
पॉम ऑयल आपके स्वास्थ्य, खासकर आपके दिल के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है?
नई दिल्ली, परिमल कुमार
बाजार से बच्चों के लिए नमकीन, चिप्स जैसी पैकेटबंद चीजें खरीदते समय, क्या आपने कभी सोचा है कि इन्हें बनाने में किन सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है? क्या आपने कभी इन पैकेटों के पीछे लिखे इन्ग्रीडिएंट्स को ध्यान से पढ़ा है? क्या आप जानते हैं कि इन उत्पादों को तैयार करने में पाम ऑयल का इस्तेमाल होता है, जो आपके स्वास्थ्य, खासकर आपके दिल के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है?
बच्चों में बढ़ते हार्ट अटैक के मामलों और पाम ऑयल से होने वाले नुकसान पर चर्चा करने के लिए परिमल कुमार ने मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. एच. के. चोपड़ा से विशेष बातचीत की।
कितना खतरनाक है पाम ऑयल?
डॉ. चोपड़ा बताते हैं कि हमारे शरीर में कम से कम 1 बिलियन कैपिलरीज़ और 60,000 माइल्स रक्त वाहिकाएं होती हैं। इंसानी शरीर में 60 ट्रिलियन सेल्स और 6 ट्रिलियन केमिकल रिएक्शन होते हैं। यह सभी क्रियाएं पाम ऑयल के प्रभाव से प्रत्येक सेकंड प्रभावित होती हैं।पाम ऑयल में मोनो-अनसैचुरेटेड फैट, पॉली-अनसैचुरेटेड फैट, ओमेगा-3, ओमेगा-6, और जरूरी विटामिन जैसे तत्व नहीं होते, जो एक आदर्श खाद्य तेल में होने चाहिए। पाम ऑइल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह खाद्य पदार्थों को ताजा दिखाने में मदद करता है, और इसी कारण से इसका बाजार में बड़े पैमाने पर उपयोग होता है।
पाम ऑयल पर अमेरिका और यूके में प्रतिबंध
अमेरिका और यूके जैसे देशों ने पाम ऑयल पर प्रतिबंध लगा दिया है। डॉ. चोपड़ा का कहना है कि अब भारत में भी ऐसा कदम उठाने का समय आ गया है। पाम ऑयल शरीर के सेल्स और धमनियों की लाइनिंग में इंजरी (क्षति) पैदा करता है, जिससे फैटी स्ट्रिक्स जमा होकर नसों को संकुचित कर देती हैं। यदि यह संकुचन हृदय में होता है तो हार्ट अटैक, मस्तिष्क में होता है तो स्ट्रोक, और पैरों में होता है तो अन्य गंभीर बीमारियां पैदा कर सकता है।
बच्चों और परिवार के लिए चेतावनी
यदि किसी को हाई ब्लड प्रेशर या हृदय संबंधी समस्या है, तो पाम ऑयल और उससे बनी पैकेटबंद चीजों से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए।
- यदि बच्चे चिप्स या नमकीन जैसे पैकेटबंद उत्पाद खाते हैं और उन्हें किसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है, तो तुरंत उनका सेवन बंद कर दें।
- भले ही समस्या दिखाई न दे, बच्चों और परिवार के सभी सदस्यों के लिए पाम ऑयल से बनी चीजों का सेवन रोक देना आवश्यक है, ताकि दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सके।
भारत में जागरूकता की आवश्यकता:
अब कई कंपनियां ‘No Palm Oil’ लिखना शुरू कर चुकी हैं। इसे आप कैसे देखते हैं?
इस पर डॉ. चोपड़ा ने जवाब दिया कि यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है। यदि उत्पादों में पाम ऑइल नहीं है, तो इसका उल्लेख करना आवश्यक है, और यदि है, तो उसे भी स्पष्ट रूप से लिखा जाना चाहिए। इससे उपभोक्ता को यह जानने में मदद मिलेगी कि उसे कौन-सी चीज खरीदनी चाहिए और कौन-सी नहीं। जब बाजार में इस विषय को लेकर जागरूकता बढ़ेगी, तो सरकार की नीतियों में भी बदलाव आएगा, और धीरे-धीरे पाम ऑइल का उपयोग बंद हो जाएगा।
डॉ. चोपड़ा ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि हर परिवार, माता-पिता और बच्चों को पाम ऑइल के खतरों के बारे में जानकारी होनी चाहिए। अगर इस विषय पर जागरूकता बढ़ती है, तो इसे पूरी तरह से समाप्त करना आसान हो जाएगा। उन्होंने सुझाव दिया कि हर स्कूल में बच्चों के लिए प्रतिदिन 15-20 मिनट का एक सत्र आयोजित किया जाना चाहिए, जिसमें उन्हें स्वास्थ्य के लिए हानिकारक चीजों के बारे में जानकारी दी जाए।
सिर्फ स्कूलों तक ही सीमित नहीं, बल्कि डिजिटल, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से इस संदेश को जन-जन तक पहुंचाना चाहिए।
अपनी बात को समेटते हुए, डॉ. चोपड़ा ने सरकार से दो महत्वपूर्ण मिशन शुरू करने का सुझाव दिया— Mission Nutrition India और Mission Ideal Edible Oil India. इन अभियानों के माध्यम से न केवल लोगों को पाम ऑइल के दुष्प्रभावों से बचाया जा सकता है, बल्कि युवा दिल के दौरे, लकवे, और फैटी लिवर जैसी गंभीर बीमारियों को भी रोका जा सकेगा। उन्होंने माता-पिता से अपील की कि वे अपने बच्चों को पैकेट फूड, नमकीन और चिप्स जैसे पाम ऑइल-युक्त उत्पादों से दूर रखें।
परिमल कुमार वरिष्ठ पत्रकार और Kiddocracy के संस्थापक हैं

Parimal Kumar, Senior Journalist