
New Delhi
लगातार इंस्टाग्राम रील्स या यूट्यूब शॉर्ट्स स्क्रॉल करना आपके दिमाग के रिवार्ड सिस्टम को उतना ही ओवरस्टिम्युलेट कर सकता है, जितना नशे की लत करती है।
🔹 स्टडीज़ के मुताबिक, यह आदत दिमाग में डोपामाइन का लेवल तेजी से बढ़ाती है, जिससे बार-बार वही सुखद अनुभव पाने की चाह बढ़ती जाती है।
🔹 इससे ध्यान, याददाश्त और स्लीप क्वालिटी पर बुरा असर पड़ता है।
🔹 न्यूरोलॉजिस्ट्स चेतावनी देते हैं कि लगातार ऐसा करने से प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स सिकुड़ सकता है, जो निर्णय लेने और आत्म-नियंत्रण के लिए ज़िम्मेदार होता है।
👨⚕️ एक्सपर्ट्स के अनुसार, रोज़ाना 2-3 घंटे से ज्यादा स्क्रीन टाइम आपके दिमाग को “डिजिटल इंटॉक्सिकेशन” की ओर ले जा सकता है, जिससे ध्यान भटकना, याददाश्त कमज़ोर होना और इम्पल्सिव बिहेवियर जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
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🧠 रील्स और शॉर्ट्स की लत: दिमाग के रिवार्ड सिस्टम पर नशे जैसी मार
2025 की नई रिपोर्टों और मनोवैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब शॉर्ट्स और अन्य शॉर्ट-फॉर्म वीडियो का लगातार स्क्रॉल करना आपके दिमाग के डोपामाइन रिवार्ड सिस्टम को उसी तरह ओवरस्टिम्युलेट करता है जैसे नशे की लत करती है।
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⚠️ क्या होता है दिमाग में?
– हर रील या शॉर्ट देखने पर दिमाग में डोपामाइन नामक रसायन रिलीज़ होता है, जो तात्कालिक आनंद देता है।
– यह आनंद अस्थायी होता है, लेकिन दिमाग बार-बार उसी अनुभव को दोहराने के लिए प्रेरित करता है।
– नतीजा: स्क्रॉलिंग की लत, ध्यान भटकना, और तुरंत संतुष्टि की आदत।
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🧪 नई स्टडी के निष्कर्ष:
– रील्स देखना शराब से भी 5 गुना ज्यादा खतरनाक हो सकता है।
– इससे दिमाग की वायरिंग गड़बड़ हो सकती है—विशेष रूप से प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स, जो निर्णय लेने और भावनाओं को नियंत्रित करता है।
– किशोरों में यह आदत ध्यान, नींद, और स्मृति को प्रभावित करती है।
– MRI स्टडी में पाया गया कि स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग कॉर्टेक्स को पतला कर सकता है, जिससे आवेगपूर्ण निर्णय और कम सोचने की क्षमता विकसित होती है।
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📱 आदत कैसे बनती है:
– एल्गोरिद्म हर बार नया और दिलचस्प कंटेंट दिखाता है, जिससे “इनफिनिट स्क्रॉल” की लत लग जाती है।
– FOMO (Fear of Missing Out) यानी ट्रेंड से पीछे छूटने का डर, व्यक्ति को बार-बार स्क्रीन की ओर खींचता है।
– सुबह उठते ही, ब्रेक टाइम में, और सोने से पहले—रील्स देखने की आदत दिनचर्या का हिस्सा बन जाती है।
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🧘 समाधान क्या है?
– डोपामाइन डिटॉक्स: कुछ समय के लिए डिजिटल ब्रेक लेना
– स्क्रीन टाइम लिमिट सेट करना
– गहरी सोच और ध्यान केंद्रित करने वाले कार्यों को प्राथमिकता देना
– रील्स की जगह किताबें, संगीत या ध्यान को अपनाना
Source- Navachar Digital News agency

Senior Reporter