
- बायोफार्मा शक्ति सहित एनसीडी बीमारियों की रोकथाम के लिए बायोफार्मा शोध और रिसर्च को मिलेगा बढ़ाया
- दस हजार करोड़ रुपए का बजट बायोफार्मा के लिए किया गया निर्धारित
नई दिल्ली,
वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट रविवार को संसद में पेश कर दिया गया, गैर संक्रामक बीमारियों जैसे डायबिटिज, हृदय रोग और हार्ट डिसीस के लिए वित्त मंत्री श्रीमति निर्मला सीतारमण ने पहली बार बायोफार्मा को बढ़ाने देने के लिए दस हजार करोड़ रुपए की धनराशि आवंटित करने की घोषणा की। बायोफार्मा का नाम आते ही बहुत से लोगों के दिमाग में प्रश्न उठा कि बायोफार्मा आखिर है क्या, दरअसल बायोफार्मा वैक्सीन, टीका और बीमारियों से बचाव के लिए ऐसे उपाय हैं जिनमें कैमिकल या साल्ट की जगह लाइव रीजेंट सेल्स बैक्टीरिया और यीस्ट का प्रयोग किया जाता है। सरकार का मानना है कि बीमारियों से बचाव में कैमिकल या साल्ट की जगह बायो रीजेंट अधिक कारगर साबित हो सकते हैं, इसके लिए बजट में बायोफार्मा शक्ति सेटअप तैयार करने भी घोषणा की है।
बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री के फोरम कोऑडिनेटर राजीव नाथ ने कहा कि देश की लाइफ साइंस इंडस्ट्री को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए दस हजार करोड़ रूपए निवेश के साथ बायोफार्मा शक्ति का गठन करना एक सराहनीय प्रयास है। सरकार के इस फैसले से भारत की पहचान ग्लोबल बायोफार्मा मैन्यूफैक्चिंग हब के रूप में विकसित होगी, जिसमें विशेष रूप से बायोलॉजिक्स और बायोसीमिल्र्स की सहायता से जीवन की गुणवत्ता और सस्ती दवाएं उपलब्ध हो सकेगीं।
देश में बायोफार्मा लक्षित नेटवर्क तैयार के लिए आम बजट में तीन नये एनईपीईआरर्स (नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ फार्मासियुटिक्लस रिसर्च एंड एजुकेशन) बनाने और मौजूदा इंस्टीट्यूटस को बेहतर करने की बात कही गई। देशभर की एक हजार से अधिक क्लीनिकल ट्रायल साइट के लिए बायोफार्मा को मजबूत किया जाएगा, जिससे लंबे समय में नवाचार से मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा। आम बजट में सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गेनाइजेशन सीडीएससीओ को बेहतर करने की भी घोषणा की गई, जिससे देश में दवाओं की गुणवत्ता को और बेहतर किया जा सके। आम बजट में कैंसर सहित सात जीवन रक्षक दवाओ को सस्ता करने की भी बात कही गई है, जिससे आम लोगों को राहत मिलेगी।
क्या है बायोफार्मा
बायोफार्मा का मतलब ऐसी दवाओं से है, जिनको बनाने के लिए लिविंग आर्गेनिज्म का प्रयोग किया गया हो, जैसे सेल्स बैक्टीरिया और यीस्ट, देश में अभी जापात की याकूल्ट लाइव गुड बैक्टरीरिया के साथ हेल्दी डायजेस्टिव ड्रिंक बना रही है। वैक्सीन और कैंसर की टारगेटेट थेरेपी इसी श्रेणी में रखे जाते हैं। इसमें प्रोटीन, एंटीबायोटिक्स, वैक्सीन, जीन थेरेपी और सेल्स आधारित थेरेपी जैसे स्टेम सेल्स थेरेपी आदि भी शामिल हैं।
- बायोफार्मा साधारण फार्मा से अलग है, सामान्य फार्मा कंपनियां कैमिकल्स या साल्ट से दवाएं बनाती हैं जैसे पैरासिटामोल, कांबिफ्लेम आदि, जबकि बायोफार्मा, लाइव यानि जीवित सेल्स से वैक्सीन, इंसुलिन और थेरेपेटिक इंजेक्शन तैयार किए जाते हैं।
- कोविड वायरस के लिए तैयार की गई वैक्सीन बायोफार्मासियुटिकल्स की श्रेणी में आती हैं, इसके साथ ही बैक्टीरिया का प्रयोग करके बनाए गए इंसुलिन, ऑटोइम्यून थेरेपी, जीन थेरेपी और एमआरएनए थेरेपी बायोफार्मा की श्रेणी में शामिल हैं।
क्या है बायोफार्मा का महत्व
- जिन बीमारियों का इलाज कैमिकल्स से संभव नहीं उनका इलाज बायोफार्मा से हो सकता है
- इन्हें टारगेटेड मेडिसिन भी कहा जाता है, यह वायरस की संरचना के आधार पर उन्हें डीकोड करने के लिए तैयार की जाती हैं।
- रेयर डिसीस, कैंसर, डायबिटिज और ऑटोइम्यून बीमारियों में अभी बायोफार्मा दवाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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