आईसीएमआर ने जंगली बीमारी की स्वदेशी वैक्सीन के लिए मानव परीक्षण शुरू किया

The Indian Council of Medical Research (ICMR), under the Department of Health Research, Ministry of Health and Family Welfare, Government of India, is steadily progressing towards the development of an improved vaccine against Kyasanur Forest Disease (KFD). Kyasanur Forest Disease
ICMR under the Department of Health Research, Ministry of Health and Family Welfare, Government of India, is steadily progressing towards the development of an improved vaccine against Kyasanur Forest Disease (KFD). Kyasanur Forest Disease
  • क्यासानुर फारेस्ट डिसीस कर्नाटक, तमिलनाडू और गोवा व महाराष्ट्र के पश्चिमी घाटों के पास रहने वालों लोगों को होती है
  • कर्नाटक सरकार के अनुरोध पर आईसीएमआर ने एनआईवी के सहयोग से केएफडी वैक्सीन पर काम शुरू किया

नई दिल्ली, वरिष्ठ संवाददाता

इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ मिलकर भारत के दक्षिणी और पश्चिमी घाटों से सटे जंगलों में पाई जाने वाली क्यासानुर फारेस्ट डिसीस के खिलाफ वैक्सीन का मानव परीक्षण शुरू कर दिया है। दक्षिण भारत के जंगलों के समीप कर्नाटक, तमिलनाडू, केरल, गोवा और महाराष्ट्र के तटिय क्षेत्रों के जंगलों के पास रहने वाले लोगों पर इसका अधिक प्रभाव पड़ता है।

वैक्सीन निर्माण पर काम भारत सरकार ने कर्नाटक सरकार द्वारा भेजे गए एक पत्र के बाद शुरू किया। केएफडी (क्यासुर फॉरेस्ट डिसीस) के खिलाफ वैक्सीन बनाने के लिए इंडियन इम्यूनोलॉजी लिमिटेड आईआईएल और एनआईवी (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी) मिलकर काम कर रहे हैं। दो डोज की खुराक वाली इस इंएक्टिव यानि असजीव वैक्सीन को 28 दिन के अंतराल में लिया जाएगा।

केएफडी वैक्सीन के निर्माण का दो चरण का परीक्षण पूरा कर लिया गया है, जिसमें एनिमल चैलेंज और टॉक्सिटी का चरण पूरा हो चुका है। सीडीएससीओ के प्रमाणीकरण के बाद वैक्सीन का मानव ट्रायल फेज वन शुरू कर दिया जाएगा, जिसे तीसरे चरण का परीक्षण कहा जाता है। यदि मानव परीक्षण का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया जाएगा और वैक्सीन को मानव प्रयोग के लिए सफल और इम्यूनोजेनिक माना जाता है तो सीडीएससीओ की अनुमति के बाद इसे शुरू कर दिया जाएगा।  यह बीमारी जंगली मक्खी टिक के लार्वा से फैलती है, इसके वाहक बंदर या जंगली जानवर होते हैं। इसलिए इसे मंकी फीवर भी कहते हैं।

मालूम हो कि भारत सरकार चुनौतीपूर्ण स्वास्थ्य समस्याओं को हल करने में राज्य सरकारों को लगातार सहायता देने में लिए प्रतिबद्ध है।

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