
- योजना आधारित बजट आवंटन की जगह मरीज को केंद्रित योजना, क्रियान्वयन और लंबे देखभाल की जरूरत पर हो ध्यान
नई दिल्ली
जानी मानी अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य मैगजीन द लांसेट ने देश के आम बजट 2026-27 को लेकर अहम टिप्पणी की है। पाक्षिक पत्रिका में प्रकाशित पत्र में भारत में 2030 तक लक्षित यूनिवर्सल हेल्थ केयर को हासिल करने के लिए अहम बातों पर ध्यान देने की बात कही है। द लांसेट पेपर की प्रतिक्रिया इसलिए भी अहम हो जाती है क्योंकि चार दिन बाद यानि एक फरवरी को सदन में आम बजट पेश किया जाएं, स्वास्थ्य क्षेत्र से बहुत सारी उम्मीदों के बीच लांसेट ने पेपर में जोर दिया है कि योजना आधारित बजट आवंटन के साथ ही स्वास्थ्य बजट पेंशेंट सेंट्रिक और लंबे इलाज व देखभाल सेवाओं को ध्यान में रखकर जारी किया जाना चाहिए।
लांसेट ने पेपर में जवाबदेही को अहम बिंदु बनाया है, और कहा है कि योजनाओं और क्रियान्वयन के साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि योजनाओं का संचालन कितने बेहतर तरीके से किया जा रहा है। प्राइमरी और सेकेंडरी स्वास्थय केयर सेंटर का राज्य या जिला स्तरीय स्वास्थ्य केंद्रों के साथ सामंजस्य बढ़ाने के साथ ही टेरिटरी केयर सेंटर की दक्षता बढ़ाने पर भी लासेंट में जोर दिया गया है। लासेंट की स्टडी इस बात की ओर इशारा करती है कि योजनाएं या प्लानिंग चाहे जिनती भी बना ली जाएं जबकि तक उनका सतही स्तर पर लागू नहीं किया जाता आम लोगों को उसका फायदा नहीं मिल पाएगा। इसके लिए संस्थागत प्रयासों को बेहतर करने की पैरवी की गई। लांसेट की अध्ययन को ध्यान में रखते हुए देश के विभिन्न हेल्थ पॉलिसी विशेषज्ञों ने भी ऐसे स्वास्थ्य बजट की बात कही है जिसमें योजनाओं के क्रियान्वयन पर अधिक जोर दिया जाए। इसके आधार पर योजनाओं का प्रारूप इस तरह तैयार किया जाएं, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच सामांजस्य को आधिकारिक हस्तक्षेप बिना बेहतर किया जा सके। नियमित ओपीडी मरीजों या प्रीवेंटिव केयर के लिए अस्पतालों पर निर्भरता कम करने के लिए सार्वजिनक क्षेत्र में बजट का आवंटन किया जाना चाहिए, जिससे अस्पतालों पर मरीजों का बोझ कम किया जा सकेगा। स्वास्थ्य योजनाएं या फिर हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर की जगह पेशेंट सेंट्रिक सुविधाओं पर जोर दिया जाना चाहिए, इसके लिए पब्लिक हेल्थ फंडिग को बढ़ावा दिया जाएं, जैसा की लांसेट ने भी अपने पेपर में प्रमुखता से कहा है। विशेषज्ञों के अनुसार स्वास्थ्य बजट में हेल्थ डाटा प्लेटफार्म, प्रबंधन ट्रेनिंग और विकेंद्रित योजनाओं को अमल में लाना चाहिए, जिससे बजट और योजनाओं को सही से लागू किया जा सके।