानी मिलने पर अपशिष्ट पदार्थों को मूत्र के माध्यम से बाहर निकालती हैं।
  • शरीर के कुल पानी में 2% की कमी भी प्यास, थकान और एकाग्रता में कमी जैसे लक्षण पैदा कर सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *