
- सिने जगत की जानी मानी फैशन आईकॉन उरफी जावेद ने शेयर किया विडियो
नई दिल्ली
कहीं आप भी उम्र कम दिखने या सुंदर दिखने के लिए फिलर्स का प्रयेाग करने जा रही हैं तो सावधान हो जाइएं, यह खबर आपके लिए है, प्राकृतिक सुंदरता को छोड़ कर कृत्रिम इंजेक्शन चेहरे का हुलिया बिगाड़ सकते हैं, पढ़े पूरी खबर-
हमेशा अपने निराले फैशन से मीडिया का ध्यान आर्कषित करने वाली उरफी जावेद ने रविवार को अपनी एक ऐसी विडियो सोशल मीडिया पर शेयर की, जिसमें उनके होंठ और चेहरा बुरी तरह सूजा हुआ था, उफीर् ने लिखा कहा फेशियल फीलर्स हटाने के बाद उनका चेहरा बहुत खराब हो गया है, अब वह दोबारा अगर फीलर्स लगवाएगीं तो किसी एक्सपर्ट से ही लगवाएंगीं। फीलर्स हटवाने के बाद त्वचा में सूजन या खुजली की बात विशेषज्ञ भी स्वीकार करते हैं। अधिक बेहतर दिखने और उम्र छिपाने के लिए अब महिलाएं केवल पार्लर तक नहीं जाती, उनका दायरा अब कॉस्मेटोलॉलिस्ट और त्वचा विशेषज्ञों तक पहुंच गया है, जो ऐसी कई तरह की नॉन इंवेसिव सर्जरी कर रहे हैं, जिसके परिणाम घातक भी हो सकते हैं।
कॉस्मेटोलॉजिस्ट डॉ मेहराज जहान बेगम (ब्यूटी एक्सपर्ट और केराडिस की संस्थापक, हेयर ट्रांसप्लांट सर्जल और एटर्म क्लीनिक कोलकाता की मेडिकल डायरेक्टर) मेहराज कहती हैं कि नियमित रूप से ह्यालूरोनिक एसिड या एचए फिलर्स को घोलने के लिए ह्यालूरोनिडेस का उपयोग करते हैं, यह एक तरह का एंजाइम्स होता है जो एचए को तोड़ने का काम करता है, कई बार यह प्रक्रिया तुरंत शुरू हो जाती है, जबकि कई बार इस प्रक्रिया में कई दिन भी लग सकते हैं। क्योंकि फिलर्स शरीर में पहुंच कर घुलने लगता है, और रिंकल्स और लकीरों को कम करता है, इसलिए कई बार इसके प्रयोग के बाद उस विशेष जगह पर सूजन और लालिमा हो जाती है, लेकिन यदि फिलर्स विशेषज्ञ द्वारा इंजेक्ट किए जाएं तो कुछ ही समय पर त्वचा सामान्य हो जाती है। डॉ मेहराज कहती हैं ब्यूटी पॉर्लर की तरह की त्वचा विशेषज्ञों भी हर जगह दुकान खोलकर बैठे हैं, जिनकी विशेषज्ञता और अनुभवों की कभी जांच नहीं की जाएगी, कॉस्मेटोलॉजी एक जिम्मेदारी वाला क्षेत्र है, जिसके अच्छे परिणाम भी हो सकते हैं और बुरे भी।
घुलने या विघटन का समय
अधिकांश फिलर एक या दो हफ्ते में मेटाबोलाइज्ड हो जाते हैं और ज्यादातर मरीजों में शुरूआती 48 घंटों से हफ्तों तक बदलाव देखे जाते हैं। फिलर्स लगाने की पूरी प्रक्रिया दो चरणों में होगी पहले चरण में त्वचा में इंजेक्शन के माध्यम से एचए को इंजेक्ट किया जाता है, जो त्वचा में जाकर घुलने या फूलने लगते हैं, दूसरी प्रक्रिया में कुछ हफ्ते बाद अतिरिक्त फिलर्स को हटाया जाता है, दूसरा चरण बाद पर निर्धारित करता है कि फिलर्स को स्वीकार करने की त्वचा की प्राकृतिक प्रक्रिया कितनी सामान्य है। एक बाद ध्यान देने वाली है कि सभी फिलर्स एक बाद प्रयोग के बाद हटाए नहीं जा सकते केवल एचए यानि हायलूरोनिडस फिलर्स ही रिवर्स या हटवाया जा सकता है। जबकि सिलिकॉन या फिर स्कल्ट्रा आधारित फिलर्स का इस्तेमाल एक बार में ही किया जाता है। ब्रेस्ट इंप्लांट में सिलिकॉल फिलर का प्रयोग होता है। हालांकि फिलर का इस्तेमाल हर किसी के लिए सही हो यह जरूरी नही है, त्वचा की एडेप्टिलिटी के आधार पर फिलर्स त्वचा द्वारा स्वीकार्य किए जाते हैं, इसलिए इसको लगवाने और हटाने के बाद सूजन और चेहरा लाल होने जैसी समस्याएं होती है, जोकि कुछ दिन के बाद ठीक हो जाती हैं। बावजूद इसके विशेषज्ञ कृत्रिम फिलर्स की जगह प्राकृतिक सुंदरता को अधिक महत्व देते हैं। फिलर्स का लंबे समय तक इस्तेमाल त्वचा को और अधिक ढीला और लचीला करता है, इसलिए फिलर्स हटवाने के बाद त्वचा अधिक उम्रदराज दिखती है।
क्या है फेशियल फिलर्स
जाने माने डरमेटोलॉजिस्ट डॉ मनीष जांगड़ा कहते हैं कि फेशियल फिलर्स को डर्मल फिलर भी कहा जाता है, यह इंजेक्शन द्वारा त्वचा तक पहुंचाया जाने वाला एक कैमिकल है, जिसका इस्मेमाल त्वचा के घनत्व या फिर झुर्रियो को कम करने के लिए किया जाता है, यह नॉन इंवेसिव या गैर सर्जिकल प्रक्रिया है, जो उम्र के साथ दिखने वाली महीन रेखाओं और झुर्रियों को ठीक करती है, इसके परिणाम आम तौर पर तुरंत नहीं दिखाई देते, लेकिन कई महीनों या वर्षों तक इसका असर दिखता है। यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि फिलर्स कहां लगावाए जा रहे हैं।
फिलस प्रयोग करते हुए कुछ सावधानियां
- हमेशा विशेषज्ञ या अनुभवी त्वचा विशेषज्ञ से ही फिलर्स लगावएं
- क्योंकि यह गैर सर्जिकल प्रक्रिया है, इसके लिए केवल एक से डेढ़ घंटे का समय काफी है।
- फिलर्स का प्रयोग कितना कारगर होगा, यह पूरी तरह इस बात निर्भर करता है कि फिलर्स लगावाने वाले की त्वचा किस तरह की है, सेंसिटिव त्वचा पर इसके नकारात्मक प्रभाव अधिक होते हैं, इसलिए ऐसे किसी भी प्रयोग से पहले त्वचा की जांच अवश्य होनी चाहिए।

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